गजल सम्राट दुष्यंत कुमार का मकान बनेगा संग्रहालय, कार्ययोजना बनाने में जुटे जिले के अफसर

कवि दुष्यंत कुमार के पैतृक गांव राजपुर नवादा में संग्रहालय बनेगा। बिजनौर के राजपुर नवादा गांव में 1931 में पैदा हुए थे महान गजलकार। एमएलसी अश्वनी कुमार त्यागी ने भी संस्कृति राज्यमंत्री से मुलाकात कर दुष्यंत कुमार के आवास को संग्रहालय में तब्दील कराए जाने के प्रयास शुरू किए।

Taruna TayalPublish:Fri, 26 Nov 2021 11:05 PM (IST) Updated:Fri, 26 Nov 2021 11:05 PM (IST)
गजल सम्राट दुष्यंत कुमार का मकान बनेगा संग्रहालय, कार्ययोजना बनाने में जुटे जिले के अफसर
गजल सम्राट दुष्यंत कुमार का मकान बनेगा संग्रहालय, कार्ययोजना बनाने में जुटे जिले के अफसर

बिजनौर, जेएनएन। कवि दुष्यंत कुमार के पैतृक गांव राजपुर नवादा में संग्रहालय बनेगा। जिला प्रशासन ने ग्राम राजपुर नवादा में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े मकान को संग्रहालय में तब्दील किए जाने की सभी तैयारी पूरी कर ली हैं। एमएलसी अश्वनी कुमार त्यागी ने भी इस मामले में संस्कृति राज्यमंत्री से मुलाकात कर दुष्यंत कुमार के आवास को संग्रहालय में तब्दील कराए जाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

मंडावली क्षेत्र के ग्राम राजपुर नवादा निवासी भगवत सहाय और रामकिशोरी देवी के यहां दुष्यंत कुमार का जन्म हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम राजपुर नवादा और माध्यमिक शिक्षा नहटौर और इंटरमीडिएट की शिक्षा चंदौसी में हुई। दसवीं कक्षा में दुष्यंत कुमार ने कविता लिखना शुरू कर दिया था। जिस वक्त उन्होंने साहित्य की दुनिया में कदम रखा, उस वक्त ताज भोपाली एवं कैफ भोपाली का गजलों की दुनिया पर दबदबा था, जबकि हिंदी में भी उस समय अज्ञेय तथा गजानन माधव मुक्तिबोध की कठिन कविताओं का बोलबाला था। उस दौर में सिर्फ 44 वर्ष की उम्र में दुष्यंत कुमार ने काव्य लेखन में अनूठे प्रयोग किए और ख्याति अर्जित की।

1958 में की आकाशवाणी ज्वाइन

मुरादाबाद से बीएड करने के बाद दुष्यंत कुमार ने 1958 में आकाशवाणी ज्वाइन की। वहीं, मध्य प्रदेश में संस्कृति विभाग कार्यरत रहे। आपातकाल के दौरान उनके गजल संग्रह साये में धूप का हिस्सा बनीं। सरकारी सेवा में रहते हुए सरकार विरोधी काव्य रचना के कारण उन्हें सरकार का कोपभाजन भी बनना पड़ा। 30 दिसंबर 1975 की रात्रि में उनका निधन हो गया। उनकी 52 गजलों की लघु पुस्तिका में यहां दरख्तों के साये में धूप लगती है, चलो यहां से चलें और उम्र भर के लिए। हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए। कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। गजल ने लोगों को जागरूक करने का काम किया।

जर्जर हालत में है मकान

ग्राम राजपुर नवादा में स्थित गजलकार दुष्यंत कुमार के आवास को संग्रहालय के रूप में परिवर्तित किए जाने की कार्ययोजना तैयार कर मंजूरी के लिए शासन को भेजी जा रही है। वहीं एमएलसी अश्वनी त्यागी ने भी इस मामले को लेकर संस्कृति राज्यमंत्री से मुलाकात कर दुष्यंत कुमार के आवास को संग्रहालय में तब्दील कराए जाने की बात कही है।

इनका कहना है:

एमएलसी से इस मुद्दे पर बात हुई है। दुष्यंत कुमार के मकान को संग्रहालय में तब्दील किए जाने की कार्ययोजना तैयार कर मंजूरी को भेजी जाएगी। मंजूरी मिलते ही संग्रहालय बनाए जाने का काम कराया जाएगा।

-उमेश मिश्रा, डीएम