Mauryan walls in Meerut: मेरठ में मिलीं मौर्यकालीन दीवारें, दिल्ली में स्‍थापित स्तंभ यहीं से ले जाने की संभावना

Mauryan walls in Meerut मेरठ पुरातत्व मंडल के पुरातात्विक अधीक्षक ने अपनी टीम के साथ यहां विकासपुरी में खोदाई की। यहां पर दीवारें दिखाई दीं। कुछ मृदभांड मिले। पुरातत्व विभाग को संभावना दिखाई दे रही है कि इस स्थान पर मिले चिह्न अशोक के काल से भी पहले के हैं।

Prem Dutt BhattTue, 28 Sep 2021 02:07 PM (IST)
मेरठ के विकासपुरी में मौर्यकाल के समय की दीवारें मिलने का दावा किया गया है।

मेरठ, जागरण संवाददाता। मेरठ में सम्राट अशोक के काल से पूर्व के चिन्ह मिल रहे हैं। यह इस बात का इशारा है कि इसके गर्भ में प्राचीन काल की विरासत बस्ती और खंडहर की शक्ल में दफन हैं। पुरातत्व विभाग ने यहां के स्थानों को चिह्नित करना शुरू किया है। उसी क्रम में पहला प्रमाण अशोक काल का मिला है। हापुड़ रोड स्थित विकासपुरी में विभाग को जो प्रमाण हाथ लगे हैं, उससे विभाग को संभावना दिखाई दे रही है कि इस स्थान पर मिले चिह्न अशोक से भी पहले के यानी करीब 2300 वर्ष पुराने हैं। यह संकेत मिला है कि दिल्ली में रखा पिलर इसी स्थान पर मौर्य काल में स्थापित था।

मामूली खोदाई में ही मिली सफलता

सोमवार को मेरठ पुरातत्व मंडल के पुरातात्विक अधीक्षक व पुरातत्वविद डीबी गडऩायक ने अपनी टीम के साथ मामूली खोदाई की। यहां पर दीवारें दिखाई दीं। कुछ मृदभांड मिले। उन्होंने बताया कि इन दीवारों की ईंट 42 सेमी लंबी हैं। 24 सेमी चौड़ी व आठ सेमी मोटी हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हिंदूराव अस्पताल के पास दिल्ली रीज में दिल्ली-मेरठ पिलर के नाम से एक शिलालेख के साथ पिलर लगा हुआ है। उसमें यह तो स्पष्ट है कि उक्त पिलर ब्रिटिश काल में मेरठ से गया था, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया था कि पिलर मेरठ से किस स्थान से गया था, लेकिन विकासपुरी में अब जो प्रमाण मिले हैं उससे यह संकेत मिला है कि दिल्ली में रखा पिलर इसी स्थान पर मौर्य काल में स्थापित था।

अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं

बहरहाल अभी आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी पुष्टि के लिए इन प्रमाणों की वैज्ञानिक परख कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मिले प्रमाणों से यह संकेत मिल रहा है कि यहां पर सम्राट अशोक से भी पहले के चिह्न मौजूद होंगे।

संरक्षण में लिया जाएगा विकासपुरी का क्षेत्र

विकासपुरी में जिस स्थान पर प्रमाण मिले हैं वहां पर सिर्फ 35 मीटर जमीन ही खाली है बाकी पर निर्माण है। घर बने हुए हैं। फिलहाल खाली स्थान को संरक्षित किया जाएगा। जरूरत पडऩे पर स्थानीय लोगों के सहयोग से पुरातात्विक खोदाई होगी।

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