Chaudhary Ajit Singh Death News: अजित सिंह वीपी सिंह की सरकार में पहली बार बने थे केंद्रीय मंत्री, जानिए- कैसा रहा है इनका सियासी सफर

चौधरी चरण सिंह के बेटे व रालोद सुप्रीमों अजित सिंह का निधन।

Chaudhary Ajit Singh Death News चौधरी अजित सिंह का सियासी सफर काफी प्रभावी रहा। उनके पिता व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह उन दिनों बीमार हो गए थे। जिसके बाद 1986 में अजित सिंह को राज्‍यसभा भेजा गया था। वीपी सिंह की सरकार में बनाएं गए थे मंत्री।

Himanshu DwivediThu, 06 May 2021 10:16 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे व रालोद सुप्रीमों अजित सिंह का कोरोना से गुरूवार को निधन हो गया। इस घटना से पूरे पश्चिमी यूपी में शोक की लहर दौड गई। 22 अप्रैल को अजित सिंह की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। उनके फेफडें में ज्‍यादा संक्रमण होने और तबीयत खराब होने के कारण उन्‍हें गुरुग्राम के एक प्राइवेट अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर गुरूवार को उनका निधन हो गया।

1986 में शुरू हुआ था राजनीतिक सफर 

चौधरी अजित सिंह का सियासी सफर काफी प्रभावी रहा। उनके पिता व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह उन दिनों बीमार हो गए थे। जिसके बाद 1986 में अजित सिंह को राज्‍यसभा भेजा गया। दो साल तक उन्‍होंने लोकदल (ए) और जनता पार्टी के अध्‍यक्ष पद का कार्यभार भी संभाला था। बाद में 1989 में अपने पार्टी का विलय जनता दल में करने के बाद वे पार्टी के महासचिव पद पर भी रहे।

1989 में पहली बार बने थे केंद्रीय मंत्री 

चौधरी अजित सिंह पहली बार 1989 में पहली बार बागपत से लोकसभा का चुनाव लडे और यहां पर भारी मतो से जीतकर लोकसभा के लिए पहुंचे थे। कहा जाता है कि यहीं से इनकी पहचान किसान नेता के रूप में उभर कर सामने आई थी। बाद में इन्‍होंने यहां से कई बार चुनाव लड़ा और सात बार सांसद बने थे। 1989 में वीपी सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। इसके बाद वह 1991 में फिर बागपत से ही लोकसभा पहुंचे थे। इस बार नरसिम्हाराव की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1996 में वह तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे, लेकिन फिर उन्होंने कांग्रेस और सीट से इस्तीफा दे दिया था। 

अजित सिंह ने की थी राष्‍ट्रीय लोकदल की स्‍थापना

अपने राजनितिक सफर में एक अध्‍याय और जोड़ते हुए 1997 में उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल की स्थापना की और 1997 के उपचुनाव में बागपत से जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1998 में चुनाव में वह हार गए, लेकिन 1999 के चुनाव में फिर जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2001 से 2003 तक अटल बिहारी सरकार में चौधरी अजित सिंह मंत्री रहे थे।

मुजफ्फरगनर से दो बार हारे थे चुनाव 

अ‍टल बिहारी सरकार में मंत्री के बाद वे 2011 में यूपीए का हिस्सा बन गए। 2011 से 2014 तक वह मनमोहन सरकार में मंत्री रहे। 2014 में वह मुजफ्फरनगर सीट से लड़े, लेकिन हार गए। 2019 का चुनाव भी चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर से लड़े, लेकिन इस बार भी बीजेपी प्रत्याशी संजीव बलियान ने उन्हें हरा दिया। हालांकि, किसान आंदोलन का उनकी पार्टी को फायदा हुआ है और जिला पंचायत चुनाव में आरएलडी ने शानदार प्रदर्शन किया है।

1986 में पहली बार खेकड़ा आए थे छोटे चौधरी

बागपत, जेएनएन। अमेरिका से लौटने के बाद छोटे चौधरी पहली बार खेकड़ा में 1986 में आए थे। यहां उन्होंने रागनी प्रतियोगिता के गायकों को शील्ड देकर सम्मानित किया था। इसके बाद छोटे चौधरी ने राजनीतिक सफर में ऊंचाइयों को छूआ। रालोद कार्यकर्ता बताते हैं कि 1980 में खेकड़ा में तांगा स्टैंड के पास रागनी प्रतियोगिता हुआ करती थी। 1986 में हुई प्रतियोगिता के समय बड़े चौधरी की तबियत खराब थी। तब उनके कहने पर पहली बार चौधरी अजित ङ्क्षसह खेकड़ा में आए थे। उन्होंने विजेताओं को शील्ड देकर सम्मानित किया था।  

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