मेरठ के वेदव्यासपुरी में मियावाकी पद्धति से एक और जंगल विकसित करेगा एमडीए, टेंडर किया जारी

मियावाकी पद्धति से पौधे रोपने पर वे जल्द बड़े होते हैं। इस पद्धति के तहत पौधे रोपने से पहले जमीन की जोताई की जाती है। फिर पुआल व खाद आदि मिट्टी के साथ मिश्रित करके उसकी परत बिछा दी जाती है। इसके बाद पौधे रोपे जाते हैं।

Prem Dutt BhattTue, 03 Aug 2021 09:00 PM (IST)
वेदव्यासपुरी में दो हजार वर्ग मीटर में रोपे जाएंगे सात हजार पौधे।

मेरठ, जागरण संवाददाता। मेरठ में मियावाकी पद्धति से पौधे रोपकर एमडीए एक और जंगल विकसित करेगा। यह जंगल विकसित होगा वेदव्यासपुरी में। यहां दो हजार वर्ग मीटर के पुराने पार्क में मियावाकी पद्धति से सात हजार पौधे रोपे जाएंगे। पौधों की खरीद व रोपने के लिए एमडीए ने टेंडर भी जारी कर दिया है। इसी पद्धति से सितंबर 2020 में तत्कालीन वीसी राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में शताब्दीनगर में जंगल विकसित करने को पौधे रोपे गए थे। वहां आठ हजार वर्ग मीटर की जमीन पर पौधे रोपे गए थे। वहां अब पौधे हरे-भरे दिखाई देने लगे हैं। चार साल में ये पौधे करीब सात फीट की लंबाई प्राप्त कर लेंगे।

यह है मियावाकी पद्धति

मियावाकी पद्धति से पौधे रोपने पर वे जल्द बड़े होते हैं। इस पद्धति के तहत पौधे रोपने से पहले जमीन की जोताई की जाती है। फिर पुआल व खाद आदि मिट्टी के साथ मिश्रित करके उसकी परत बिछा दी जाती है। इसके बाद पौधे रोपे जाते हैं। बड़े पौधे के बीच में छोटे पौधे भी रोपे जाते हैं। पौधों के बीच की दूरी भी कम रखी जाती है। इस पद्धति के तहत पौधे रोपने की विशेषज्ञ कंपनी को इसका टेंडर दिया जाता है। संबंधित कंपनी ही इसका चार साल तक देखभाल करती है। चार साल में पौधों की लंबाई करीब सात फीट हो जाती है। फिर इन पौधों की देखरेख के लिए विशेष तरह के जानकारों की जरूरत नहीं पड़ती। संबंधित निकाय के ही कर्मचारी देखभाल कर लेते हैं।

ये पौधे रोपे जाएंगे

पीपल, बरगद, महुआ, पिलखन, कनेर, नीम, आंवला, गुलमोहर, ओक, हरङ्क्षसगार, अमलताश व कदंब आदि पौधे शामिल हैं।

इनका कहना है

शासनादेश के तहत टेंडर देकर मियावाकी पद्धति से पौधे लगवाए जाते हैं। संबंधित फर्म ही चार साल तक रोपे गए पौधों का देखभाल करती है। जल्द ही वेदव्यासपुरी में पौधारोपण शुरू होगा।

- मृदुल चौधरी, वीसी, एमडीए

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