Indias Freedom Story: मेरठ के क्रांतिकारियों की जुबानी, स्वतंत्रता संग्राम की कहानी, पुस्‍तक मेले में मिली सराहना

Indias Freedom Story बुकारू पुस्तक मेले में मेरठ की लेखिका की पुस्तक इंडियाज फ्रीडम स्टोरी रही बच्चों के आकर्षण का केंद्र। देश के 75वें स्वंतत्रता वर्ष पर विश्व के जाने माने प्रकाशक हारपर कालिंस ने इसका प्रकाशन किया है। पुस्‍तक को सराहना मिली है।

Prem Dutt BhattTue, 30 Nov 2021 12:02 PM (IST)
इरा सक्सेना मेरठ की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार और सांसद रहीं कमला चौधरी की पुत्री हैं।

मेरठ, जागरण संवाददाता। मेरठ के क्रांतिकारियों के संस्मरणों और दस्तावेजों को कहानी के रूप में पिरोकर किताब का रूप दिया गया है। बाल साहित्य की जानी मानी लेखिका मेरठ की इरा सक्सेना और दिल्ली की नीलिमा सिन्हा की पुस्तक इंडियाज फ्रीडम स्टोरी दिल्ली में आयोजित बच्चों के पुस्तक मेले बुकारू में आकर्षण का केंद्र बनी रही। देश के 75वें स्वंतत्रता वर्ष पर विश्व के जाने माने प्रकाशक हारपर कालिंस ने इसका प्रकाशन किया है। इरा सक्सेना मेरठ की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार और सांसद रहीं कमला चौधरी की पुत्री हैं। मां की साहित्यिक विरासत को बढ़ाते हुए उन्होंने बाल साहित्य पर कई पुस्तकें लिखी हैं।

जिज्ञासाओं का समाधान

27 और 28 नवंबर को दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित रेल संग्रहालय में आयोजित बाल साहित्य के पुस्तक मेले बुकारू में भी पुस्तक को लेकर बच्चों में खासा रुझान नजर आया। रविवार को पुस्तक मेले में एसोसिएशन आफ राइटर्स एंड इलस्टे्रेटर की अध्यक्षा नीलिमा सिन्हा ने बच्चों को पुस्तक के बारे में बताया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बताया कि पुस्तक बच्चों को ध्यान में रख कर लिखी गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा की पत्नी नीलिमा ने बताया कि इसमें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से 1947 में आजादी मिलने तक के मुख्य प्रसंगों का सिलसिलेवार और तथ्यात्मक विवरण है। आजादी की गाथा को सरल तरीके कहानी की तरह बताया गया है ताकि वह बच्चों के जेहन में उतर सके।

अंग्रेजी बेडिय़ों की कहानी सुनती रही हैं डा. इरा

स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा मेरठ में हासिल करने वाली डा. इरा सक्सेना ने बताया कि आजादी के समय में उनका बुढ़ाना गेट स्थित प्रहलाद वाटिका का घर तत्कालीन क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का केंद्र बन गया था। आजादी के बाद भी मां के राजनीति में सक्रियता बने रहने से उनका आना-जाना लगा रहा। आजादी के बाद विष्णु शरण दुबलिश, राम स्वरूप शर्मा, शाहनवाज खान, रघुवीर तिलक पूर्व राज्यपाल राजस्थान के संस्मरण उन्हें सुनने का मौका मिलता रहता था। उनकी बातें उनके स्मृति पटल पर आज भी अंकित हैं। ऐसे क्रांतिकारियों के विचारों को आधार बनाकर पुस्तक की थीम रची गई है।

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