नमो देव्यै : मेरठ में मुस्तैद स्टेशन मास्टर... ये हैं विशाखा और दीपिका, ऐसे संभाल रहीं अपनी जिम्‍मेदारी

Namo Devai महिलाएं भी काम करने में पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। मेरठ में दीपिका ने बताया कि कई बार तो व्यस्तता के चलते दोपहर का खाना भी नहीं खा पाते। उक्त सारा काम एक शिफ्ट में एक स्टेशन मास्टर को संभालना होता है।

Prem Dutt BhattWed, 13 Oct 2021 07:36 AM (IST)
मेरठ सिटी स्टेशन पर तैनाती, बेहद जिम्मेदारी का काम।

ओम बाजपेयी, मेरठ। Namo Devai नवरात्र का आठवां दिन मां महागौरी का है। मां का यह स्वरूप विषम परिस्थितियों में न डगमगाने और सही दिशा में चलने की प्रेरणा देता है। जहां हर तरफ आपाधापी हो फिर भी ऐसी महिलाएं अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ती रहती हैं। मेरठ सिटी स्टेशन पर ऐसी ही दो महिलाएं अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहीं हैं।

जिम्मेदारी बड़ा महत्व

रेलवे स्टेशन मास्टर की जरा सी चूक हजारों यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकती है। दिल्ली डिवीजन के मेरठ नगर जैसे प्रमुख स्टेशन के लिए इस पद की जिम्मेदारी बड़ा महत्व रखती है। मेरठ नगर स्टेशन पर दो महिलाएं इस पद पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। कंकरखेड़ा की दीपिका पंवार और मोदीनगर की विशाखा कंट्रोल रूम की कठिन ड्यूटी बखूबी करती हैं। स्टेशन मास्टर की ड्यूटी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मेरठ नगर स्टेशन पर अमूमन आठ घंटे में 15 से 27 ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में औसतन हर दो मिनट में फोन काल अटेंड करनी होती हैं।

कई खाना नहीं खा पाते

यह फोन काल ट्रेन आने के पहले मेरठ के पूर्ववर्ती स्टेशन मेरठ कैंट, और आगे परतापुर और खरखौदा स्टेशन पर ट्रेन के आवागमन से संबधित होती हैं। स्टेशन पर स्थित नौ रेलवे ट्रैक, जिन पर यात्री और माल गाड़ी आती हैं ट्रेन की पोजीशन को देखना होता है। दीपिका ने बताया कि कई बार तो व्यस्तता के चलते दोपहर का खाना भी नहीं खा पाते। उक्त सारा काम एक शिफ्ट में एक स्टेशन मास्टर को संभालना होता है। ट्रेन के संचालन के दौरान नौ रेलवे ट्रैक पर लगे 26 सिग्नल पर भी स्टेशन मास्टर को नजर रखनी पड़ती है। एक से दूसरी पटरी पर जाने के लिए बने प्वाइंट भी चेक करने पड़ते हैं।

काम की समझ और मुस्तैदी जरूरी

विशाखा ने बताया कि अधिकांश समय कान पर फोन लगा होता है और नजरें रेलवे ट्रैक की स्थिति दर्शाने वाले इलेक्ट्रानिक पैनल पर रहती हैं। दोनों कहती हैैं, शुरू में लोग कहते थे स्टेशन मास्टर का जाब तुमने क्यों चुना। इसमें तो बड़ी जिम्मेदारी होती है। अगर आपमें काम की समझ हो तो कोई दिक्कत नहीं होती। काम का दबाव तब और बढ़ जाता है जब कहीं कोई सिग्नल फेल हुआ हो या किसी कार्य के लिए ब्लाक लिया गया हो। उस दौरान मैमो बनाने और दिल्ली कंट्रोल रूम को पल-पल की सूचना देनी होती है।

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