कोमार्बिड मरीज चार माह तक फैला सकते हैं कोरोना, महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट

सावधान फ‍िर उबर सकता है कोरोना संक्रमण।

Risk of Corona From Comorbid Patient कोरोना से उबर चुके मरीज सावधान रहें बन सकते हैं सुपर स्प्रेडर। महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट। जीनोम सिक्वेंसिंग से पता चला हो सकते हैं पुन संक्रमित ।

Taruna TayalSun, 21 Feb 2021 03:18 PM (IST)

मेरठ, [संतोष शुक्ल]। कोरोना से उबर चुके मरीज सावधान रहें। वायरस फिर से हमला कर सकता है। शुगर, अस्थमा, किडनी, कैंसर व लिवर के मरीजों में कोरोना वायरस चार माह तक गुपचुप बना रह सकता है। जीनोम सिक्वेंसिंग से पता चला है कि ऐसे मरीजों में चार माह बाद दोबारा संक्रमण उभरने का खतरा है। ऐसे में वे सुपर स्प्रेडर बनकर बड़ी आबादी को भी संक्रमित कर सकते हैं। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण अचानक बढ़ा है। वायरस के फिर से संक्रमित होने और म्यूटेशन को लेकर शोध तेज कर दिया गया है। मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलोजी विभाग के इंचार्ज डा. अमित गर्ग का कहना है कि मुंबई में कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले 56 वर्षीय मरीज में चार माह बाद कोरोना फिर मिला।

जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट ने विज्ञानियों को हैरान कर दिया। इस मरीज के शरीर में वायरस चार माह तक पड़ा रहा। कोई म्यूटेशन भी नहीं हुआ। वही वायरस दोबारा उभर आया। इससे बड़ी आबादी पर फिर खतरा मंडरा रहा है।

जिन्हें कोई और बीमारी, उनमें ज्यादा खतरा

मेडिकल कालेज समेत तीन बड़े कोविड केंद्रों की रिपोर्ट बताती है कि आइसीयू तक पहुंचने वालों में कोमार्बिडिटी वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है। इनमें से ज्यादातर मरीज ठीक हो गए। इनमें बड़ी संख्या में पोस्ट कोविड इफेक्ट का इलाज करा रहे हैं। लंग्स में धब्बे बनने से कई मरीजों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस हो गई। उनकी सांस की क्षमता में कमी आने से थकान, छाती, सिर और मांसपेशियों में दर्द, डिप्रेशन एवं बुखार के लक्षण मिल रहे हैं। मेडिकल कालेज कोविड केंद्र के डा. तरुणपाल का कहना है कि वायरस के प्रभाव की वैज्ञानिक पड़ताल जरूरी है।

इन्‍होंने बताया...

महाराष्ट्र में संक्रमण फैलने के पीछे कोरोना का नया स्ट्रेन भी माना जा रहा है। जीनोम सिक्वेंसिंग में पता चला कि जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उनमें वायरस कई माह तक टिका और दोबारा बीमारी हो गई। कोमार्बिड मरीजों के वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग के बाद उन्हें आइसोलेट करके दूसरों को बीमारी से बचा सकते हैं।

- डा. अमित गर्ग, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलोजी विभाग, मेडिकल कालेज

कोरोना वायरस पर शोध में नई बातें सामने आ रही हैं। असल में यह वायरस हेपेटाइटिस बी और एचआइवी वायरस की तरह क्रानिक संक्रमण बनाकर उसमें पड़ा रहना चाहता है। ऐसे लोग अगले छह माह तक मास्क लगाएं। शुगर, किडनी व अस्थमा के मरीजों पर कोरोना ने गहरा असर छोड़ा है।

- डा. अमित अग्रवाल, सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ 

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