एसजीपीजी कॉलेज में 229 परीक्षार्थियों ने दी बीएड प्रवेश परीक्षा

एसजीपीजी कॉलेज में 229 परीक्षार्थियों ने दी बीएड प्रवेश परीक्षा

एसजीपीजी कॉलेज में रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा कड़ी निगरानी के बीच संपन्न हुई।

Publish Date:Mon, 10 Aug 2020 06:00 AM (IST) Author: Jagran

जेएनएन, मेरठ। एसजीपीजी कॉलेज में रविवार को बीएड प्रवेश परीक्षा कड़ी निगरानी के बीच संपन्न हुई। परीक्षा केंद्र में तीन सौ परीक्षार्थियों को शामिल होना था, लेकिन 71 ने परीक्षा छोड़ दी। कोरोना से बचाव को कॉलेज प्रबंधन ने शारीरिक दूरी के नियम को ध्यान में रखकर तीन सौ परीक्षाíथयों के लिए नौ कमरों में सीट लगवाई थी। कॉलेज गेट पर चेकिग के बाद ही परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया।

कॉलेज प्राचार्य डा. सविता तोमर ने बताया कि कॉलेज में कोरोना से बचाव को ध्यान में रखकर पहली बार बीएड प्रवेश परीक्षा सकुशल संपन्न हुई। पहले से ही कॉलेज प्रबंधन ने शारीरिक दूरी के नियम का पालन कर तीन सौ परीक्षार्थियों के लिए सीटों की व्यवस्था नौ कमरों में की थी। तीन सौ में से 229 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। कॉलेज के मुख्य गेट पर थर्मल स्केनिंग के बाद ही छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया गया। वहीं, कॉलेज के बाहर परीक्षार्थियों के अभिभावकों की भीड़ रही। बारिश के दौरान इधर-उधर छत तलाशते रहे।

सीसीटीवी की निगरानी में संपन्न हुई प्रवेश परीक्षा

जेएनएन, मेरठ। राजकीय महिला महाविद्यालय में बीएड प्रवेश परीक्षा सीसीटीवी की निगरानी में सकुशल संपन्न हुई। जिसमें 239 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी और 61 अनुपस्थित रहे।

कस्बे के राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डा. रेखा रानी तिवारी ने बताया कि परीक्षार्थियों की थर्मल स्कैनिंग कर सैनिटाइजेशन के बाद ही कॉलेज में प्रवेश दिया। इस दौरान परीक्षा केंद्र में भी शारीरिक दूरी का ध्यान रखकर सीटों की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी की निगरानी में दो पाली की परीक्षा सकुशल संपन्न हुई।

कॉलेज के आसपास जगह ना मिलने पर स्वजन खेतों में बैठे

राजकीय महिला महाविद्यालय में सहारनुपर, बागपत, शामली मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद के छात्र-छात्राओं ने भी परीक्षा दी। उन्होंने बताया कि काफी खोबजीन के बाद उन्हे कस्बे के जंगल में परीक्षा केन्द्र मिला। कच्चे रास्ते में बारिश के कारण हुई दलदल से निकलकर परीक्षा केन्द्र तक पहुंचे। उधर, जगह नहीं मिलने पर परीक्षार्थी के स्वजन खेतों में जमीन पर बैठे रहे।

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