Maha Kumbh 2021: माघ पूर्णिमा पर लगाएं श्रद्धा की डुबकी, सभी मनोकामनाएं होगीं पूरी, जानिए- शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

माघ पूर्णिमा पर पूजा और स्‍नान के बारे में विस्‍तार से जानिए।

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है हर माह की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की शुरुआत पूर्णिमा से ही होती है। माघ माह की पूर्णिमा 27 फरवरी शनिवार को है।

Himanshu DwivediFri, 26 Feb 2021 05:58 PM (IST)

मेरठ, जेएनएन। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है, हर माह की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की शुरुआत पूर्णिमा से ही होती है। माघ माह की पूर्णिमा 27 फरवरी शनिवार को है। पूर्णिमा के दिन दान और व्रत करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से बत्तीस गुना ज्यादा फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है।

माघ पूर्णिमा 26 फरवरी शाम 3.49 से आरंभ होकर 27 फरवरी शनिवार दोपहर 1.46 बजे समाप्त होगी। मेरठ सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहर नाथ मंदिर की महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज का कहना है। माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। इसके बाद विधिविधान से व्रत का पालन करना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा उपासना का विशेष महत्व है। इस इन भगवान सत्यनारायण की कथा भी सुननी चाहिए। साथ ही गरीबों को दान देने का भी विशेष फल प्राप्त होता है।

माघ पूर्णिमा की कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का एक ब्राहमण रहता था, वह अपना जीवन निर्वाह दान पर करता था। ब्राहमण के कोई संतान नही थी। एक दिन उनकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई। लेकिन सभी ने उसे बांझ कहकर भिक्षा देने से इंकार कर दिया। तब उसे किसी ने 16 दिन मां काली की पूजा करने को कहा, इसके बाद ब्राहमण और उसकी पत्नी ने 16 दिन मां काली की पूजा की। 16वें दिन मां काली प्रकट हुई, और मां काली ने ब्राहमण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया। साथ ही यह भी कहा कि अपनी सामथ्र्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को दीपक जलाना। इस तरह ब्राहमण की पत्नी ने हर पूर्णिमा को दीपक जलाना शुरू किया। ऐसा करते हुए उसने 32 दीपक जलाए। इसके बाद पूजा के लिए ब्राहमण ने पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया। इसके बाद ब्राहमण की पत्नी गर्भवती हो गई। मां काली की कृपा से ब्राहमण के घर पुत्र ने जन्म दिया। इसलिए माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन पूजा और व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। 

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