Sawan 2021: श्रावण मास में शुभ होता है पौधारोपण, मेरठ में महामंडलेश्वर ने समझाया महत्‍व

पारिजात को छूने मात्र से सभी दुख दूर हो जाते हैं। इसलिए इस मौसम में पौधारोपण करना शुभ माना गया है। इस दौरान मेरठ सूरजकुंड में महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज ने बताया कि श्रावण माह भगवान शिव को विशेष प्रिय है। सावन माह विशेष महत्‍व है।

Prem Dutt BhattMon, 02 Aug 2021 05:54 PM (IST)
मेरठ के सूरजकुंड स्थित मनोहर नाथ मंदिर में सोमवार पौधारोपण किया गया।

मेरठ, जागरण संवाददाता। पर्यावरण एवं स्वच्छता क्लब की ओर से सावन के दूसरे सोमवार को मेरठ के सूरजकुंड स्थित मनोहर नाथ मंदिर में पौधारोपण किया गया। मंदिर परिसर में क्लब टीम ने परिजात, गुलमोहर, आंवला और गुड़हल के पौधे लगाए गए। क्लब के निदेशक आयुष और पीयूष गोयल ने बताया कि आज के परिपेक्ष्य में अधिक से अधिक प्राणवायु प्राप्त करने के लिए पौधारोपण करके प्रकृति संरक्षण आवश्यक है।

परिजात की उत्पत्ति

समुद्र मंथन श्रावण माह में ही किया गया था, समुंद्र मंथन से परिजात की उत्पत्ति हुई थी। जिसे कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। पारिजात को छूने मात्र से सभी दुख दूर हो जाते हैं। इसलिए इस मौसम में पौधारोपण करना शुभ माना गया है। इस दौरान महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज ने बताया कि श्रावण माह भगवान शिव को विशेष प्रिय है। श्रावण माह में भगवान शिव की पूजा एवं व्रत का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

सिद्ध पीठ श्री योगपुरा महादेव मंदिर

मुजफ्फरनगर। श्री योगपुरा महादेव मंदिर कस्बे से बड़ौत मार्ग को मिलाने वाले रास्ते पर स्थित है। आज इस मार्ग को योगपुरा मार्ग के नाम से जाना जाता है। प्राचीन सिद्ध पीठ मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का केन्द्र है। मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालु जलाभिषेक कर मनौती मांगते है।

इतिहास

योगपुरा महादेव मंदिर की स्थापना के काल विषय में तो सही ज्ञात नहीं है। बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि करीब तीन सौ वर्ष पूर्व एक सिद्ध योगी महात्मा ने यहां पर तपस्या की थी। तपस्या के दौरान शिवलिंग की स्थापना की गई थी। उन्होंने क्षेत्र में शिव मंदिर की स्थापना के लिए अन्न जल त्याग दिया था। उन्हीं के नाम पर श्री योगपुरा महादेव मंदिर नाम पड़ा। यह सिद्धपीठ मंदिर है।

विशेषता

श्रावण मास में विशेष मान्यता होने के कारण दूर-दूर से आकर श्रद्धालु पूजा अर्चना व जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में लगी ईंट व चूने से बने मंदिर बनावट मराठा शैली की व काफी पुरानी है। आज भी मंदिर प्रांगण में पुराने समय का बना पानी का कुआं है, जो अब सूख चुका है। मंदिर का जीर्णोधार लाला नरोत्तमदास ने वर्ष 1970 में कराया जिसमें मंदिर को सुंदरता प्रदान की गई है। इसके बाद पुरी से शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ का आगमन व प्रवचन हुआ था। शिव मंदिर के अलावा परिसर में हनुमान व शनिधाम के मंदिर भी बनाए गये है। मंदिर को प्रतिदिन सजाया जाता है। मंदिर मे शिवभक्तों के लिए ठहरने व भोजन की व्यवस्था भी की जाती है। शिवभक्तों की मनोकामना महादेव पूरी करते हैं। सुबह शाम आरती पूजन होता है। श्रावण मास में विशेष पूजा अर्चना होती है। दूर दराज से भारी संख्या में भक्त श्रद्धा एवं विश्वास से मन्नतें मांगते है, उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

इनका कहना है 

- पंडित पंकज पुरोहित, पुजारी

मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। बाग बगीचे के कारण रमणीक स्थान बना है। श्रावण मास में हजारों की संख्या में शिवभक्त कावडिए यहां ठहरते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी कांवड़ भी मंदिर में चढ़ाते हैं।

- धनप्रकाश त्यागी, श्रद्धालु

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