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मेरठ : शिवानी ने कंट्रोल रूम में फोन किया और मिल गई एंबुलेंस, सेंटर में हर घंटे सौ से ज्यादा काल

एंबुलेंस के लिए कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर आ रही हैं कॉल्‍स।

मेरठ में जिला प्रशासन द्वारा कलक्ट्रेट में स्थापित कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हर घंटे में 100 से ज्यादा काल आती हैं लेकिन उनमे शिकायतें कम पूछताछ ज्यादा होती हैं। कुछ लोगों को यहां से मदद मिल जाती है तो कुछ की शिकायत बरकरार रह जाती है।

Prem Dutt BhattTue, 11 May 2021 12:10 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के बचाव, इलाज और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन द्वारा कलक्ट्रेट में स्थापित कोविड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हर घंटे में 100 से ज्यादा काल आती हैं लेकिन उनमे शिकायतें कम पूछताछ ज्यादा होती हैं। कुछ लोगों को यहां से मदद मिल जाती है तो कुछ की शिकायत बरकरार रह जाती है। सोमवार को गंगानगर से महिला शिवानी ने कंट्रोल रूम में फोन करके मरीज को आइआइएमटी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एंबुलेंस की मांग की। कंट्रोल रूम से तत्काल उक्त क्षेत्र में मौजूद एंबुलेंस चालक को फोन करके महिला का नाम और नंबर दिया गया। जिसके बाद उक्त महिला को एंबुलेंस मिल गई। जिला प्रशासन के इंटीग्रेटिड कंट्रोल रूम में कोरोना के संबंधित हर प्रकार की सहायता, जानकारी तथा शिकायत के लिए कुल 11 लाइनें लैंडलाइन नंबर की तथा एक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया गया है। इनमें आक्सीजन तथा होम आइसोलेशन के लिए अलग से नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। जबकि अन्य नंबरों पर हर प्रकार की फोन का को सुना जाता है।

हर घंटे में 100 से ज्यादा काल, अधिकांश को मिलता है फोन नंबर

कंट्रोल रूम का प्रबंधन सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ङ्क्षसह के हवाले है। उन्होंने बताया कि सभी लाइनों पर जनपद भर से लोग फोन करते हैं। शिकायतें भी करते हैं लेकिन ज्यादा संख्या में फोन करने वाले लोग पूछताछ करते हैं। जानकारी मांगते हैं। प्रत्येक घंटे में एक सौ से ज्यादा काल अटेंड की जाती हैं लेकिन अधिकांश आक्सीजन, इंजेक्शन, दवा आदि के मिलने का स्थान, समय और तरीका पूछते हैं। कुछ लोग इलाज में लापरवाही, आक्सीजन, इंजेक्शन, दवा न मिलने की शिकायतें करते हैं तो कुछ लोग अस्पतालों में अपने मरीजों के लिए आक्सीजन और वेंटीलेटर बेड की मांग करते हैं। मरीज को अस्पताल तक ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग करते हैं।

कंट्रोल रूम से मिलता है नंबर

कंट्रोल रूम में फोन करके आक्सीजन, इंजेक्शन, बेड आदि सहायता की मांग करने वाले लोगों को तत्काल संबंधित अफसरों का मोबाइल नंबर उपलब्ध करा जाता है। इसी प्रकार शिकायतों परकार्रवाई के लिए संबंधित विभागाध्यक्ष को तत्काल निर्देश दिया जाता है। जबकि आपातकाल वाले मामलों में खुद कंट्रोल रूम से फोन करके मदद भेजने का निर्देश दिया जाता है।

अस्पताल और घर में रहने वाले एक-एक मरीज का लिया जा रहा हाल

कंट्रोल रूम में कोरोना संक्रमण की मार के बाद वहां तैनात कर्मियों अफसरों को फिलहाल चार अलग अलग स्थानों पर बैठाया जा रहा है। जिलाधिकारी कार्यालय के इंग्लिश आफिस के हाल में तैनात दर्जन भर कर्मचारियों से सुबह और शाम को फोन काल कराकर कोविड अस्पतालों में भर्ती एक एक मरीज से बात की जा ही है और उनका हाल चाल लिया जाता है। वहीं बचत भवन सभागार में तैनात किए गए कर्मचारियों की मदद से होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे 6 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों का सुबह और शाम हाल चाल लिया जा रहा है। उनसे सुधार की जानकारी ली जा रही है तथा इन मरीजों को कोरोना मेडिकल किट उपलब्ध कराने व अन्य सुविधाओं के संबंध में भी वास्तविक जानकारी प्राप्त की जा ही है।

इनका कहना है

कंट्रोल रूम में आने वाले अधिकांश काल पूछताछ वाले होते हैं। जो सहायता मांगते हैं उनकी तत्काल मदद की जाती है। वहीं शिकायतों पर कार्रवाई भी की जाती है।

- सत्येंद्र कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, मेरठ

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