श्रीकृष्ण जन्मस्थान : ढाई रुपये के स्टांप पर हुआ था मंदिर-मस्जिद विवाद का समझौता

श्रीकृष्ण जन्मस्थान : ढाई रुपये के स्टांप पर हुआ था मंदिर-मस्जिद विवाद का समझौता
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 05:48 AM (IST) Author: Jagran

विनीत मिश्र, मथुरा : श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के विवाद को लेकर 136 साल तक चली मुकदमेबाजी का समझौता ढाई रुपये के स्टांप पेपर पर किया गया था। तत्कालीन डीएम व एसपी के सुझाव पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी ने दस प्रमुख बिदुओं पर समझौता किया था। जिस समझौते को अवैध करार देते हुए कोर्ट में दाखिल दावे में मस्जिद को हटाने की मांग की गई है, उस समझौते का विरोध भी सेवा संघ को पत्र लिखकर किया गया था।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच अब तक चले मुकदमों के दस्तावेजों को एक किताब के रूप में संजोया गया है। 'न्यायिक स्थिति श्रीकृष्ण जन्मस्थान' नामक इस पुस्तक में उस समझौते का भी जिक्र है। 10 अगस्त, 1968 को हुए समझौते के समय आरके गोयल जिलाधिकारी थे और गिरीश बिहारी पुलिस अधीक्षक। दोनों के सुझाव पर दोनों पक्षों के आपसी रजामंदी पर ये समझौता हुआ था। तब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर सह सचिव देवधर शर्मा, उनके सहयोगी फूलचंद गुप्ता ने किए थे। मामले में अधिवक्ता अब्दुल गफ्फार थे।

समझौते के बारे में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी की ओर से समझौते में शाहमर मलीह, डॉ. शाहबुद्दी साकिब, आबिदुल्ला खां, मोहम्मद आकूब आलूवाला के हस्ताक्षर थे, जबकि अधिवक्ता रज्जाक हुसैन थे।

समझौते के प्रमुख बिदु

-ईदगाह के ऊपर के चबूतरे की उत्तर व दक्षिण दीवारों को पूरब की ओर रेलवे लाइन तक बढ़ा लिया जाए। इन दोनों दीवारों का निर्माण मस्जिद कमेटी करेगी।

-दीवारों के बाहर उत्तर व दक्षिण की ओर मस्जिद कमेटी मुस्लिम आबादी से खाली कराएगी और भूमि संघ को देगी।

-दक्षिण की ओर जीने का मलबा 1 अक्टूबर 1968 तक मस्जिद कमेटी उठा लेगी।

-उत्तर-दक्षिण वाली दीवारों के बाहर मुस्लिम आबादी में जिन मकानों का बैनामा कमेटी ने अपने हक में कराया है, उसे संघ को सौंपेगी।

-ईदगाह के जो पनाले श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर हैं, उसे संघ अपने खर्चे से पाइप लगाकर ईदगाह की कच्ची कुर्सी की ओर मोड़ देगा।

-पश्चिम उत्तरी कोने में जो भूखंड संघ का है, उसमें कमेटी अपनी कच्ची कुर्सी को चौकोर कर लेगा। वह उसी की मिल्कियत मानी जाएगी।

-रेलवे लाइन के लिए जो भूमि संघ अधिगृहीत करा रहा है, जो भूमि ईदगाह के सामने दीवारों के भीतर आएगी, उसे संघ कमेटी को दे देगा।

-दोनों पक्षों की ओर से जो मुकदमे चल रहे हैं, उनमें समझौते की सभी शर्तें पूरी हो जाने पर दोनों पक्ष राजीनामा दाखिल कर देंगे। तब भी हुआ था विरोध

-समझौते के विरोध में विश्व हिदू परिषद के तत्कालीन जिलाध्यक्ष डॉ. रमनदास पंड्या और मूल प्राचीन पुनरोद्धार समिति के मंत्री चंद्रभानु ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ को पत्र लिख नाराजगी जताई थी। कहा था कि जिस धार्मिक स्थल का उत्थान हो रहा है, उसी के एक अंग को मुसलमानों के लिए हस्तांतरित किए जाने से दुखी हैं। उन्होंने पत्र में सेवा संघ के ट्रस्टियों से फैसले पर पुनर्विचार करने और धार्मिक स्थान का अंगभंग न करने का अनुरोध किया था।

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