सामान्य से ज्यादा पौष्टिक नहीं काला गेहूं

पश्चिम उत्तर प्रदेश में काले गेहूं में अधिक पौष्टिकता का दावा किया जाता है। इंटरनेट मीडिया पर भी इसे खूब प्रचारित किया जा रहा है जिसके चलते किसानों में इसके उत्पादन की होड़ लगी है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो काला गेहूं सिर्फ देखने में काला है इसमें पौष्टिकता सामान्य गेहूं से अधिक नहीं है।

JagranPublish:Thu, 02 Dec 2021 06:42 AM (IST) Updated:Thu, 02 Dec 2021 06:42 AM (IST)
सामान्य से ज्यादा पौष्टिक नहीं काला गेहूं
सामान्य से ज्यादा पौष्टिक नहीं काला गेहूं

मेरठ, जेएनएन। पश्चिम उत्तर प्रदेश में काले गेहूं में अधिक पौष्टिकता का दावा किया जाता है। इंटरनेट मीडिया पर भी इसे खूब प्रचारित किया जा रहा है, जिसके चलते किसानों में इसके उत्पादन की होड़ लगी है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो काला गेहूं सिर्फ देखने में काला है, इसमें पौष्टिकता सामान्य गेहूं से अधिक नहीं है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक भी किसानों में फैले इस भ्रम को तोड़ने में लगे हैं।

दिसंबर और जनवरी में गेहूं बुवाई होती है। काले गेहूं में ज्यादा पौष्टिकता के दावे से प्रभावित होकर तमाम किसान तीन से चार गुना अधिक कीमत पर इसका बीज खरीद रहे हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ाने की बात कही जा रही है। सामान्य गेहूं बाजार में 1600 से 1800 रुपये प्रति कुंतल है जबकि काला गेहूं छह-सात हजार रुपये प्रति कुंतल तक बिक रहा है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डा. आरएस सेंगर के अनुसार, गेहूं अनुसंधान निदेशालय करनाल के वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि देश में काले गेहूं की कोई किस्म जारी नहीं हुई है। जिस काले गेहूं का उत्पादन किसान कर रहे हैं, वह पीली भूरी रोली के साथ कई बीमारियों का वाहक है। इसकी चपाती भी बेस्वाद रहती है। ऐसे में किसानों को इस प्रजाति के उत्पादन से बचना चाहिए। आगे चलकर इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। शोध में भी स्थापित

प्रो. सेंगर के मुताबिक, काले गेहूं की सच्चाई जानने के लिए गेहूं अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने शोध किया है। इसमें पाया गया कि काले गेहूं में कोई अतिरिक्त पौष्टिक गुण नहीं होता। इसमें प्रोटीन, आयरन, जिक सहित अन्य पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य गेहूं की तुलना में कम पाई गई है। इसका उत्पादन भी सामान्य गेहूं से कम है।