Black fungus News: बरतें पूरी सावधानी, भवन निर्माण साइटों से भी फैल सकता है ब्लैक फंगस, जानें-मेरठ के विशेषज्ञों की राय

यह चिंता की बात है कि मेरठ में भी ब्‍लैक फंगस के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर में ब्लैक फंगस-म्यूकरमाइकोसिस के मरीज मिल रहे हैं। आइसीयू में लंबे समय तक भर्ती रहने स्टेरायड लेने और आक्सीजन पाइपलाइन की गंदगी से फंगस पकड़ रहा हैविशेषज्ञों ने संक्रमण के कई माध्यमों के प्रति भी सावधान किया है।

Prem Dutt BhattTue, 18 May 2021 09:40 AM (IST)

संतोष शुक्ल, मेरठ। ब्लैक फंगस हमारे बीच ही रहता है लेकिन सेहतमंद मनुष्य को संक्रमित नहीं करता। अब कोरोना ने फंगस को नए सिरे से उकसा दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से उबरे मरीजों को कंस्ट्रक्शन साइटों और खेतों में नहीं जाना चाहिए। घर की छतों व बालकनी में रखे गमलों, जूतों, फ्रिज व कटे फलों से भी दूर रहना जरूरी है। प्रतिरोधक क्षमता कम होने से फंगस समेत अन्य संक्रमण पकड़ सकता है। जरूरी हो तो एन-95 मास्क लगाकर ही धूल वाले स्थानों पर जाना चाहिए।

इम्युनिटी सेल पड़ रहे कमजोर

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देशभर में ब्लैक फंगस-म्यूकरमाइकोसिस के मरीज मिल रहे हैं। आइसीयू में लंबे समय तक भर्ती रहने, स्टेरायड लेने और आक्सीजन पाइपलाइन की गंदगी से फंगस पकड़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने संक्रमण के कई अन्य माध्यमों के प्रति भी सावधान किया है। डाक्टरों के मुताबिक धूल मिट्टी में रहने वाला फंगस पहली बार आर्गन ट्रांसप्लांट के मरीजों व आइसीयू में भर्ती एचआइवी के मरीजों में देखा गया था। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में यह संक्रमण फिर लौट आया है। मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई, ज्यादातर की ब्लड जांच में लिम्फोसाइट कम मिला। इस वजह से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सीडी-4 और सीडी-8 सेल भी कमजोर पड़े, और सेकंडरी इंन्फेक्शन ने पकडऩा शुरू कर दिया।

फेफड़े में भी जा सकता है फंगस

मेडिकल कालेज के फिजिशयन डा. अरविंद बताते हैं कि ब्लैक फंगस ज्यादातर आंख, दिमाग और चेहरे पर असर करता है। एक तरफ का चेहरा सूज जाता है या उसका रंग बदल सकता है। इसे राइनोआॢबटल सेरेबल म्यूकर कहते हैं। यह फेफड़े में पहुंचकर पल्मोनरी म्यूकरमाइकोसिस बनाता है। छाती में दर्द, खांसी में खून व सांस फूलने के लक्षण मिल सकते हैं।

ये हैं ब्लैक फंगस के लक्षण

- आंख में सूजन

- सुन्नपन, सिर दर्द

- एक तरफ चेहरे का काला पडऩा

- स्किन का रंग बदलना

- नाक से हरा व भूरा डिस्चार्ज

- नाक में दर्द व चेहरे पर घाव

ये बरतें सावधानी

- कोरोना से ठीक हुए मरीज खेतों में न जाएं, धूल से बचें

- नम दीवार और सीलन से दूर रहें, शुगर नियंत्रित रखें

विशेषज्ञ बता रहे ये बचाव

कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों को स्टेरायड न दिया जाए। गंभीर स्थिति में स्टेरायड देना जरूरी हो तो शुगर नियंत्रित रखें। ठीक होकर घर पहुंचे मरीजों की इम्युनिटी कम होती है। वो गमलों, खेत, मिट्टी, खाद, कटे फल एवं नम दीवारों से दूर रहें। अस्पतालों को एयर सैंपलिंग कराना चाहिए। कल्चर, बायोप्सी व स्कैन से फंगस की जांच की जाती है।

- डा. सुनील जिंदल, सीनियर एंड्रोलाजिस्ट

ब्लैक फंगस के मरीज अभी बढ़ेंगे। स्टेरायड व शुगर सबसे बड़ी वजह है। होम आइसोलेशन में आक्सीजन लेने वाले कई बार पाइप को साफ नहीं करते हैं, जिससे फंगस का खतरा है। ये नाक, साइनस, नर्वस सिस्टम, आंत, सिर व चेहरे पर ज्यादा असर करता है। सटीक समय पर रोग का पता चलने, दवा देने व जरूरत पडऩे पर तत्काल आपरेशन से ही मरीज बचाया जा सकता है। यह खतरनाक बीमारी है।

- डा. सुभाष यादव, सीनियर यूरोलाजिस्ट

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.