ICSE, ISC Result 2021: परिणाम से संतुष्ट नजर आए होनहार, परीक्षा न होने का नहीं है मलाल

ICSE ISC बोर्ड का परिणाम घोषित कर दिया गया है। मेरठ के छात्र इससे काफी खुश नजर आ रहे हैं। उन्‍हें परिक्षा न होने का कोई मलाल नहीं है। होनहार परिणाम से संतुष्‍ठ नजर आए और अपने परिणाम को लेकर खुश हैं।

Himanshu DwivediSun, 25 Jul 2021 09:19 AM (IST)
ICSE, ISC Result 2021: परिणाम घोषित होने पर संतुष्‍ठ नजर आए छात्र।

मार्किग को लेकर खुशी के मन में था डर

नाम : खुशी अरोड़ा

स्कूल : सोफिया गल्र्स स्कूल

कक्षा : 12वीं, कामर्स

जिले में स्थान : कामर्स में प्रथम

प्राप्तांक : 484-500, 99 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी- 99, इकोनोमिक्स -100, कामर्स-88, एकाउंट्स-97, मैथ्स-100

दो साल पहले जब दसवीं की बोर्ड परीक्षा हुई थी, तो उस समय मैं स्कूल में टापर थी। इस बार 12वीं कामर्स में कोविड की वजह से परीक्षा नहीं हुई तो भी स्कूल में टापर होने पर खुश हूं। बोर्ड भले नहीं हुआ, लेकिन प्री बोर्ड और स्कूल के सभी एग्जाम अच्छे हुए थे, इसलिए उम्मीद थी कि रिजल्ट अच्छा ही आएगा। फिर भी बोर्ड में किस तरह से मार्किंग होगी, उसे लेकर डर लग रहा था कि पता नहीं क्या होगा। रिजल्ट पूरे साल की पढ़ाई के आधार पर ही आया है। स्कूल में आनलाइन पढ़ाई के अलावा कोई कोचिंग नहीं की थी। मेरे पिता डा. सतीश अरोड़ा और मां डा. कोमल अरोड़ा दोनों डाक्टर हैं, लेकिन मुङो साइंस पसंद नहीं थी। इसलिए कामर्स से पढ़ाई की। आगे डीयू से इकोनोमिक्स आनर्स करने की इच्छा है।

फाइनेंस में करियर बनाना चाहते हैं वासु

नाम : वासु गर्ग

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 12वीं, विज्ञान वर्ग

जिले में स्थान : प्रथम

प्राप्तांक : 499-500, 99.75 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-99, मैथ-100, केमिस्ट्री-100, कंप्यूटर साइंस-100, फिजिक्स-100

विज्ञान वर्ग में स्कूल व जिले में टापर बनकर बेहद खुश हूं। मैंने 97 के ऊपर अंक की अपेक्षा की थी लेकिन यह अपेक्षा से बेहतर है। प्री-बोर्ड में अधिक फोकस कर के पढ़ाई करना व परीक्षा देना काम आया। स्नातक में मैं कामर्स फील्ड में पढ़ाई करूंगा। मुङो फाइनेंस के क्षेत्र में करियर पसंद है और मुङो लगता है कि कामर्स में अच्छे अवसर मिलेंगे। पिछले पांच-छह महीने के दौरान हुई चर्चाओं में कामर्स आकर्षित लग रहा है। इसीलिए मैं अब साइंस से कामर्स में जा रहा हूं। इसमें परिवार का सहयोग भी है कि मैं अपनी पसंद का करियर चुन सकता हूं। कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में इस साल के रिजल्ट का वेटेज कम कर दिया जाए। ऐसा होने से हमें नुकसान होगा। मेरे पिता संजीव गर्ग बिजनेसमैन हैं और माता गृहणी हैं।

अजरुन को बनना है सेना में अफसर

नाम : अर्जुन मिश्र

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 12वीं, विज्ञान वर्ग

जिले में स्थान : तृतीय

प्राप्तांक : 488-500, 99.25 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-98, मैथ-99, केमिस्ट्री-91, कंप्यूटर साइंस-100, फिजिक्स-100

