अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर फैसला सुनाने वाले हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस धर्मवीर शर्मा का निधन

श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर फैसला सुनाने वाली इलाहाबाद हाईकोर्ट पीठ में शामिल जस्टिस डीवी शर्मा का निधन हो गया है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ की ओर से सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले में शामिल रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा शुक्रवार को निधन हो गया। शुक्रवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई थी।

Umesh TiwariFri, 07 May 2021 11:04 PM (IST)

बुलंदशहर, जेएनएन। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ की ओर से सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले में शामिल रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा शुक्रवार को निधन हो गया। बुलंदशहर में दानपुर नगर के हवेली परिवार में जन्मे धर्मवीर शर्मा के निधन की दुखद खबर मिलने के बाद उनके गांव और समाज में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके निधन पर शोक संवेदनाएं प्रकट की।

74 वर्षीय सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा वर्तमान में नोएडा के सेक्टर 12 में रहते थे। उनके परिवारीजन अंकित गौतम ने बताया कि गुरुवार रात वह पूर्ण स्वस्थ थे। शुक्रवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नोएडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया। दोपहर में उन्होंने अंतिम सांस ली। बुलंदशहर स्थित परिवार वालों के मुताबिक, गढ़मुक्तेश्वर में गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके भाई सत्यदेव गौतम और श्याम गौतम मौजूद रहे।

स्वयं बनाते थे अपना भोजन : सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा ने 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ में रहते हुए राम मंदिर विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। फैसला सुनाने के अगले दिन ही वह सेवानिवृत्त हो गए थे। अविवाहित रहे धर्मवीर शर्मा छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। गांव में उनका सदैव आना-जाना रहता था। सादा जीवन-उच्च विचार के सिद्धांत में विश्वास रखते थे। उनकी सादगी का बड़ा प्रमाण यह भी है कि इतने बड़े और सम्मानित पद पर रहने के बावजूद वह अपना भोजन स्वयं बनाते थे।

अयोध्या विवाद में पीठ के दो जजों से अलग थी राय : अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर फैसला सुनाने वाली इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ में शामिल जस्टिस डीवी शर्मा की राय बाकी दो न्यायाधीशों जस्टिस एसयू खान और सुधीर अग्रवाल से अलग थी। जस्टिस एसयू खान और सुधीर अग्रवाल का कहना था कि विवादित परिसर की जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा और इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड निर्मोही अखाड़ा एवं रामलला पर दावा जताने वाले हिंदू समुदाय को दिया जाएगा जहां अस्थाई तौर पर रामलला विराजमान हैं। इसमें जस्टिस डीवी शर्मा ने अपनी अलग राय देते हुए कहा था कि विवादित परिसर भगवान राम की जन्म स्थली है। इस स्थल पर मुगल शासक बाबर ने मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया था। परिसर में स्थित मस्जिद के परीक्षा के बाद यह बात साफ हो जाती है इसलिए पूरा विवादित परिसर हिंदुओं को दिया जाए।

 

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