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आखिर कैसे नियंत्रित होगा प्रदूषण, कोल्हू सील किया तो पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरे में लगा दी आग Meerut News

मेरठ, जेएनएन। मोदीपुरम के पास खरदौनी गांव समेत आसपास के क्षेत्र में 15 अक्टूबर को जिन 11 कोल्हू पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय की टीम ने सील कर कार्रवाई की थी, उस कार्रवाई के विरोध में कोल्हू संचालकों ने वहां भारी मात्रा में फैली पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरे में आग लगा दी। जिसके बाद काला धुआं आसमान तक छूने लगा। करीब पांच किमी तक ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। जहरीले धुएं से ग्रामीणों का दम घुटने लगा। इस मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरोपित कोल्हू संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।

गांव में रहना हुआ मुहाल

लावड़ और इंचौली क्षेत्र के खरदौनी समेत कई गांवों में कई वर्षों से कोल्हू संचालित हैं। ग्रामीणों का आरोप था कि कोल्हू की भट्ठी में संचालक इंधन के नाम पर कचरे से निकली प्लॉस्टिक और पॉलीथिन को जलाकर गुड़ बनाने का काम कर रहे हैं। भट्ठी के जहरीले धुएं से गांव में रहना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पल्लवपुरम स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी से की। जिसके बाद टीम बनाकर 15 अक्टूबर को संबंधित कोल्हू पर जांच कराई, जहां आरोप सही पाए गए।

लखनऊ मुख्‍यालय भेजी गई रिपोर्ट

टीम ने ऐसे 11 कोल्हू पर सील लगा दी और उन पर सख्त कार्रवाई करने के लिए लखनऊ स्थित मुख्यालय फाइल भेज दी। कोल्हू के आसपास भारी संख्या में पॉलीथिन और प्लास्टिक पड़ी हुई थी, जिस पर बुधवार और गुरुवार को कोल्हू संचालकों ने आग लगा कर सीलिंग की कार्रवाई का विरोध किया। आग के काले धुएं से सांस लेना भारी पड़ गया। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने पुलिस और क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय को दी।

टीम की लापरवाही से लगी आग

कोल्हू पर सील की कार्रवाई के दौरान प्लास्टिक और पॉलीथिन भारी मात्रा में सभी 11 कोल्हू के आसपास पड़ी थी। टीम उसी दौरान प्लास्टिक और पॉलीथिन को जब्त कर वहां से हटा देती तो आग के कारण वातावरण को प्रदूषित होने व लोगों को परेशानी से बचाया जा सकता था। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके त्यागी का कहना है कि प्लास्टिक और पॉलीथिन में आग लगाने वाले आरोपितों पर केस दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना भी वसूला जाएगा। वायु प्रदूषण से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

रोकथाम को दिए हैं निर्देश

कुछ दिन पूर्व मेरठ आए राष्ट्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण न्यायाधिकरण के चेयरमैन भूरेलाल ने अफसरों को सख्त चेतावनी दी थी कि वह वायु प्रदूषण की रोकथाम को सख्त कदम उठाएं। इसके बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आया और गुरुवार को जिलेभर के लिए तीन टीमों का गठन कर दिया। इस टीम में संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट, थानाध्यक्ष और एक अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग से शामिल होगा। शुक्रवार से यह टीम उन इंडस्ट्रीज की पड़ताल करेगी, जिनमें प्रदूषित ईंधन जलाया जा रहा है। जिसके कारण वायु प्रदूषण से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है।

जांच के लिए तीन टीमों का गठन

वायु प्रदूषण को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार सख्त है। राष्ट्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण न्यायाधिकरण के चेयरमैन भूरेलाल ने उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र जारी कर प्रदूषित ईंधन जलाने वाली इंडस्ट्रीज और छोटे कारखानों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसी कड़ी में कुछ दिन पूर्व चेयरमैन भूरेलाल खुद मेरठ पहुंचे और मंडल के प्रशासनिक व प्रदूषण नियंत्रण अफसरों की बैठक ली। पल्लवपुरम में स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय का कार्यक्षेत्र मेरठ और बागपत है। जिसके चलते चेयरमैन ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके त्यागी को जल्द ही कार्य में सुधार करने और प्रदूषित ईंधन जलाने वाली इंडस्ट्रीज को चिंहित कर कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को मेरठ में तीन टीमों का गठन कर दिया गया, जो संबंधित क्षेत्र में इंडस्ट्रीज की जांच पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट सौपेंगी। वहीं सड़क, खुले मैदान, गली-मोहल्लों में कूड़ा जलाने वालों को भी चिंहित कर कार्रवाई को कहा है।

कोल्हू संचालकों ने रखा अपना पक्ष

खरदौनी और आसपास के गांव में संचालित जिन 11 कोल्हू पर प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रीय अधिकारी की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई की थी, वह कोल्हू संचालक सपा नेता बाबर चौहान के नेतृत्व में गुरुवार को पल्लवपुरम स्थित प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रीय कार्यालय पर अधिकारी से मिले। कोल्हू संचालकों ने भविष्य में पॉलीथिन नहीं जलाने की बात कही, जिस पर प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रीय अधिकारी आरके त्यागी ने संचालकों से शपथ पत्र मांगे, जिसमें भविष्य में सिर्फ मानकों के आधार पर तय ईंधन ही जलाने की बात हो।

इनका कहना है

तीन टीमों का गठन कर दिया गया है। टीमों में संबंधित क्षेत्र से एक-एक मजिस्ट्रेट, थानाध्यक्ष और प्रदूषण नियंत्रण विभाग का अधिकारी शामिल हैं, जो जांच पड़ताल कर कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपेंगे।

- आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी। 

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