आनलाइन पढ़ाई में बोर्ड परीक्षा होगी या नहीं इसलिए मैंने प्री-बोर्ड की तैयारी ठीक से की थी। रेगुलर स्टडी से तैयारी भी अच्छी हुई थी। स्कूल की ओर से सिलेबस भी पूरा रिवाइज कराया गया था। बोर्ड परीक्षा नहीं हुई लेकिन हमने 10 साल के बोर्ड परीक्षा पेपर को भी हल करने का अभ्यास किया था। मैंने जेईई की परीक्षा दी है। एनडीए की लिखित परीक्षा में भी सफल हो चुका हूं। अब साक्षात्कार में जाना है। सेना में जाने के लिए मेरे प्रेरणाश्रोत मेरे पिता कर्नल सौरभ मिश्र ही हैं। मुङो सेना की यूनिफार्म और अनुशासन बेहद पसंद है। परीक्षा की तैयारी थी लेकिन उसी दौरान कोविड होने से परेशान था, परीक्षा रद होने से राहत मिली। अब रिजल्ट भी अच्छा रहा है। मेरी माता एकता मिश्र का सदा ही प्रोत्साहन मिलता है।

भव्या को बनना है डाक्टर

नाम : भव्या शर्मा

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 12वीं, विज्ञान वर्ग

जिले में स्थान : द्वितीय

प्राप्तांक : 497-500, 99.5 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-98, केमिस्ट्री-99, कंप्यूटर साइंस-100, बायोलाजी-100, फिजिक्स-100

मुङो मेडिकल क्षेत्र में जाना है और डाक्टर बनना है। मैं नीट की तैयारी कर रही हूं जिसकी परीक्षा भी नजदीक ही है। बिना परीक्षा के जारी हुआ रिजल्ट अपेक्षा से भी बेहतर है। हमने परीक्षा की तैयारी अच्छी की थी। परीक्षा देते तो भी अच्छा प्रदर्शन कर पाते। मेरा पसंदीदा विषय पीसीबी और कंप्यूटर साइंस है। परीक्षा की तैयारी में आनलाइन क्लास से काफी मदद मिली। कोचिंग की पढ़ाई भी घर से ही हो गई। मुङो स्नातक में दिल्ली विश्वविद्यालय के ही किसी कालेज में एडमिशन लेना है। नीट क्लीयर करने के बाद वहीं पर आगे की तैयारी करनी है। मेरे पिता पियुष शर्मा बिनजेसमैन हैं और माता मीरा शर्मा गृहणी हैं। मुङो कक्षा 10वीं में भी 98.4 फीसद अंक मिले थे। तब से ही 12वीं की तैयारी शुरू कर दी थी।

डाक्टर बनना चाहते हैं सिद्धांत

नाम : सिद्धांत भारद्वाज

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 12वीं, विज्ञान वर्ग

जिले में स्थान : प्रथम

प्राप्तांक : 499-500, 99.75 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-99, केमिस्ट्री-100, कंप्यूटर साइंस-100, बायोलाजी-100, फिजिक्स-100

बिना परीक्षा के बोर्ड रिजल्ट से मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं। मेरी तैयारी भी अच्छी थी लेकिन इससे ज्यादा मैं भी क्या कर पाता। मुङो डाक्टर बनना है। इसीलिए मैं नीट की तैयारी कर रहा हूं। 12 अगस्त को नीट की परीक्षा भी देनी है। केमिस्ट्री मेरा पसंदीदा समय है। लंबे लाकडाउन के दौरान घर में ही रहने की आदत सी पड़ गई है। इसीलिए घर से ही स्कूल व कोचिंग की पढ़ाई भी चलती रही। मुङो शुरू से ही मेडिकल क्षेत्र में जाना था। मेरे परिवार में कोई डाक्टर नहीं है। मेरे पिता विनय शर्मा मार्केटिंग क्षेत्र में कार्यरत हैं और माता मोनिका शर्मा शिक्षिका हैं। कक्षा 10वीं में भी मेरे 98.2 फीसद अंक थे। 11वीं में शुरू से ही रेगुलर स्टडीज इस बार के रिजल्ट में काम आया।

बैंकिंग में करियर बनाएंगी खुशी चौधरी

नाम : खुशी चौधरी

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 12वीं, कामर्स वर्ग

जिले में स्थान: कामर्स में तृतीय

प्राप्तांक : 487-500, 98.5 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-98, मैथ-99, एकाउंट-99, कामर्स-93, इकोनोमिक्स-98

