Saharanpur: टपरी डिस्टलरी देसी शराब फैक्‍ट्री का लाइसेंस निरस्त, 100 करोड़ टैक्‍स चोरी का है मामला

100 करोड़ की देसी शराब फैक्‍ट्री द्वारा टैक्‍स चोरी मामले में लाइसेंस निरस्‍त।

100 करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी के मामले में सुर्खियों में आई टपरी स्थित को-आपरेटिव कंपनी लिमिटेड नामक देसी शराब फैक्ट्री का आबकारी आयुक्त ने लाइसेंस निरस्त कर दिया है। इस फैक्ट्री में लखनऊ और मेरठ की संयुक्त एसटीएफ टीम ने छापेमारी कर टैक्स चोरी पकड़ी थी।

Himanshu DwivediTue, 20 Apr 2021 11:22 AM (IST)

सहारपुर, जेएनएन। करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी के मामले में सुर्खियों में आई टपरी स्थित को-आपरेटिव कंपनी लिमिटेड नामक देसी शराब फैक्ट्री का आबकारी आयुक्त ने लाइसेंस निरस्त कर दिया है। इस फैक्ट्री में लखनऊ और मेरठ की संयुक्त एसटीएफ टीम ने छापेमारी कर टैक्स चोरी पकड़ी थी। दावा किया गया था कि एक साल में लगभग 100 करोड़ की टैक्स चोरी की जा रही थी। इस मामले की जांच लखनऊ एसआइटी कर रही थी। एसआइटी की रिपोर्ट के बाद लाइसेंस रद्द की कार्रवाई की गई है।

दरअसल, करीब दो माह पूर्व टपरी स्थित को-आपरेटिव कंपनी लिमिटेड नामक देसी शराब की फैक्ट्री में लखनऊ और मेरठ की एसटीएफ ने छापा मारा था। जिसके बाद यहां पर पहले दिन जांच के बाद लगभग 30 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया था। जिसके बाद आबकारी प्रवर्तन मेरठ के सहायक आयुक्त ने इस मामले में दो मुकदमे दर्ज कराए थे। जिसमें एक शराब एक्ट का था और दूसरा टैक्स चोरी का। इन दोनों मुकदमों में फैक्ट्री मालिक प्रणय अनेजा और डिस्टलरी यूनिट हेड समेत 19 लोगों को नामजद कराया गया था।

बाद में शासन स्तर से इसकी जांच लखनऊ एसआइटी को सौंप दी गई थी। लखनऊ एसआइटी के अपर पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा अपनी टीम के साथ सहारनपुर पहुंचे और एक सप्ताह रहकर जांच की। इसके बाद पूरे मामले को लखनऊ ट्रांसफर करा लिया गया था। वहीं, जिन आठ लोगों को जेल भेजा गया था। उन्हें भी लखनऊ जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। सहारनपुर आबकारी आयुक्त सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि शासन को रिपोर्ट जाने के बाद फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द किया गया है। अग्रिम आदेशों तक फैक्ट्री बंद रहेगी।

फैक्ट्री चलवाने को मजदूरों ने किया था प्रदर्शन

हाल ही में इस फैक्ट्री के 20 से 25 मजदूर और एंप्लाय ने जिलाधिकारी अखिलेश कुमार सिंह को ज्ञापन देकर फैक्ट्री को चलवाने की मांग की थी। अनुरोध किया गया था कि फैक्ट्री में काम करने वाले मजूदरों को आर्थिक परेशानी हो रही थी। जिसके बाद डीएम ने आश्वासन दिया था कि वह शासन में उनकी मांग को रखेंगे, लेकिन अब फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। 

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