धुंध में सुबह की सैर न करें सांस के मरीज

मेरठ, जेएनएन। वायु प्रदूषण की गिरफ्त में फंसे मेरठ का माहभर में दम फूल गया। हवा में सूक्ष्म कणों का घनत्व ज्यादा होने से सांस की एलर्जी, अस्थमा, सीओपीडी व हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा। कई मरीजों को अटैक पड़ा, जबकि स्वस्थ लोगों में एक्यूट ब्रांकाइटिस देखा गया। दैनिक जागरण ने अपने नियमित कॉलम 'प्रश्न पहर' में वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर को आमंत्रित किया। पाठकों ने उनसे सांस एवं प्रदूषण संबंधी बीमारियों पर खुलकर प्रश्न किए, जिनके विशेषज्ञ ने उत्तर दिए। सर्वाधिक प्रश्न सांस की एलर्जी से संबंधित किए गए।

प्रश्न-15 दिन से खांसी बनी हुई है। आंख में जलन भी है। शरीर पर खुजली और दाने निकल आए हैं। क्या करूं?

देवेंद्र कुमार गौतम, मीरपुर रोहटा

उत्तर - वायु प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन व खांसी हो रही है। खांसी में बलगम के साथ बुखार भी है तो यह पांच दिन से ज्यादा नहीं होना चाहिए। शरीर पर दाने भी एलर्जी के लक्षण हैं। चिकित्सक के परामर्श लेकर एंटी एलर्जिक लें। एंटीबायोटिक से आराम न हो तो छाती का एक्स रे करवाना चाहिए।

प्रश्न: कई माह से छाती में दर्द रहता है। दवा कराई, लेकिन आराम नहीं।

मित्रपाल सिंह, प्रभातनगर

छाती में पीछे की तरफ तीन तरह से दर्द होता है। इसमें आहार नली और हार्ट का भी रिस्क होता है। ईसीजी व छाती का एक्स रे कराना होगा। डाक्टर सीटी स्कैन भी कराते हैं।

प्रश्न- वायु प्रदूषण से क्या खतरे हैं। आंखों में धुंधलापन इस वजह से तो नहीं बढ़ रहा है?

अनुज गर्ग, शास्त्रीनगर, विवेक गोयल, माधवनगर, अंजू जैन जैननगर

वायु प्रदूषण से सांस की एलर्जी, छींक, खांसी, दम फूलना, अस्थमा, ब्रांकाइटिस, साइनोसाइटिस व हार्ट अटैक का भी रिस्क है। एन-95 मास्क लगाएं। पीएम 2.5 फेफड़ों की मेंब्रेन पार कर रक्त में मिल जाते हैं। ये स्ट्रोक, कैंसर व शुगर भी करते हैं।

प्रश्न: मुझे धूल से एलर्जी है। प्रदूषण के दौरान तबीयत बिगड़ जाती है, क्या एहतियात बरतें?

लाखन, खरखौदा

नमक-पानी से गरारा करें। पानी में विक्स या यूकिलिप्टस के पत्ते डालकर भाप लेना चाहिए। खांसी में सामान्य कप सिरप लें। पीला बलगम आए तो एंटीबायोटिक लेनी होगी। गर्म सूप भी पिएं। धूल से एक्यूट ब्रांकाइटिस होती है, इससे बचाव करें।

प्रश्न: धुंध में अस्थमा के अटैक का खतरा कितना होता है और इसके क्या लक्षण हैं?

पवन मिश्रा, पांडवनगर, रितेश सिंह, जागृति विहार

बहुत अच्छा प्रश्न है। कई बार अस्थमा व सीओपीडी का अटैक हार्ट अटैक के लक्षणों के साथ उभरता है। खांसी और बलगम बढ़ता है। शरीर में ऑक्सीजन गिरने से सांस फूलती है। छाती में कसावट होने पर सावधान होना चाहिए। सांस फूलने से मरीज एक वाक्य पूरा नहीं बोल पाता। होठ व कान नीले पड़ते हैं तो इनहेलर देते हुए तत्काल पास के अस्पताल ले जाएं।

प्रश्न: मेरे पिताजी अस्थमा के मरीज हैं। उन्हें भी अटैक जैसे लक्षण आएं तो क्या करना चाहिए?

वीरपाल तोमर, गंगानगर

अपने डाक्टर से इमरजेंसी प्लान के अंतर्गत दवाएं लिखवाकर घर पर रखें। कभी अटैक आए तो कोहनी के बल बैठकर होठों को गोलकर मुंह से सांस लें। पानी की भाप लें। डाक्टर ईसीजी व फेफड़ों में निमोनिया पकड़ने के लिए एक्स रे भी करते हैं। सीओटू, ऑक्सीजन व पीएच-मान चेक कर इलाज किया जाता है।

प्रश्न: मुझे दस दिन से खांसी, जुकाम व बुखार बना हुआ है। क्या करूं?

मनोज अहलावत, परतापुर

जुकाम, खांसी व बुखार अगर वायरस से हुआ है तो पांच दिन में स्वयं समाप्त हो जाता है। इससे ज्यादा टिकना ठीक नहीं। जांच कराएं। निमोनिया तो नहीं। डेंगू समेत कई अन्य वायरल बुखारों में भी ऐसे लक्षण उभरते हैं। छाती का एक्स रे कराएं।

प्रश्न: क्या वायु प्रदूषण के दौरान एक स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस की बीमारी का रिस्क है। क्या लक्षण उभरते हैं?

मोहम्मद आलम, भूमिया का पुल

सांस के मरीजों पर प्रदूषण का घातक व जानलेवा असर है, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति में भी लगातार खांसी, छींक, नाक से पानी बहने, गले में खराश व दम घुटने जैसे लक्षण मिलते हैं।

प्रश्न: मेरे पिताजी का वजन 90 किलोग्राम है। सीओपीडी के भी मरीज हैं, उन पर कितना रिस्क है?

अभिनव सागर, कंकरखेड़ा

वजन ज्यादा होने पर प्रदूषण के दौरान सांस की गति बढ़ जाती है। ऐसे में कार्यक्षमता में तेजी से कमी आती है। सीओपीडी के मरीजों की डोज बढ़ानी पड़ती है। दुनिया में हार्ट अटैक, स्ट्रोक के बाद सर्वाधिक मौतें सीओपीडी के अटैक से हो रही हैं, बचाव जरूरी है।

प्रश्न. मुझे भोजन के दौरान गले में अटकन महसूस होती है, इसका क्या इलाज है?

शिवप्रताप सिंह, शिव विहार

छाती का एक्स कराएं। कई बार यहां बनी गांठ भी फूड पाइप पर दबाव डालती है। इंडोस्कोपी जांच जरूरी है।

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