विकास की दौड़ में पिछड़ा है राफन गांव

विकास की दौड़ में पिछड़ा है राफन गांव

पंचायत चुनाव में प्रधान पद के दावेदार विकास के वादे कर रहे हैं।

JagranThu, 22 Apr 2021 04:45 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। पंचायत चुनाव में प्रधान पद के दावेदार विकास के वादे कर रहे हैं। ऐसे ही आश्वासन पांच साल पूर्व भी भी किए गए थे। अब मौका था दावे व वादों की सच्चाई जानने का। आप को लेकर चलते हैं तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर राफन गांव में। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है। मेहनत-मजदूरी भी करते हैं। फौज व पुलिस में पहले लोग कार्यरत हैं। इसके चलते युवाओं का भी फौज, पुलिस में जाने का रुझान बढ़ा है। दावेदार घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को लुभा रहे हैं लेकिन मतदाता नई 'सरकार' के गठन में शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति की भूमिका चाहते हैं।

पूर्व में आदर्श गांव रह चुके राफन की आबादी 1500 और मतदाता एक हजार से अधिक हैं। यहां भूगर्भ जल दूषित होने के चलते पानी की टंकी लगनी प्रस्तावित है, जिसमें समय लगेगा। पंचायत भवन भी नहीं था लेकिन अब इसके जल्द मिलने की बात कही जा रही है। उच्च शिक्षा के लिए युवकों को मवाना व मेरठ जाना पड़ता है। सामुदायिक भवन नहीं होने से शादी समारोह प्राथमिक स्कूलों परिसर में होते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की भी किल्लत है।

खेल मैदान बनाने का वादा चुनावी रहा

फौज व पुलिस भर्ती के लिए युवक सुबह-शाम गांव के बाहर स्कूल के पास एकत्र होते हैं और करीब 700 मीटर रास्ते पर दौड़ लगाते हैं। इसके पास खाली जमीन पर व्यायाम करते हैं। गौरव, प्रिस और हिमांशु कहते हैं, चुनाव के दौरान खेल मैदान बनाने का वादा किया जाता है, जो कभी पूरा नहीं हो पाता। नालियों में सिल्ट, पैदा हो रहे मच्छर

गांव में बाहरी ओर इंटरलाकिग टाइल्स का खड़ंजा है लेकिन अंदर रास्तों पर ईंटों का खड़ंजा उबड़ खाबड़ हो चुका है। नालियां पक्की बनी हैं लेकिन इनमें सिल्ट जमा है और जगह-जगह जलभराव के चलते मच्छर पनप रहे हैं। गांव के मुख्य रास्ते पर कूड़े के ढेर सफाई की सच्चाई बताने के लिए काफी हैं। हर समस्या के निस्तारण का वादा

इस बार भी चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी विकास, नाली, खड़ंजों के मुद्दे उठाकर मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं। ग्रामीण पूर्व के मुद्दे उठाते हुए कई समस्याएं गिनाते हैं। दावेदार इनके समाधान का वादा कर रहे हैं। गांव का इतिहास

बुजुर्गो के मुताबिक यह गांव पहले सांपन नाम से जाना जाता था। यहां सांपों की भरमार थी और सपेरे भी रहते थे। बताते हैं कि यहां के लोगों को सांप का जहर नहीं चढ़ता था जबकि बाहरी लोगों की सर्पदंश से मौत भी हो जाती थी। धीरे-धीरे इसका नाम राफन पड़ गया। अब राजस्व विभाग के अभिलेखों में भी राफन दर्ज है।

---------------------- बोले ग्रामीण गांव में अभी तक पंचायत भवन नहीं था। इससे गांव के विकास का सहज अंदाजा लगा सकते हैं।

-श्रीपाल सिंह हर पांच वर्ष बाद चुनावी वादे सुनते हैं, जो कभी पूरे नहीं होते। मवाना के नजदीक होने से कई सुविधाएं मिल सकती हैं लेकिन लोग सुविधाओं से दूर हैं। भूगर्भ जल दूषित होने के बावजूद अभी तक घरों में टंकी का पानी नहीं पहुंचा है।

-बलवान सिंह सरकारी योजनाओं का लाभ चंद लोगों को मिल रहा है। पात्र लोग इन योजनाओं से वंचित हैं।

-इंदरजीत सिंह सफाई निरंतर नहीं होने से नालियां अटी पड़ी हैं। मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा लेकिन फागिग की व्यवस्था नहीं की जाती। गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

-विजयपाल सिंह

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