Martyr Akash Choudhary: मेरठ में शहीद लेफ्टिनेंट आकाश चौधरी की बहन ने सरकारी नौकरी लेने से किया इंकार

Martyr Akash Choudhary शहीद लेफ्टिनेंट आकाश चौधरी की बहन प्रियंका चौधरी ने मेरठ में सरकारी लेने से मना कर दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से उन्‍हें सरकारी नौकरी का प्रस्‍ताव दिया गया है। 2020 में आकाश चौधरी शहीद हुए थे।

Prem Dutt BhattSat, 18 Sep 2021 07:00 AM (IST)
वकालत का कोर्स कर रही बहन प्रियंका चौधरी ने स्वेच्छा से इंकार किया है।

संजीव तोमर, मेरठ। मेरठ की कंकरखेड़ा की सिल्वर सिटी कालोनी निवासी शहीद लेफ्टिनेंट आकाश चौधरी की बहन प्रियंका चौधरी ने प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली सरकारी नौकरी को स्वेच्छा से लेने से इंकार कर दिया है। नियम के अनुसार प्रदेश सरकार ने शहीद के स्वजन के सामने समूह (ग) और (घ) वर्ग की नौकरी देने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन एक विडंबना यह भी है कि शहीद के नाम से अभी मेरठ कैंट में किसी भी सड़क नाम नहीं रखा गया है।

वीरगति को हुए थे प्राप्‍त

कंकरखेड़ा के हाईवे स्थित सिल्वर सिटी कालोनी निवासी आकाश चौधरी सेना में लेफ्टिनेंट थे। असम के कोकराझार में लेफ्टिनेंट आकाश चौधरी सेना की यूनिट में तैनात थे। 17 जुलाई 2020 को पहाड़ी क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान लेफ्टिनेंट का पैर फिसल गया था, जिससे वह गहरी खाई में गिरे थे। साथी सैनिक अस्पताल ले गए, जहां वह वीरगति को प्राप्त हुए थे। 18 जुलाई को शहीद लेफ्टिनेंट का पार्थिव शरीर उनके घर सिल्वर सिटी कालोनी लाया गया था।

मिली थी 50 लाख की धनराशि

शहीद के पिता केपी सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा शहीद के स्वजन को मिलने वाली धनराशि 50 लाख रुपये उन्हें प्राप्त हो गए थे। साथ ही शहीद के नाम पर एक सड़क का नाम, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और शहीद के स्वजनों को सरकार की ओर से सम्मान करने था। उन्होंने बताया कि शहीद की बहन प्रियंका वकालात का कोर्स कर रही है। उससे सरकार द्वारा समूह (ग) और (घ) वर्ग की नौकरी करने के लिए कहा, मगर उसने अपने कैरियर को देखते हुए सरकारी नौकरी लेने से इंकार कर दिया।

अभी तक न रखा सड़क का नाम और नही हुआ सम्मान

शहीद के पिता केपी सिंह ने बताया कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने शहीद के नाम से कैंट क्षेत्र में एक सड़क का नाम रखने की बात कही थी, मगर अभी तक कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा जनप्रतिनिधियों द्वारा यह भी आश्वासन दिया गया था कि सरकार द्वारा शहीद के स्वजनों को सम्मान कराया जाएगा। मगर, यह भी अधर में है। जनप्रतिनिधियों को इस बारे में सोचना चाहिए।

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