350 करोड़ का राशन घोटाला ईओडब्ल्यू को स्थानांतरित होगा

350 करोड़ का राशन घोटाला ईओडब्ल्यू को स्थानांतरित होगा

प्रदेश के चर्चित 350 करोड़ के राशन घोटाले की विवेचना ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) को स्थानांतरण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन के आदेश पर कप्तान ने भी संस्तुति कर दी है।

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 03:34 AM (IST) Author: Jagran

मेरठ, जेएनएन। प्रदेश के चर्चित 350 करोड़ के राशन घोटाले की विवेचना ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) को स्थानांतरण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन के आदेश पर कप्तान ने भी संस्तुति कर दी है। हालांकि एसआइटी ने दस मुकदमों में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए हैं। 41 मुकदमों की विवेचनाएं अभी भी चल रही है।

जनपद में हुए राशन के बड़े घोटाले में एसआइटी की टीम ने छह आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसआइटी अपनी जांच में 350 से ज्यादा लोगों को आरोपित बनाने की तैयारी कर रही है। विवेचना में सामने आया कि राशन वितरण में फर्जी आधार नंबर डाला गया, जिसके बाद मशीन से डेटा निरस्त कर दिया गया। एसपी क्राइम रामअर्ज ने बताया कि राशन डीलर एसोसिएशन की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की मांग की है। हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर शासन से घोटाले में अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। शासन ने कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जवाब मांगा है। शासन का आदेश मिलने के बाद एसएसपी अजय साहनी ने विवेचना एसआइटी से ईओडब्ल्यू में स्थानांतरित करने की संस्तुति की है। एसपी क्राइम एवं एसआइटी प्रभारी रामअर्ज का कहना है कि जल्द राशन घोटाले के सभी मुकदमों की विवेचना ईओडब्ल्यू को स्थानांतरित कर दी जाएगी। बता दें कि ईओडब्ल्यू पहले से ही 3500 करोड़ के बाइक बोट घोटाले की विवेचना कर रही है।

एक नजर में एसआइटी की कार्रवाई

-350 करोड़ का राशन घोटाला।

-220 दुकानों में राशन का फर्जीवाड़ा हुआ

-110 आधार कार्ड पर नाम बदलकर राशन लिया।

-27 हजार राशन कार्डों का आधार नंबर बदलकर राशन निकाला।

-51 मुकदमे दर्ज हुए थे

-10 मुकदमों में आरोप पत्र दाखिल हुआ।

-06 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।

यह था मामला

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मेरठ समेत कई जिलों में अपात्र लोगों को फर्जी तरह से राशन देने के नाम पर करोड़ों का घोटाला किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। मेरठ में करीब 350 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई 2016 से 2017 में इसकी जांच के लिए एसआइटी का गठन किया गया। घोटाले की जांच एसपी क्राइम रामअर्ज को दी गई। एसपी क्राइम ने बताया कि घोटाले में पूर्ति विभाग के अफसर और कर्मचारी सभी फंसे हुए है। अभी तक पुलिस दस मुकदमों में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। बता दें कि 27 हजार से अधिक लोगों के राशन की कालाबाजारी की गई है।

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