कोरोना से निपटने को जरूरी है श्वसन तंत्र को मजबूत रखना, आइए जानते हैं भस्त्रिका प्राणायाम की सही विधि

यह है भस्त्रिका प्राणायाम की सही विधि ।

कोरोना से निपटने के लिए योग सबसे जरूरी है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता व श्वसन तंत्र को मजबूत रखें। मौजूदा परिस्थितियों में भस्त्रिका प्राणायाम सबसे उपयोगी सिद्ध हो सकता है। भस्त्रिका का अर्थ होता है धौंकबनी। यह प्राणायाम एक भस्त्र या धौंकनी की तरह कार्य करता है।

Taruna TayalFri, 23 Apr 2021 08:00 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। कोरोना से निपटने के लिए योग सबसे जरूरी है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता व श्वसन तंत्र को मजबूत रखें। यह कहना है योगाचार्य बब्लू ठाकुर का। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में भस्त्रिका प्राणायाम सबसे उपयोगी सिद्ध हो सकता है। भस्त्रिका का अर्थ होता है धौंकबनी। यह प्राणायाम एक भस्त्र या धौंकनी की तरह कार्य करता है। धौंकनी के जोड़े की तरह ही यह ताप को हवा देता है, भौतिक और सूक्ष्म शरीर को गर्म करता है। उन्होंने इसके लाभ व करने का सही तरीका सुझाया है। आइए जानते हैं-

भस्त्रिका प्राणायाम की विधि : सर्वप्रथम आप पद्मासन में बैठ जाएं। ध्यान रहे आपका शरीर, गर्दन व सिर सीधा रहे। शुरू-शुरू में धीरे-धीरे श्वास लें और बलपूर्वक श्वास छोड़ें, फिर बलपूर्वक श्वास लें और बलपूर्वक श्वास छोड़ें। यह क्रिया लोहार की धौंकनी की तरह फुलाते व पिचकाते हुए होना चाहिए और लय न तोड़ें। इस तरह से तेजी के साथ 10 बार बलपूर्वक श्वास लें और छोड़ें। अभ्यास के दौरान आपकी ध्वनि सांप की फुफकार की तरह होनी चाहिए। दस बार श्वसन के बाद अंत में श्वास छोड़ने के बाद गहरा श्वास लें। श्वास को रोककर (कुंभक) धीरे-धीरे श्वास को छोड़ें। इस गहरे श्वास छोड़ने के बाद भस्त्रिका प्राणायाम का एक चक्र पूरा होता है। आप इसे दस चक्र तक कर सकते हैं और धीरे-धीरे बढ़ाएं।

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ

इस प्राणायाम के अभ्यास से गले की सूजन व अन्य समस्या से राहत मिलती है। यह जठराग्नि को बढ़ाता है, बलगम को खत्म करता है, नाक व सीने की बीमारियों को दूर करता है। भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है। अस्थमा रोगियों के लिए यह प्राणायाम काफी लाभप्रद है। नियमित अभ्यास से रोग हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। यह श्वास से संबंधित समस्याओं को दूर करने कारगर है है। भूख बढ़ाने के लिए इस प्राणायाम का अभ्यास बहुत लाभदायक है। शरीर को गर्मी मिलती है। वायु, पित्त व बलगम की अधिकता से होनी वाली बीमारियों दूर होती हैं। नाड़ी प्रवाह शुद्ध होता है। 

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