उफ! इतनी मिलावट.. भगवान आपकी रक्षा करे

त्योहारी सीजन में नहीं बारह महीने मिलावट का बाजार गरम है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एक आरटीआइ के जरिए हकीकत सामने आयी है। स्थिति चौंकाने वाली है। तेल घी दूध से लेकर बेकरी तक के खाद्य पदार्थो में मिलावट पायी गई है।

JagranWed, 20 Oct 2021 08:33 AM (IST)
उफ! इतनी मिलावट.. भगवान आपकी रक्षा करे

मेरठ, जेएनएन। त्योहारी सीजन में नहीं, बारह महीने मिलावट का बाजार गरम है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एक आरटीआइ के जरिए हकीकत सामने आयी है। स्थिति चौंकाने वाली है। तेल, घी, दूध से लेकर बेकरी तक के खाद्य पदार्थो में मिलावट पायी गई है।

आरटीआइ एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनोज चौधरी ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय से सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत एक अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2021 तक की जानकारी जुटाई है। जिसमें चौंकाने वाली स्थिति मिली है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में खाद्य तेल-रिफाइंड के 49 सैंपल लिए गए। जिनमें से जांच में 20 सैंपल फेल हो गए। करीब 40 फीसद सैंपल फेल हुए। जबकि वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से लेकर अगस्त तक पांच माह में 37 सैंपल लिए गए। जिनमें से जांच में 31 सैंपल फेल हो गए। अर्थात लगभग 80 फीसद रिफाइंड तेल के सैंपल मानक के अनुरूप नहीं पाए गए।

इसी तरह विभिन्न प्रकार की मिठाई के वर्ष 2020-21 में 26 सैंपल लिए गए। जिनमें से जांच में 20 सैंपल फेल हो गए। करीब 82 फीसद सैंपलों में मिलावट पायी गई। वहीं, वित्तीय वर्ष 2021-22 में मिठाई के 37 सैंपल लिए गए। जिनमें से जांच में 16 फेल हो गए। अर्थात 45 फीसद मिलावट पायी गई।

वित्तीय वर्ष 2020-21 में घी के 11 सैंपलों की जांच में तीन फेल रहे। जबकि 2021-22 में पांच माह में घी के16 सैंपलों की जांच में चार फेल रहे। घी के करीब 25 फीसद सैंपल फेल रहे। वहीं, दूध में भी मिलावट पायी गई। वर्ष 2020-21 में 140 सैंपलों में नौ फेल हुए। वर्ष 2021-22 में अप्रैल से अगस्त तक दूध के 57 सैंपलों में 21 फेल हुए। पिछले वर्ष की तुलना में दूध में वर्तमान वर्ष में मिलावट 40 फीसद तक पहुंच गई है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2020-21 में बेकरी के 15 सैंपल लिए गए। जिनमें से सात फेल हो गए। जबकि 2021-22 में बेकरी के 12 सैंपलों में से आठ फेल रहे। बेकरी के करीब 70 फीसद सैंपलों में मिलावट पायी गई। पांच माह में बढ़ा मिलावट का ग्राफ

मिलावटखोरी का आलम ये है कि पिछले साल पर वर्तमान वर्ष के पांच माह भारी पड़ गए। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 252 सैंपल विभिन्न खाद्य पदार्थों के लिए गए थे। जिनमें से कुल 45 सैंपल फेल हुए थे। करीब 20 फीसद मिलावट के मामले सामने आए थे। बात वित्तीय वर्ष 2021-22 की करें तो एक अप्रैल से 31 अगस्त तक विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 88 सैंपल लिए गए हैं। जिनमें से 73 सैंपल फेल हो गए हैं। अर्थात पिछले साल की तुलना में मिलावट का ग्राफ 80 फीसद पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने में महकमा नाकाम साबित हुआ है। 17 महीनों में दर्ज हुए 187 मुकदमे, निस्तारित हुए 125

आरटीआइ के जरिए यह भी जानकारी मिली है कि एक अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2021 तक कुल 17 महीनों में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से मिलावटखोरी पर 187 मुकदमे दर्ज किए गए। जिसके सापेक्ष 125 मुकदमों का निस्तारण हुआ है। मिठाई में 24, दूध में 35, बेकरी में पांच, रिफाइंड के 12 और अन्य खाद्य पदार्थो के 109 मुकदमे शामिल हैं। विभाग ने 17 माह में लगभग 23 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला है।

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