Constitution Day: संविधान सभा में शामिल थीं मेरठ की कमला चौधरी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, साहित्यकार की आज भी जुडीं हैं यादें

freedom fighter Kamala Chaudhary कमला चौधरी का जन्म लखनऊ में 22 फरवरी 1908 को हुआ था। उनके पिता मनमोहन दयाल उस समय लखनऊ में मजिस्ट्रेट थे। उनका विवाह मेरठ के डा. जितेंद्र मोहन चौधरी से 1926 में हुआ था। उनकी यादें मेरठ से जुड़ीं हैं।

Prem Dutt BhattSat, 27 Nov 2021 10:50 AM (IST)
हापुड़ लोकसभा सीट से सांसद रहीं कमला चौधरी थी प्रख्यात साहित्यकार।

ओम बाजपेयी, मेरठ। Constitution Day मेरठवासी साहित्यिक योगदान देने वालों के साथ ही राजनीतिक हस्तियों को भी भूलने लगे हैं। 26 नवंबर को संविधान दिवस पर जगह जगह आयोजन हुए। लेकिन शहर की स्वतंत्रतासंग्राम सेनानी, साहित्यकार और सांसद कमला चौधरी को शायद ही किसी ने याद किया हो। जबकि मेरठ के गौरव की बात है कि जिस संविधान सभा ने संविधान की रचना की, वह उसकी सदस्य थीं। तत्कालीन समय में वह देश भर की उन 15 प्रख्यात महिलाओं में शामिल थीं, जिन्हें सभा में स्थान मिला था। इन 15 महिलाओं में राजकुमारी अमृता कौर, सुचेता कृपलानी सरीखी महिलाएं थीं।

सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ीं

कमला चौधरी का जन्म लखनऊ में 22 फरवरी 1908 को हुआ था। उनके पिता मनमोहन दयाल उस समय लखनऊ में मजिस्ट्रेट थे। उनका विवाह मेरठ के डा. जितेंद्र मोहन चौधरी से 1926 में हुआ था। विवाह के बाद ही वह महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ गई थीं। चरखा समितियों का गठन कर उन्होंने महिलाओं को देश की आजदी के संघर्ष से जोडऩे का काम किया था। एक सभा में तिरंगा फहराने के जुर्म में अंग्रेज हुकूमत ने उन्हें जेल की सजा सुनाई थी। वह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छह बार जेल गईं। आजादी के बाद संविधान सभा की सदस्य रहीं। उत्तर प्रदेश राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड की अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, शहर और प्रांतीय कांग्रेस में वह विभिन्न पदों पर रहीं। 1962 में वह कांग्रेस के टिकट पर हापुड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतीं। सांसद के रूप में लड़कियों की शिक्षा और महिला अधिकारों को लेकर वह संसद में मुखर रहीं। उनकी मृत्यु 15 अक्टूबर 1970 में हुई थी।

मां कमला चौधरी ने इरा को दिखाई थी संविधान की हस्तलिखित प्रति

वरिष्ठ साहित्यकार वेदप्रकाश वटुक बताते हैं कि कमला चौधरी ने विवाह के पूर्व से लेखन आरंभ कर दिया था। वह बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं। वह श्रेष्ठ कवियित्री और उत्कृष्ट कहानी लेखिका थीं। उन्माद, पिकनिक, प्रसादी कमंडल उनके कहानी संग्रह हैं। उन्होंने उमर खैयाम की रुबाइयों का अनुवाद खैयाम का जाम भी लिखा, जिसकी महान साहित्यकार हरिवंशराय बच्चन ने खूब सराहना की थी। बाल साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली उनकी बेटी इरा सक्सेना ने बताया कि 1963 में जब सांसद थीं तो उन्हें लोकसभा संग्रहालय ले गई थीं। इरा बताती हैं उस समय 11वीं की छात्रा थीं। मां ने हस्त लिखित संविधान दिखाते हुए बताया था कि यह संविधान हमारे देश की थाती है। लाखों का बलिदान इससे जुड़ा है। इरा बताती हैं संविधान में उनकी मां के हस्ताक्षर देख वह गर्व से भर गई थी। वह स्मृति आज भी मस्तिष्क में अंकित है।

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