कठिन समय रहा। तैयारी बोर्ड परीक्षा की थी लेकिन नहीं हुई। 11वीं में अंक कम थे इसलिए चिंता बढ़ गई थी। 12वीं में सब कुछ अच्छा रहा, सभवत: इसीलिए रिजल्ट भी ठीक रहा। 97-98 फीसद की ही अपेक्षा थी। इससे कम रह जाता तो मैं इंप्रूवमेंट देती। सामान्य समय तक तो परीक्षा की तैयारी अच्छी थी लेकिन परीक्षा में देरी होने से पढ़ाई भी प्रभावित हुई थी। मुङो बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाना है। इसलिए मैं डीयू से बीकाम आनर्स करूंगी। रिजल्ट को लेकर जो भी आशंकाएं मन में थी वह रिजल्ट देखने के बाद दूर हो गई। अब पसंदीदा कालेज में एडमिशन लेने की कोशिश करूंगी।

परीक्षा होती तो और अच्छे अंक लाती संगिनी

नाम : संगिनी कपूर

स्कूल : सोफिया गल्र्स स्कूल

कक्षा-12वीं, कामर्स

जिले में स्थान : कामर्स स्ट्रीम में द्वितीय

प्राप्तांक : 482-500, 98.75 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी- 98, इकोनोमिक्स -99, कामर्स-88, एकाउंट्स-97, मैथ्स-100

दसवीं में मैं स्कूल में चौथे नंबर पर आई थी। 12वीं में मेरी तैयारी अच्छी थी। पूरे साल पढ़ाई की थी। जब कोविड की वजह से परीक्षा नहीं होने की सूचना आई तो बहुत उदास हुईं। लोग क्या कहेंगे, ऐसी बात भी मन में आती रही। फिर भी जो स्थिति थी उसमें कोई क्या कर सकता था। जो निर्णय हुआ ठीक ही हुआ। अगर परीक्षा हुई होती तो अच्छे अंक आते। फिर भी मूल्यांकन सही हुआ है। 10वीं के बोर्ड, 11 वीं के स्कूल एग्जाम और 12 वीं प्री बोर्ड में जो अच्छे थे, उनके अंक ठीक आए हैं। मैं भी अपने अंक से संतुष्ट हूं। मेरे पापा विशाल कपूर एडवोकेट हैं। मां पंकुल कपूर हैं। मैं आगे दिल्ली से सीए की तैयारी करना चाहती हूं। साथ ही बीकाम आनर्स भी करूंगी।

इलेक्ट्रोनिक म्यूजिक में करियर बनाएंगे सत्यम

नाम : सत्यम शर्मा

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 10वीं

जिले में स्थान : तृतीय

प्राप्तांक : 586-600, 98.4 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-96, मैथ-99, एचसीजी-98, कंप्यूटर एप्लीकेशन-100, साइंस-94, हिंदी-99

मैं रिजल्ट से संतुष्ट हूं। पूरे साल घर के बाहर जाना नहीं था इसलिए पढ़ाई पर ही फोकस रहा। पूरा ही समय बचा जिसमें पढ़ाई अच्छे से हो सकी। मैंने 11वीं में पीसीएम के साथ कंप्यूटर साइंस ली है। मेरी रुचि इलेक्ट्रानिक म्यूहजिक में है। मैं उससे एल्बम भी बनाता हूं और कुछ एल्बम प्रोड्यूस भी कर चुका हूं। इसी क्षेत्र में करियर बनाना चाहूंगा। इंजीनियरिंग करने का भी मन है। एनटीएसई प्रथम चरण में सफलता हासिल की है। मेरे पिता डा. सचिन कुमार एएसपीजी कालेज मवाना में फिजिक्स के प्रोफेसर हैं और माता भी केपीजी कालेज में प्रोफेसर हैं।

परीक्षा होती तो भी अमृषा के इतने ही मार्क्‍स आते

नाम : अमृषा सिंह

स्कूल : सोफिया गल्र्स स्कूल

कक्षा : 10वीं

जिले में स्थान : तृतीय

प्राप्तांक : 588-600, 98.4 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-94, हिंदी-99, सोशल साइंस-99, गणित-100, साइंस-96, कंप्यूटर-100

पहली बार बोर्ड परीक्षा को लेकर उत्साहित थी, लेकिन कोरोना की वजह से जब परीक्षा नहीं हुई तो थोड़ा अजीब सा लगा। स्कूल की पढ़ाई में भी आज तक ऐसा नहीं हुआ था। फिर भी कोरोना की स्थिति को देखते हुए जो निर्णय हुआ ठीक ही रहा। बगैर परीक्षा के जो अंक मिले हैं, अगर परीक्षा होती तो उतने ही अंक आते। नौवीं और 10वीं के प्री बोर्ड के अंक से यह परिणाम आया है। मैं संतुष्ट हूं। आगे मैंने पीसीबी लिया हुआ है। अभी आगे सोचा नहीं है। मेरे पापा डा. अनुराग सिंह मेरठ कालेज में ला में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, मम्मी डा. अर्चना सिंह भी मेरठ कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।

