दाल में काला नहीं..पूरी दाल ही काली

मेरठ, जेएनएन। मंगलवार को शाम तीन बजे तक शासन की एसआइटी ने दो दिन तक पड़ताल कर जांच पूरी की। जांच में मिलावटी पेट्रोल प्रकरण सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि टीम की जांच में सामने आया कि तेल कारोबारियों ने साल्वेंट बेचने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की है। साल्वेंट केमिकल कैंसर को बढ़ावा देता है, उसे बेचने के लिए भी अनेक मानक रखे गए हैं। प्रशासनिक अफसरों ने बिन मानक साल्वेंट ही क्यों बिकने दिया? ऐसे तमाम सवालों में सिस्टम घिरा नजर आ रहा है। जांच टीम के अफसरों का कहना है कि लखनऊ में पहुंचकर ही जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

मिलावटी पेट्रोल मामले में आइजी आलोक सिंह ने अपर मुख्य सचिव गृह को रिपोर्ट भेजी थी। दूसरी रिपोर्ट डीएम और एसएसपी की संयुक्त गई थी। दोनों रिपोर्ट के बाद प्रमुख सचिव गृह की तरफ से शासन स्तर पर एसआइटी का गठन किया गया। इसमें एडीजी इंटेलीजेंस बीएस शिरोडकर, फूड कमिश्नर मनीष चौहान और आइजी एसटीएफ अमिताभ यश को रखा गया है। सोमवार को तीनों अफसर लखनऊ से मेरठ पहुंचे। मंगलवार को पूरी तरह से जांच प्रारंभ की गई। मुकदमे के वादी पूर्ति निरीक्षकों के बयान दर्ज किए। साथ ही पुलिस के विवेचकों से भी बातचीत की। कप्तान की तरफ से गठित एसआइटी से भी टीम ने प्रत्येक पहलू पर चर्चा की। इसके बाद जिला पूर्ति विभाग के सभी कर्मचारियों और अफसरों से बातचीत हुई। पारस केमिकल्स और गणपति पैट्रोकेम के रजिस्टर भी देखे गए, जिन पर पूर्ति विभाग के अफसरों के हस्ताक्षर थे। सभी से क्रास सवाल भी किए गए। इसके बाद टीम ने छापा मारने वाली टीम से भी बातचीत की। सूत्रों की मानें तो दिनभर की जांच के बाद टीम के सामने आया कि मिलावटी पेट्रोल प्रकरण में पूरा सिस्टम ही लापरवाह था।

साल्वेंट के बेचने की अनुमति कैसे दी गई?

टीम के सामने 11 आरोपितों को भी पुलिस ने पेश किया। सभी ने अपना पक्ष रखते हुए पुलिस पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि उनके पास कोई मिलावटी पेट्रोल नहीं मिला। सिर्फ साल्वेंट की बिक्री की जा रही थी। साल्वेंट ही पुलिस ने पकड़ा था। साथ ही पेट्रोल पंप से लिए नमूने में भी कुछ नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने तर्क दिया कि साल्वेंट बेचने की अनुमति कारोबारियों को किस आधार पर दी गई थी। साल्वेंट ऐसा केमिकल है, जो कैंसर को बढ़ावा देता है। इसे बेचने के लिए काफी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन पूर्ति विभाग ने कोई कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी करने की कोशिश तक नहीं की। नतीजा, साल्वेंट और मिलावटी पेट्रोल बिकता रहा।

प्रोटोकॉल में रहे अफसर : शासन की एसआइटी टीम के प्रोटोकॉल में अफसर सुबह से ही पीएसी छह वाहिनी में मौजूद रहे। डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी अजय कुमार साहनी, एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह जांच के अंतिम समय तक पीएसी में रहे। सभी अफसरों ने जांच में टीम का पूर्णतय सहयोग किया। पुलिस की मदद से ही सभी आरोपितों को बयान के लिए टीम के सामने लाया गया था।

सभी ने दिए अलग-अलग तर्क

आरोपित पक्ष का कहना है कि उन्होंने मिलावटी पेट्रोल की कोई बिक्री नहीं की। सिर्फ साल्वेंट की बिक्री और खरीदारी के कागजात पेश किए, जबकि पुलिस की विवेचना में मिलावटी पेट्रोल की बिक्री दूसरे राज्यों तक करने की बात कही गई है। पूर्ति विभाग के अफसरों से पूछा गया कि उनके निरीक्षण में मिलावटी पेट्रोल की जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। साथ ही टीपीनगर और परतापुर थाना प्रभारियों की भूमिका पर संदेह करने का कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है।

तेल कारोबारियों से पुलिस और प्रशासन के जुड़ाव पर भी हुई जांच

शासन की एसआइटी टीम की जांच में पुलिस और प्रशासन के कुछ अफसर भी फंस सकते हैं। तेल कारोबारियों से किस-किस पुलिस और प्रशासनिक कर्मचारी या अफसर का जुड़ाव था। इसकी पड़ताल भी गोपनीय टीम ने की है। आरोपित पक्ष से भी अफसरों के बारे में बातचीत की गई है। माना जा रहा है कि पूर्ति विभाग के अफसर इस जांच में फंस सकते हैं। सभी से बंद कमरे में टीम ने अलग-अलग बातचीत की।

यह है तेल के खेल का मामला :

20 अगस्त को आइजी आलोक सिंह के आदेश पर वेदव्यासपुरी में पारस केमिकल और देवपुरम में गणपति पेट्रोकैम पर छापा मारा गया था। पारस केमिकल से पुलिस ने चार और गणपति पेट्रोकैम से छह आरोपित गिरफ्तार किए थे। उनके कब्जे से 2.20 लाख लीटर नकली पेट्रोल बरामद किया। तीन किलो रंग और एक कैंटर भी पकड़ा गया। परतापुर थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद एक अन्य आरोपित को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपित राजीव जैन पुत्र श्रीपाल जैन निवासी महावीर नगर टीपीनगर के दो पेट्रोल पंप से नमूने भरकर फॉरेंसिक लैब को भेजे गए थे, जिनमें अभी तक कोई मिलावट की पुष्टि नहीं हो पाई थी। हाल में सभी आरोपितों को जमानत मिल चुकी है।

इन्होंने कहा

शासन की एसआइटी जांच पूरी करने के बाद शाम चार बजे लखनऊ के लिए रवाना हो गई। सभी विभाग के कर्मचारी और अफसरों से लेकर आरोपितों के बयान दर्ज किए। विवेचना से लेकर फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट तक देखी गई। जांच को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है।

अजय साहनी, एसएसपी।

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