मेरठ में गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं करते अस्पताल, ब्लड रिपोर्ट हाथ में लेकर भटक रहे मरीज

मेरठ कोविड अस्‍पताओं का हाल बेहाल ।

मेरठ में सीटी स्कोर 18 से ज्यादा देखते ही मना कर रहे अस्पताल। गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं करते अस्पताल कई गंवा चुके जान। ब्लड रिपोर्ट हाथ में लेकर भटक रहे मरीज दो दिन में गवा रहे जान।

Taruna TayalMon, 10 May 2021 03:24 PM (IST)

मेरठ, जेएनएन। प्रशासन लाख दावा करे, लेकिन गंभीर मरीजों को कोई नहीं जिले में भले ही 30 कोविड अस्पताल हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को भर्ती करने से ज्यादातर बच रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में ऐसे दर्जनों मरीज शिकायत दर्ज करवा चुके हैं, जिनका एचआरसीटी स्कोर 18 से ज्यादा देखकर अस्पतालों ने इलाज करने से मना कर दिया। कई मरीजों की इलाज के अभाव में मौत हो गई। प्रशासन ने जिम्मेदारी नहीं ली तो और दर्जनों मरीजों की जान जाएगी।

मरीजों की क्या गलती

कोरोना संक्रमण भयावह रूप से फैल गया है। गांवों से लेकर शहर तक रोजाना दर्जनों मरीजों की मौत हो रही है। शहर के सभी अस्पतालों के सामने ऐसे मरीज भर्ती होने की कतार में खड़े मिल रहे हैं, जिनके फेफड़ों में जबरदस्त संक्रमण है। अस्पताल पहले मरीजों की रिपोर्ट मांगते हैं। उसमें सीटी स्कोर, इन्फ्लामेटी मार्कर और उम्र देखते हैं। कई मरीज ब्लड जांच रिपोर्ट साथ लेकर भटक रहे हैं। निजी कोविड अस्पताल मरीज गंभीरों की रिपोर्ट देखकर भर्ती करने से मना कर रहे हैं। मरीजों के स्वजन भर्ती कराने से के लिए प्रशासनिक अधकारियों से लेकर विधायकों तक को फोन करते हैं। ज्यादातर जगहों से न सुनने के बाद परिजन भी हौसला हार रहे हैं। 410 बेडों वाले मेडिकल कालेज पर गाजियाबाद, अमरोहा, बागपत, नोएडा, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर तक का दबाव है। एनसीआर मेडिकल कालेज में हाई फ्लो आक्सीजन एवं वेंटीलेटर को लेकर सीमित सुविधाएं हैं। सुभारती मेडिकल कालेज में भी ज्यादातर बेड भरे हुए हैं। ऐसे में गंभीर मरीज भटकता रह जाता है।

हाईवे से लेकर गढ़ रोड पर स्थित दर्जनों कोविड अस्पतालों में आक्सीजन खत्म है। कई अस्पतालों ने आइसीयू बेडों पर भर्ती बंद कर दिया है। कई अस्पतालों में पैनल के मरीज ज्यादा हैं, जो बेड पद लंबे पर तक काबिज रहते हैं। इनके इलाज से जहां अस्पतालों को पर्याप्त रकम मिल जाती है, वहीं मरीजों की मौत की आशंका भी कम होती है।

इन्‍होंने बताया...

वाकई दुखद है कि जिन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है, उन्हें अस्पताल भर्ती करने में आनकानी कर रहे हैं। ऐसी दर्जनों शिकायतें रोज मिल रही हैं। अस्पतालों को निर्देश है कि वो मरीजों को भर्ती करने से मना नहीं कर सकते।

- डा. अखिलेश मोहन, सीएमओ

निजी अस्पताल रात-दिन मरीजों के इलाज में लगे हैं,ऐसे में उनकी भी मजबूरी समझनी होगी। प्रशासन आक्सीजन पर्याप्त उपलब्ध कराए, और डाक्टरों से सामंजस्य रखे तो सब ठीक हो जाएगा। गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज दिया जाना चाहिए।

- डा. मनीषा त्यागी, सचिव, आइएमए

 

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