नियम-संयम के साथ फलाहार और जल पर निर्भर रहते हैं परिवार

दशलक्षण पर्व पर मंदिर में नित्य पूजा करते हैं जैन समाज के लोग। - दिन में केवल एक

JagranFri, 17 Sep 2021 07:30 AM (IST)
नियम-संयम के साथ फलाहार और जल पर निर्भर रहते हैं परिवार

मेरठ,जेएनएन। दशलक्षण पर्व के दौरान दिगंबर जैन समाज के परिवारों की दिनचर्या बदल जाती है। परिवार के बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक त्योहार के उत्साह में नजर आते हैं। परिवार के सदस्य प्रतिदिन मंदिर जाते हैं। कोई फलाहार तो कोई पूरे दिन जल पर ही निर्भर रहता है। शहर के कुछ जैन परिवारों में इस तरह से मना रहे हैं दशलक्षण पर्व- दिन में केवल एक बार भोजन

गंगासागर कालोनी निवासी व्यापारी विवेक जैन के घर में दशलक्षण पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दौरान परिवार के सभी दस सदस्य राजेंद्रपुरम स्थित जैन मंदिर में पूजन के लिए नित्य प्रतिदिन जाते हैं। सुबह मंदिर में भगवान का नमन व शांति धारा होती है। पूजन व उसके बाद प्रतिदिन विधान होते हैं। विवेक जैन ने बताया कि उनकी पत्नी रुचि जैन 24 घंटों में केवल एक बार भोजन ग्रहण करती हैं। उनका पुत्र संयम जैन भी इसी नियम को अपनाता है। विवेक जैन स्वयं दिन में केवल दो बार भोजन करते हैं। इसमें एक बार मंदिर से आने के बाद व दूसरी बार सूर्यास्त से पहले भोजन ग्रहण करते हैं। घर के सभी सदस्य मंदिर में नित्य रूप से पूजा पाठ कर रहे हैं। दस दिनों तक केवल जल ग्रहण करते हैं गौरव जैन

गंगानगर बी-ब्लाक शिव मंदिर के पास रहने वाले टाइल्स व्यापारी गौरव जैन दशलक्षण पर्व को नियम-संयम से मनाते हैं। गौरव जैन ने बताया इन दस दिनों वह प्रतिदिन केवल एक समय शाम को जल ग्रहण करते हैं। गौरव जैन के परिवार में पांच सदस्य हैं। गौरव का कहना है कि भोजन ग्रहण किए बिना भी भगवान के पूजन से शरीर में असीमित ऊर्जा दिनभर बनी रहती है। गौरव की माता सुमन जैन की आयु लगभग 65 वर्ष है। इस उम्र में भी वे दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करती हैं। एक समय भोजन करती हैं 90 वर्षीय कृष्णा जैन

वृंदावन एंक्लेव निवासी अभय जैन का परिवार दशलक्षण पर्व श्रद्धापूर्वक मनाता है। उनका कहना है कि दशलक्षण पर्व के दौरान घर में उत्सव सा माहौल रहता है। अभय जैन ने बताया कि परिवार में उनकी पत्नी गीता जैन, माता कृष्णा जैन व पुत्र सजल जैन सभी दस दिनों तक नियमों का पालन करते हैं। वह प्रतिदिन राजेंद्रपुरम गंगानगर स्थित दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में पूजन करते हैं। भूमि के अंदर पैदा हुआ कोई भी अन्न ग्रहण नहीं करते हैं। वह केवल तुरई व लौकी जैसी साब्जियां सूर्यास्त से पहले ग्रहण करते हैं। फिर सूर्योदय तक अन्न ग्रहण नहीं करते। केवल फलाहार पर निर्भर हैं अमित जैन

सदर निवासी सराफा कारोबारी अमित जैन और उनका परिवार इन दस दिनों में प्रात: से ही धार्मिक क्रियाओं में लग जाते हैं। सर्वप्रथम दंपती अलसुबह उठ कर स्नान करके रंजीत पुरी सदर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जाकर भगवान का अभिषेक, शांति धारा, पूजन विधान आदि करते हैं। अमित जैन केवल फलाहार ले रहे हैं और इसी प्रकार के नियम-संयम से परिवार के बाकी सदस्य साम‌र्थ्य अनुसार भोजन व जल का संतुलित सेवन कर रहे हैं। अमित जैन के तीनों बच्चे भी विद्यालय की शिक्षा के साथ धर्म और त्याग का पालन कर रहे हैं।

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