मेरठ: अब निजी हाथों में होगा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, जानिए क्‍या हो जाएगा बदलाव

मेरठ में घर-घर से कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था निजी हाथों में देने की कवायद शुरू हो गई। नगर निगम ने कंपनियों को अपने-अपने प्रस्ताव देने के लिए ई-टेंडर निकाल दिया है। जिसकी प्री बिड मीटिंग 20 सितंबर को आनलाइन होगी।

Himanshu DwivediWed, 15 Sep 2021 09:35 AM (IST)
अब निजी हाथों में होगा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन

जागरण संवाददाता, मेरठ। महानगर में घर-घर से कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था निजी हाथों में देने की कवायद शुरू हो गई। नगर निगम ने कंपनियों को अपने-अपने प्रस्ताव देने के लिए ई-टेंडर निकाल दिया है। जिसकी प्री बिड मीटिंग 20 सितंबर को आनलाइन होगी। ई-टेंडर की तकनीकी बिड पांच अक्टूबर को खुलेगी।

नगर निगम पहले चरण में सूरजकुंड वाहन डिपो और दिल्ली रोड वाहन डिपो क्षेत्र (मुख्यालय और शास्त्रीनगर जोन) के वार्डो में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था आउटसोर्स पर देगा। दोनों वाहन डिपो क्षेत्र में कुल 73 वार्ड आते हैं। इनके लिए ही कंपनियों को आमंत्रित किया गया है।

कंकरखेड़ा वाहन डिपो क्षेत्र के वार्ड निगम अपने पास रखेगा। नगर निगम अफसरों के अनुसार कंपनियां अपने प्रस्ताव में प्रति घर व व्यवसायिक प्रतिष्ठान से कूड़ा कलेक्शन की दर बताएंगी। 20 सितंबर को प्री बिड मीटिंग में नगर निगम अधिकारी कंपनियों के प्रस्ताव में बारे में जानेंगे।तकनीकी और फाइनेंशियल बिड के अंकों और कंपनियों के पुरानी प्रोफाइल के आधार पर टेंडर फाइनल किया जाएगा। मालूम हो कि वर्तमान में नगर निगम की डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था शत-प्रतिशत घरों तक नहीं पहुंच सकी है। यही वजह है कि अब निजी हाथों में देने की कवायद शुरू की गई है।

कंकरखेड़ा डिपो की व्यवस्था खुद देखेगा निगम : लेकिन कंकरखेड़ा जोन अर्थात कंकरखेड़ा वाहन डिपो क्षेत्र के 17 वार्ड फिलहाल निजी हाथों में नहीं जाएंगे। यहां नगर निगम खुद डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करेगा। निगम अफसरों के मुताबिक जब मुख्यालय व शास्त्रीनगर जोन के सूरजकुंड व दिल्ली रोड वाहन डिपो में आउटसोर्स व्यवस्था का परिणाम बेहतर रहेगा तब कंकरखेड़ा जोन में भी यह लागू की जाएगी।

ब्रजपाल सिंह, सहायक नगर आयुक्त प्रथम व नोडल अधिकारी कचरा निस्तारण, नगर निगम

सूरजकुंड और दिल्ली रोड वाहन डिपो के वार्डो में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन (संचालन व मेंटीनेंस)आउटसोर्स पर दिया जा रहा है। ई टेंडर के जरिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। एक माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। कंकरखेड़ा जोन की व्यवस्था निगम के पास ही रहेगी।

क्या होगा बदलाव

डोर टू डोर कूड़ा गाड़ी का संचालन और मेंटीनेंस कंपनी के जिम्मे होगा। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए चालक से लेकर अन्य स्टाफ भी कंपनी का होगा। कंपनी कूड़ा कलेक्शन के एवज में यूजर चार्ज घरों व प्रतिष्ठानों से वसूलेगी। तिमाही, छमाही और वार्षिक यूजर चार्ज का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर प्रोत्साहन राशि कंपनी को दी जाएगी। डोर टू डोर कूड़ा गाड़ियां निगम की रहेंगी। कूड़ा गाड़ियों का ईधन ठेका कंपनी वहन करेगी। संचालन के लिए कंपनी अपना कार्यालय भी खोलेगी।

दो माह में तैयार कर लिए जाएंगे कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन

शहर में खुले खत्तों से निजात दिलाने को पोर्टेबल कांपेक्टर आधारित कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पांच स्थानों में से तीन पर निर्माण के लिए शुरुआती कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। निर्माण अनुभाग के इंजीनियरों का दावा है कि सभी कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन दो माह में तैयार हो जाएंगे। नगर निगम ने पहले चरण में पांच स्थानों पर कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन बनाने के लिए टेंडर फाइनल करने के साथ ठेकेदारों को वर्क आर्डर जारी कर दिया है। पांच स्थानों में मंगलपांडे नगर, नगलाताशी, बच्चा पार्क चौराहे के पास, माधवपुरम और हापुड़ रोड कमेला के पास कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। इनमें से मंगलपांडे नगर, नगलाताशी और बच्चा पार्क चौराहे के पास कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन का स्ट्रक्चर तैयार करने का शुरुआती काम ठेकेदारों ने शुरू कर दिया है। निर्माण अनुभाग के इंजीनियरों के मुताबिक कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के लिए चार इंच मोटी और 10 मीटर चौड़ी आरसीसी फर्श बनाई जाएगी। कचरे से निकलने वाले लीचेट (गंदा पानी) एकत्र करने के लिए एक टैंक बनाया जाएगा। कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन को तीन तरफ से ढकने के लिए 6.50 मीटर से अधिक ऊंची दीवार बनाई जाएगी। इसके ऊपर शेड डाला जाएगा।

कचरा दिखेगा न फैलेगी दुर्गंध

कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन पर कचरे को बंद करके रखने के लिए पोर्टेबल कांपेक्टर की खरीदी जल्द की जाएगी। सिविल कार्य पूरा होते ही पोर्टेबल कांपेक्टर कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन पर स्थापित किए जाएंगे। इन्हें संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन लिया जाएगा। एक स्थान पर दो पोर्टेबल कांपेक्टर रखे जाएंगे। ये आटोमेटिक खुलेंगे व बंद होंगे। इसमें कचरा रखने से न तो गंदगी दिखेगी और न दुर्गंध फैलेगी। एक कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन पर चार से पांच वार्ड का कूड़ा एकत्र हो सकेगा। करीब 25 वार्ड में खुले में खत्ते की समस्या खत्म हो जाएगी। 

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