मौत का मंजर देख कांप उठी राहगीरों की रूह

सड़क पर पड़े तड़पते रहे घायल एक घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस बिखरे पड़े थे शव कार में भी फंसे रहे

JagranSat, 04 Dec 2021 06:08 AM (IST)
मौत का मंजर देख कांप उठी राहगीरों की रूह

अभय गुप्ता, सुरीर: यमुना एक्सप्रेस वे पर शुक्रवार तड़के हुए हादसे में मौत का मंजर देख लोगों की रूह कांप गई। हादसे में बोलेरो कार के परखच्चे उड़ गए। कई शव सड़क पर पड़े रहे तो कुछ कार में फंसे थे। घायल भी सड़क पर तड़पते रहे। हादसा देख कई राहगीर तो बेहोश होते-होते बचे। घायल सड़क पर तड़पते रहे। करीब एक घंटे बाद एक एंबुलेंस पहुंची, तब घायलों को अस्पताल भेजा जा सका।

यमुना एक्सप्रेस वे पर शुक्रवार तड़के अगवा किशोरी की बरामदगी के लिए जा रही मध्य प्रदेश पुलिस की बोलेरो कार हादसे का शिकार हो गई। बोलेरो में चार कांस्टेबल समेत आठ लोग सवार थे। सुरीर क्षेत्र में तेहरा अंडरपास पुल के डिवाइडर में तेज रफ्तार बोलेरो टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो दो भागों में बंट गई। तेज धमाके जैसी आवाज को सुनकर सुबह टहलने निकले लोग चौंक गए। अनहोनी की आशंका पर एक्सप्रेस वे की ओर दौड़ पड़े। यहां हादसे का भयानक मंजर देख उनकी रूह कांप गई। प्रत्यक्षदर्शी स्थानीय निवासी ललित, मनोज व जितेंद्र ने बताया कि वह रोज की तरह शुक्रवार सुबह एक्सप्रेस वे की ओर टहलने गए। तेज आवाज सुनकर एक्सप्रेस वे पर चढ़े। यहां दो शव सड़क पर थे और दो बोलेरो में फंसे थे। घायल सड़क पर तड़प रहे थे। भाकियू लोकशक्ति के मंडल उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि संसाधन के अभाव में काफी देर तक एक्सप्रेस वे कर्मी मूकदर्शक बने रहे। करीब एक घंटे बाद जेपी ग्रुप की एक एंबुलेंस पहुंची, इसमें घायलों को अस्पताल भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंची। स्पीड और झपकी बढ़ा रही हादसों की रफ्तार

संवाद सूत्र, सुरीर : यमुना एक्सप्रेस वे पर घंटों का सफर मिनटों में निपटाने की जल्दबाजी हादसा करा रही है। हवा में फर्राटा भरते चालक खुद के साथ दूसरों का भी घर उजाड़ रहे हैं। सफर के दौरान भूल जाते हैं कि उनका कोई अपना बेसब्री से घर लौटने का इंतजार कर रहा है। असुरक्षित सफर अपनों को कभी न भरने वाला जख्म दे रहा है। यही वजह है कि एक्सप्रेस वे पर साल-दर-साल हादसों की संख्या बढ़ रही है।

यमुना एक्सप्रेस वे शुरू से हादसों के लिए बदनाम हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि हादसों की रोकथाम को प्रभावी कदम आखिर कब उठाए जाएंगे। संसाधनों की कमी व एक्सप्रेस-वे की व्यवस्था का सारा दोष प्रबंधन पर ही नहीं गढ़ा जा सकता। ऐसे हादसा टालने के लिए सफर कर रहे लोगों को भी समझदारी का परिचय देना होगा। एक्सप्रेस वे पर कार की स्पीड लिमिट सौ किलोमीटर प्रति घंटा है। हाई स्पीड लिमिट को कैमरा भले ही कैच कर ले, लेकिन हाईस्पीड को टोल से पहले रोका जाना एक्सप्रेस वे पर संभव नहीं है। ऐसे में एक्सप्रेस वे पर ड्राइव का मजा ले रहे लोगों का पैर एक्सलरेटर से हटता नहीं है। अगर कोई सामान्य स्पीड में चल भी रहा है, तो बराबर से तेज गति में निकलकर आंखों से ओझल हो जा रही कार उसे स्पीड बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। इसके अलावा गाड़ी चलाते समय झपकी हादसों का कारण बन रही है। सफर के दौरान कहीं कोई रुकावट न होने से अक्सर चालक को ड्राइविग के दौरान झपकी आ जा रही है। इससे अनियंत्रित होने पर गाड़ी डिवाइडर से टकरा कर हादसे का शिकार हो जाती है। एक्सप्रेस वे पर हादसे रात एक बजे से सुबह सात बजे के बीच ज्यादा हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि लगातार हो रहे हादसों के लिए ओवरस्पीड और झपकी अधिक जिम्मेदार है। राम भरोसे टोल की व्यवस्था, चाय का इंतजाम नहीं

मथुरा : यमुना एक्सप्रेस वे पर सुविधाओं का दावा किया जा रहा है, लेकिन व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। यहां पर हादसे के बाद राहत के इंतजाम नाकाफी हैं। हादसे रोकने के लिए टोल प्रबंधन द्वारा वाहन चालकों को मुफ्त चाय पिलाने की भी व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन मथुरा टोल में ये व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में लंबी दूरी के वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

यमुना एक्सप्रेस वे पर हादसा होने पर पुलिस और एक्सप्रेस वे कर्मी तत्काल नहीं पहुंच पाते हैं। जब तक पहुंचते हैं, बहुत देर हो चुकी होती है। इसके अलावा घायलों के उपचार के लिए नजदीक कोई अस्पताल नहीं है। इससे आगरा, मथुरा व नोएडा अस्पताल भेजते समय गंभीर रूप घायल कई बार उपचार के अभाव में रास्ते में दम तोड़ जाते हैं। मांट टोल के प्रभारी आरबी सिंह का कहना है कि कई बार हादसे की सूचना देरी से मिल पाती है। हमारी एंबुलेंस गश्त पर रहती है। ऐसे में पहुंचने में देर हो जाती है। टोल पर चाय पिलाने की इंतजाम जल्द ही शुरू किया जाएगा।

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