EPCA के चेयरमैन भूरेलाल कूड़े का पहाड़ देख बोले- कूड़े के बारूद से अब मेरठ को जला दोगे क्या?, पढ़े पूरी रिपोर्ट

EPCA के चेयरमैन भूरेलाल कूड़े का पहाड़ देख बोले- कूड़े के बारूद से अब मेरठ को जला दोगे क्या?, पढ़े पूरी रिपोर्ट
Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 06:00 AM (IST) Author: Prem Bhatt

संतोष शुक्ल, मेरठ। नगर निगम की टीम शनिवार सुबह 11 बजे लोहिया नगर में कूड़े के पहाड़ पर छिड़काव कर रही है। यहां बदबू और धुंधलका सा है। अचानक तीन कारें एक साथ रुकती हैं, और सिटी मजिस्ट्रेट तेजी से दौड़कर एक कार के पास पहुंच जाते हैं। कार के अंदर से भूरेलाल की आवाज आती है, ये क्या है। शहर को जला देने का इरादा है क्या, ये कूड़ा नहीं बारूद का ढेर है। मीथेन गैस से आग लगेगी तो मानव आबादी और पीछे स्थित मुलायम सिंह यादव मेडिकल कालेज तक लपेटे में आ जाएंगे। आखिर कचरे से प्लास्टिक निकालकर बिजली क्यों नहीं बनाई जा रही है। हापुड़ रोड स्थित नाले की बदबू और नौचंदी मैदान की कूड़े में खाक छानती विरासत देखकर भूरेलाल तमतमा गए। अधिकारियों से कहा, आप लोग ये डायरी में नोट करना बंद करिए, कुछ करना तो है नहीं, इन्हीं वजहों से एनसीआर सॢदयों में गैस चेंबर में बदल जाता है।

काबिल होते तो कूड़े से बिजली बना लेते

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के चेयरमैन भूरेलाल शनिवार को पश्चिमी उप्र के निरीक्षण पर निकले थे। हापुड़ स्थित धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र को देखने के बाद वो जैसे ही मेरठ में दाखिल हुए, सड़क के किनारे लोहियानगर में कूड़े का पहाड़ देखकर चौंक गए। इतनी गंदगी देख अधिकारियों से पूछा कि पहले तो इतना बड़ा ढेर नहीं था, अब क्या हो गया। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि सर, अब कूड़ा गावड़ी के बजाय यहीं डाला जाता है। भूरेलाल ने सख्त लहजे में यहां पर कूड़ा डालने के लिए मना किया। कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रदेश में सबसे पीछे रहने के बाद भी अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। सिटी मजिस्ट्रेट स?येंद्र सिंह से पूछा कि अब डीएम और कमिश्नर कौन है? सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया। नाराज भूरेलाल ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को लेकर कहा कि राजनीति से बाज आते तो कचरे से बिजली बनाने का प्लांट जरूर लग जाता। उन्‍होंने प्रशासनिक विभागों पर दंड लगाने के लिए भी कहा। आगाह किया कि अगर कूड़े में आग लगी तो बुझाना मुश्किल होगा, जहरीले धुएं से आबादी का दम घुट जाएगा। यहां 15 मिनट रुकने के बाद क्षुब्ध भूरेलाल ने गाड़ी आगे बढ़ाने का इशारा किया। सिटी मजिस्ट्रेट उनकी कार में साथ बैठ गए।

इतना गंदा नाला कहीं दिखे तो बताना

चेयरमैन भूरेलाल की कार करीब 12 बजे हापुड़ रोड के नाले पर रुकी। भीषण बदबू के बीच नाले पर कई होटल भी नजर आए। भूरेलाल ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही ने शहर में सड़ांध फैला दी है। उन्हें बताया गया कि इस नाले में पहले पशु कटान का अवशेष बहता था। खैर, टीम के द्वारा नाले के दोनों तरफ के कई फोटोग्राफ खींचे गए। वो तीन मिनट रुके,और लंबी सांस लेकर कार में बैठ गए। बेगमपुल होते हुए भूरेलाल की कार रुड़की रोड पर बहने वाले नाले के पास रुकी। इस बीच वो मेरठ से जुड़ी पुरानी यादों पर भी बात करते रहे, लेकिन उनकी नजरों में सड़कों के किनारे बिखरा कूड़ा खटकता रहा। रुड़की रोड स्थित नाले की दुर्गंध आधा किलोमीटर दूर से महसूस होने लगी थी। यह इतनी तीखी थी कि आदमी गश खा जाए। भूरेलाल भी बड़ी मुश्किल से संभले। सिटी मजिस्ट्रेट से कहा, इट्स रियली हॉरीबल। ये हाइड्रोजन सल्फाइड की गंध लग रही है, जो घरों में रखे बर्तनों और धातुओं को गला देती है, भला फेफड़े क्या चीज हैं? उन्होंने नाले के पास फल बेचने वालों को वहां से तत्काल हटाने का निर्देश दिया, और प्रशासन से नालों की सफाई की प्रगति रिपोर्ट तलब की।

