CCSU Meerut : चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कालेजों को मिलेंगे नए प्राचार्य, मेरठ के इन कालेजों का नाम भी शामिल

मेरठ कालेज में कार्यवाहक प्राचार्य डा. युद्धवीर सिंह की जगह डा. एसएन शर्मा कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। डा. शर्मा बड़हलगंज के डिग्री कॉलेज में प्राध्यापक थे। डीएन डिग्री कॉलेज में डा. बीएस यादव की जगह मेरठ कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अजय चौधरी प्राचार्य बन सकते हैं।

Prem Dutt BhattThu, 21 Oct 2021 06:01 PM (IST)
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कालेजों को मिलेंगे नए प्राचार्य

मेरठ, जागरण संवाददाता। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुदानित डिग्री कालेजों की प्राचार्यों की सूची जारी हो गई है। जिसमें मेरठ के कई कालेजों में कार्यवाहक प्राचार्य की जगह नए प्राचार्य जल्द ही कार्यभार ग्रहण करेंगे। आयोग से जारी सूची के अनुसार मेरठ कालेज में कार्यवाहक प्राचार्य डा. युद्धवीर सिंह की जगह डा. एसएन शर्मा कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। डा. शर्मा बड़हलगंज के डिग्री कॉलेज में प्राध्यापक थे। डीएन डिग्री कॉलेज में डा. बीएस यादव की जगह मेरठ कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अजय चौधरी प्राचार्य बन सकते हैं। कनोहर लाल डिग्री कॉलेज में मेरठ कॉलेज की चीफ प्राक्टर डा. अलका चौधरी प्राचार्य बन सकती हैं। आरजीपीजी कॉलेज में गिन्नी देवी डिग्री कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर निवेदिता मलिक प्राचार्य बनेंगी। जबकि ईस्माइल डिग्री कॉलेज में आरजी कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर अनीता राठी प्राचार्य बन सकती हैं। एनएस कॉलेज में मेरठ कॉलेज के शिक्षक डॉ मनोज अग्रवाल प्राचार्य बन सकते हैं। मेरठ के डिग्री कॉलेजों के कई शिक्षक प्राचार्य बने हैं। जो मेरिट के हिसाब से प्रदेश के अन्य डिग्री कॉलेजों में ज्वाइन कर सकते हैं। दीपावली से पहले कई कॉलेजों में नए प्राचार्य कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं।

कानून के शिक्षकों की कमी से जूझ रहे कालेज

मेरठ, जागरण संवाददाता। मेरठ सहित प्रदेश में कानून की पढ़ाई कराने वाले महाविद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शैक्षणिक अर्हता कम करने की मांग की जा रही है। लखनऊ में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को ज्ञापन देकर कालेजों ने इसमें सुधार करने की मांग की गई है। सेल्फ फाइनेंस डिग्री कालेज वेलफेयर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुलदीप चौहान व सचिव प्रशांत जैन ने अपने ज्ञापन में बताया कि विधि महाविद्यालयों में कुछ साल पहले विधि स्नातक पाठ्यक्रम में शिक्षकों की अर्हता परास्नातक थी। जिसे बाद में नेट और पीएचडी कर दिया गया। जिनकी उपलब्धता काफी कम है। उन्होंने राज्य प्राविधिक विश्वविद्यालय के मानकों का हवाला देते हुए बताया कि यहां स्नातक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की शैक्षणिक अर्हता परास्नातक है। साथ ही बार काउंसिल आफ इंडिया के नियमों में भी उन्होंने परास्नातक डिग्री का प्रावधान बताया।

 

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