कोरोना की जीत के बीच भूख को दी शिकस्त

कोरोना की जीत के बीच भूख को दी शिकस्त

जब दूसरों की वेदना आपकी भावना से जुड़ जाती है तो मन में सेवा का अंकुर फूट पड़ता है।

Publish Date:Thu, 21 Jan 2021 03:30 AM (IST) Author: Jagran

मेरठ, जेएनएन। जब दूसरों की वेदना आपकी भावना से जुड़ जाती है तो मन में सेवा का अंकुर फूट पड़ता है। इस जज्बे को यदि समाज का सहारा मिल जाए तो जनसेवा का कारवां बनते देर नहीं लगती। इसकी मिसाल पेश की है दिल्ली रोड निवासी अजीत सचान ने। उन्होंने लाकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को भोजन व राशन के साथ-साथ व्हीलचेयर, बर्तन, दवा व अन्य वस्तुएं भी मुहैया कराईं।

दिल्ली रोड स्थित गायत्री हाइट्स सोसायटी निवासी समाजसेवी अजीत सचान रुड़की स्थित पैनेसिया हेल्थ केयर प्रा. लि. के डायरेक्टर भी हैं। मार्च में लाकडाउन में उद्योग-धंधे ठप होने के कारण जरूरतमंदों के सामने पेट भरने की बड़ी चुनौती थी। कमाई का जरिया बंद होने से अन्य परेशानी भी झेलनी पड़ रही थी।

ऐसे में अजीत सिंह के मन में लोगों की दिक्कतें दूर करने का विचार आया। इसके लिए उन्होंने सोसायटी के प्रत्येक घर से भोजन जमा करने की योजना बनाई। इसमें सोसायटी के पंकज शर्मा, संजय शर्मा, अमरदीप, प्रभात, सौरभ, प्रवीण आदि ने सहयोग किया। 27 मार्च को उन्होंने संग्रह किए भोजन से 25 जरूरतमंदों को भोजन कराया। अधिकाधिक लोगों तक भोजन पहुंचे, इसके लिए समाज के सहयोग से 12 अप्रैल को गायत्री रसोई की स्थापना की। रोजाना एक हजार लोगों के लिए 70 दिन तक निर्बाध रूप से रसोई चलाई। जरूरतमंदों को सूखा राशन भी उपलब्ध कराया। पांच रोटी हर घर से मुहिम लाई रंग

अजीत सचान ने बताया कि उनका प्रयास इतना व्यापक रूप लेगा इसकी उम्मीद नहीं थी। आसपास के जरूरतमंदों की परेशानी को बांटने के लिए गायत्री हाइट्स सोसायटी के प्रत्येक परिवार से पांच रोटी हर घर मुहिम चलाई। सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद आसपास की वैष्णोंधाम, आर्क सिटी व सैनिक विहार सोसायटी के लोगों ने भी उन्हें भोजन उपलब्ध कराया। इस सहयोग ने हौसला बढ़ाया। अपनों के साथ समाज का भी मिला भरपूर सहयोग

अजीत कहते हैं-जनसेवा के लिए सोचने से ज्यादा इस दिशा में आगे आकर काम करने की जरूरत थी। इसकी शुरुआत मुजफ्फरनगर के पुरबालियान निवासी डा. नीटा ने चावल व डा. केपी वाष्र्णेय ने सहयोग राशि देकर की। बिल्डर सुनील रोहटा का भी भरपूर सहयोग मिला। इंटरनेट मीडिया पर सेवा कार्य से जुड़े उनके वीडियो देखकर तमाम सहयोगियों ने कनाडा, दुबई, अमेरिका आदि से भी सहयोग किया। महाराष्ट्र के लातूर जिला स्थित महाराष्ट्र कालेज आफ फार्मेसी निलंगा से भी सहयोग प्राप्त हुआ। वहां से उन्होंने पढ़ाई की थी।

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