भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत का बड़ा बयान, समर्थन मूल्य महंगाई को कवर नहीं करता

केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से किसान संगठन नाखुश हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा कि एमएसपी में यह बढ़ोतरी महंगाई को कवर नहीं करती। न्यूनतम समर्थन मूल्य को बनाया जाए कानून।

Taruna TayalThu, 10 Jun 2021 09:45 PM (IST)
न्यूनतम समर्थन मूल्य को बनाया जाए कानून।

मुजफ्फरनगर, जेएनएन। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से किसान संगठन नाखुश हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने इसे नाकाफी बताते हुए कहा कि एमएसपी में यह बढ़ोतरी महंगाई को कवर नहीं करती। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाने की मांग की।

भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि भारत सरकार ने फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया है। कुछ फसलों जैसे मक्का में 20 रुपये धान में 72 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है, जो समर्थन मूल्य का सबसे बड़ा मजाक है। दलहन व तिलहन की जिन फसलों में ज्यादा वृद्धि की गई है, वह भी महंगाई को कवर नहीं करती है। दालों की अगर बात करें तो किसान को इनका समर्थन मूल्य मिलता ही नहीं, तो घोषित करने से क्या मतलब निकलता है। किसानों की फसल मंडी में लुट रही है। देश के किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाया जाए। इसके लिए किसान सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। हाल में लाए गए तीनों कृषि कानूनों को रद कर किसानों के आंदोलन को समाप्त कर उनकी उन्नति के लिए कार्य करें।

भाकियू (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर ने कहा कि जो सरकार ने आज धान के मूल्य घोषित किए हैं, उससे किसान खुश नहीं हैं। अगर सरकार चाहती है कि किसान खुश रहे, तो सरकार को कम से कम धान का मूल्य तीन हजार रुपये प्रति कुंतल घोषित करना चाहिए। आए दिन बिजली, डीजल, खाद, रसायन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, उन पर रोक लगाई जाए। किसानों को बिजली व ट््यूबवेल कनेक्शन निश्शुल्क दिए जाएं। किसान का गेहूं अभी भी मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बिक रहा है। अगर हमें अपना देश खुशहाल बनाना है तो सरकार को किसान हित में कार्य करना होगा। 

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