कहां है नौचंदी मैदान, साहब इसी कूड़े में है

दोपहर करीब पौने एक बजे हापुड़ रोड से निकलते समय भूरेलाल की कार नौंचदी मैदान की ओर घूम गई। नगर निगम के अधिकारियों के होश उड़ गए। भूरेलाल नौचंदी मेले की विरासत को याद करते हुए मैदान में दाखिल हुए। उखड़ी सड़कें, जगह-जगह कूड़े के ढेर, आवारा पशुओं के झुंड देख भूरेलाल ठिठक गए। अधिकारियों से पूछा कि वो नौचंदी मैदान कहां है, जहां देश का प्रसिद्ध मेला लगता रहा है। अधिकारियों की नजरें झुक गईं। बताया, सर इसी कूड़े में मैदान दबा हुआ है। भूरेलाल क्रोध से तमतमा गए। कहा, चिंता न करो, सबका हिसाब देना होगा। विरासत क्या बचाओगे, जब स्थान नहीं बचा सकते।

नागिन की तरह जहरीली है बुढ़ाना की हिंडन

इसके बाद भूरेलाल की कार सरधना रोड पर दौडऩे लगी। नई दिल्ली से गाजियाबाद, हापुड़ होते हुए मेरठ पहुंचे थे, लेकिन इतना प्रदूषण कहीं नहीं मिला। एक घंटे बाद मुजफ्फरनगर जनपद अंतर्गत बुढ़ाना टाउन एरिया पार करते ही हिंडन नदी के पुल पर पहुंच गए। नदी के एक किनारे को गन्ने की खेती ने निगल लिया है। पुल से काफी नीचे हिंडन कराहती नजर आई। पानी पूरी तरह काला पड़ गया है। भूरेलाल टीम के साथ उतरे, और नदी को दोनों तरफ से देखा। नदी का दयनीय हाल देख स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी करने के लिए कहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि पास में शुगर मिल के प्रदूषण से बड़ी आबादी घिर गई है। बेलगाम फैक्ट्रियां जहर उगल रही हैं। यहां से भूरेलाल कांधला होकर कैराना के लिए निकले। कांधला में एक स्थान पर कूड़ा डंपिंग देखकर रुक गए। प्लास्टिक कचरा ज्यादा था, जिसमें कई पशु खाना तलाश रहे थे। कैराना में मीट कारोबार से पैदा होने वाले प्रदूषण की स्थिति देखकर नाराज भूरेलाल ने कहा कि इसमें खतरनाक बैक्टीरिया व वायरस हो सकते हैं, जो महामारी का कारण बनते हैं। मीट व बायोमेडिकल वेस्टेज का वैज्ञानिक तकनीक पर निस्तारण होना चाहिए।

फेफड़े मजबूत होते तो इतनी जान न लेता कोरोना

शामली जनपद अंतर्गत कांधला से कैराना पहुंचने के दौरान बीच में सड़क ठीक-ठाक रही, लेकिन कैराना में प्रवेश करते ही गढ्ढों में कार झूलने लगी। उखड़ी सड़कों की वजह से चारों ओर धूल का गुबार था। सांस के साथ धूल के खतरनाक कण नाक के जरिए फेफड़ों में दाखिल हो रहे थे। भूरेलाल ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों के प्लास्टिक कचरे का धुआं व धूलकण से फेफड़़ों की क्षमता में 30 फीसद तक कमी आई है। एनसीआर दिल्ली से लेकर पंजाब के लुधियाना तक बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। पीएम-2.5, पीएम-10 के साथ ही खतरनाक गैसों के फेफड़े तक पहुंचने से लोगों की कार्यक्षमता और प्रतिरोधक क्षमता गिरी है। अगर फेफड़े स्वस्थ होते तो कोरोना से इतनी मौतें नहीं होतीं।

इन स्‍थानों का किया निरीक्षण

- मेरठ में लोहिया नगर कूड़ा स्थल

- हापुड़ रोड स्थित नाला

- नौचंदी मैदान

- रुड़की रोड स्थित नाला

- बुढ़ाना में हिंडन नदी

- कांधला में कूड़ा स्थल

- कैराना में जर्जर सड़कें, धूल

यह दिया आदेश

- कचरे से बनाएं बिजली

- कूड़े में न लगे आग

- हटाएं नालों का अतिक्रमण

- भेजें नाला सफाई रिपोर्ट

- विभागों पर लगेगा अर्थदंड 

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