आइएएस अफसर बनना चाहते हैं वत्सल

नाम : वत्सल त्यागी

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 10वीं

जिले में स्थान : द्वितीय

प्राप्तांक : 587-600, 98.6 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-96, मैथ-100, एचसीजी-98, कंप्यूटर एप्लीकेशन-100, साइंस-94, हंिदूी-99

मुङो आइएएस अफसर बनना है। मैं मानता हूं कि समाज से जुड़ने का का सबसे अच्छा रास्ता सिविल सेवा होता है। मैं रिजल्ट में 98-99 फीसद की अपेक्षा कर रहा था। अपेक्षा के अनुरूप रिजल्ट पाकर खुश हूं। शुरुआत में रिजल्ट को लेकर मन में आशंका थी। मैंने कक्षा नौवीं से ही लगातार पढ़ाई की थी और सिलेबस कई बार पूरा कर लिया था। रिजल्ट खराब होता तो बुरा लगता पर ऐसा नहीं हुआ। तैयारी का अनुभव अच्छा था। हमने परीक्षा नहीं दी इसका मतलब यह नहीं है कि हम दूसरों से कम जानते हैं। तैयारी से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। 11वीं में पीसीएम व कंप्यूटर लिया है।

आइआइटी के रास्ते सिविल सेवा में जाएंगे राहिल

नाम : राहिल दुबलिश

स्कूल : सेंट मेरीज एकेडमी

कक्षा : 10वीं

जिले में स्थान : तृतीय

प्राप्तांक : 583-600, 98.4 फीसद

मार्कशीट : अंग्रेजी-95, मैथ-100, एचसीजी-98, कंप्यूटर एप्लीकेशन-100, साइंस-91, हंिदूी-99

डेढ़ साल घर पर रहकर ही पढ़ाई की। परीक्षा दे पाते तो हम और अच्छा कर सकते थे। आनलाइन पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं हुई। मैंने 11वीं में पीसीएम लिया है। मैं जेईई एस्पिरेंट हूं और आइआइटी के जरिए सिविल सेवाओं में जाना है। कोविड की जिस तरह की स्थिति थी उसमें बोर्ड परीक्षा न कराना अच्छा निर्णय था। हमने दो प्री-बोर्ड दिए थे और तैयारी भी अच्छी थी। प्री-बोर्ड के साथ ही नौवीं व अन्य टेस्ट में अच्छे प्रदर्शन से बोर्ड का रिजल्ट अच्छा रहा। मेरे पिता राजदीप दुबलिश बिजनेसमैन और माता डा. कीर्ति दुबलिश जेपी इंस्टीट्यूट में निदेशक हैं।

परीक्षा होती तो और अच्छे अंक लाती काव्या

नाम : काव्या राजपूत

स्कूल : सोफिया गल्र्स स्कूल

कक्षा : 10वीं

जिले में स्थान : प्रथम

प्राप्तांक-589-600, 98.8 फीसद

मार्कशीट : गणित-100, हिंदी-99,कंप्यूटर-100, सोशल साइंस- 97, साइंस-97 अंग्रेजी-96

इस बार कोरोना महामारी की वजह से बोर्ड की परीक्षा नहीं हुई। शुरू में परीक्षा न होने का बहुत मलाल हो रहा था। लेकिन जो निर्णय हुआ, अच्छा है। अगर बोर्ड के एग्जाम होते तो मेरे अंक और अधिक आते। मैंने पूरे साल नियमित पढ़ाई की। बोर्ड परीक्षा की पूरी तैयारी थी। शुरू में जो तैयारी की थी, उसकी वजह से 12वीं में जो मूल्यांकन हुआ वह ठीक रहा है। उससे मैं संतुष्ट हूं। मेरे पिता प्रदीप राजपूत डाक्टर हैं। माता अमिता सिंह हैं। आगे मैंने 11वीं में पीसीएम लिया है। मैं जेईई की तैयारी करूंगी। अगर सफलता की बात करें तो नियमित पढ़ाई ही सबसे जरूरी है। मैंने कोई कोचिंग नहीं की। 

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