BJP से राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा बोले- सभी मुस्लिम कारीगर भगवान विश्वकर्मा के वंशज

जांगड़ा ने कहा कि बाबर मूर्तिकार के साथ भारत नहीं आया था। इराक ईरान और अमीरात में केवल रेत के टीले हैं इसलिए यह शिल्प वहां मौजूद नहीं हो सकता। इसी कारण सभी मुस्लिम मूर्तिकार भगवान विश्वकर्मा के वंशज हैं।

Dharmendra PandeyMon, 02 Aug 2021 05:41 PM (IST)
हरियाणा से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा

मुजफ्फरनगर, जेएनएन। हरियाणा से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा का कहना है कि हर शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का वंशज है। भाजपा नेता रविवार को मुजफ्फरनगर में थे और अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने तर्क भी दिया। जांगड़ा ने कहा कि बाबर मूर्तिकार के साथ भारत नहीं आया था। इराक, ईरान और अमीरात में केवल रेत के टीले हैं इसलिए यह शिल्प वहां मौजूद नहीं हो सकता। इसी कारण सभी मुस्लिम मूर्तिकार भगवान विश्वकर्मा के वंशज हैं।

मुजफ्फरनगर में भाजपा के राज्यसभा सदस्य एवं हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि जो भी संसार में शिल्पकार्य करता है वह भगवान विश्वकर्मा का वंशज है। इसमे केवल हिंदू नहीं, उत्तर प्रदेश के हमारे मुसलमान भाई जो कि शिल्पकारी का काम करते हैं, वह भी भगवान विश्वकर्मा के वंशज हैं। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ही उत्तर प्रदेश में कोई बाहर से अपने साथ शिल्पकार लेकर नहीं आया था। अगर हम गल्फ देशों की बात करें तो वहां शिल्पकार हो ही नहीं सकता। इराक ईरान की धरती पर पूरे यूएई में पूरे रेत के टीले हैं, वहां घास तक पैदा नहीं होती फिर शिल्प कला कैसे पैदा होगी। उन्होंने कहा कि वृक्ष या पहाड़ वहां नहीं है कि पत्थर से शिल्पकार पैदा हो। वहां पर न खनिज है, न लोहा, न तांबा, न चांदी और न सोना। वहां गहराई पर जाओ तो तेल निकलता है, तेल से तो शिल्पकला नहीं है। इसी कारण से मैं कहा रहा हूं कि शिल्प कला से जुड़े सारे मुस्लिम भाई सारे के सारे भगवान विश्वकर्मा के वंशज हैं।

उन्होंने कहा कि उस समय कोई कारण रहा होगा जो इनको धर्म परिवर्तन करना पड़ा। कारणों का भी मुझे अच्छी तरह से पता है मैंने इतिहास पढ़ा हैं, कुछ बातें ऐसे होती है जो मंच से कहने के लिए नहीं होती लेकिन इतनी बात जरूर है कि जहां श्रम मेहनत और पुरषार्थ को सम्मान नहीं मिलता तो आदमी प्रतिक्रिया स्वरूप उस घर को छोड़ देता। यह केवल इस्लामिक शिल्पकारों ने नहीं किया यह बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने भी किया। उनको भी आखिरकार यह कहना पड़ा था कि मैं हिंदू पैदा जरूर हुआ हूं लेकिन हिंदू के तौर पर मरूंगा नहीं। उन्होंने कहा कि एक बैरिस्टर होते हुए और अर्थशास्त्री होते हुए जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला और शायद यही मुसलमान शिल्पकारों के साथ रहा होगा कि समाज में उनको सम्मान नहीं मिला और उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया। उन्होंने कहा कि अब तो विश्वकर्मा समाज एकजुट होकर अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाए। श्रमिकों और श्रम के सम्मान से भारत आत्मनिर्भर बनेगा। 

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