लौटता मानसून कर रहा सरसों की बोवाई में देरी

40-50 हजार हेक्टेअर में होता है सरसों का उत्पादन

JagranMon, 27 Sep 2021 05:26 AM (IST)
लौटता मानसून कर रहा सरसों की बोवाई में देरी

जागरण संवाददाता, मथुरा: मानसून लौट रहा है। अभी बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं। बारिश होने की संभावना हैं। ऐसे में सरसों की बोवाई में देरी हो रही है। किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं। जिले में 40-50 हजार हेक्टेअर में सरसों का उत्पादन होता है।

विकास खंड चौमुहां, फरह, मथुरा, नौहझील और बलदेव में सर्वाधिक सरसों का उत्पादन होता है, जबकि छाता, नंदगांव, गोवर्धन, मांट और राया में आलू और गेहूं की बोवाई ज्यादा होती है। 40-50 हजार हेक्टेअर में सरसों की बोवाई इस बार होने की उम्मीद है। सरसों उत्पादकों का फिलहाल मौसम साथ नहीं दे रहा है। बोवाई का समय आरंभ हो गया है। 15 अक्टूबर तक बोवाई होगी। खेतों में अभी कहीं जलभराव है तो कहीं अधिक नमी है। बारिश का भी डर है। इसलिए किसान बोवाई नहीं कर रहे हैं। - 75 एकड़ में होगा प्रदर्शन:

किसानों के खेतों पर कृषि विज्ञान केंद्र भी सरसों के प्रदर्शन कराएगा। विशेषज्ञों ने इसकी तैयारी आरंभ कर ली है। आरएच-725 प्रजाति के प्रदर्शन को कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को निश्शुल्क बीज दिया जाएगा। पिछले साल इसी प्रजाति का प्रदर्शन कराया था। इसके बेहतर परिणाम सामने आए थे। - ऐसे करें बोवाई ::

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डा.एसके मिश्रा ने बताया कि पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें और दो बार जुताई हैरों या कल्टीवेटर से करके ऊपर से पाटा लगा दें। सिचित क्षेत्र में चार और असिचित क्षेत्र में पांच किलोग्राम की दर से प्रति हेक्टेयर में बीज का प्रयोग करें। अप्रमाणित बीज को 2.5 ग्राम थीरम से प्रति किलोग्राम की दर से शोधित करें। इससे फसल में रोग न आएगा। सिचित क्षेत्र में 120 किग्रा नाइट्रोजन, 60-60 किग्रा फास्फोरस व पोटाश, 40 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेअर का प्रयोग करें। असिचित क्षेत्र में 80 किग्रा नाइट्रोजन, 30-30 किग्रा फास्फोरस व पोटाश, 25 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेअर का प्रयोग करें। बोवाई का कार्य लाइन से लाइन में किया जाए। सल्फर न होने पर 200 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर की जिप्सम का प्रयोग करें।

- सरसों की बोवाई को उर्वरक और जिप्सम की कमी नहीं है। कृषि इकाई केंद्रों पर जिप्सम उपलब्ध करा दी गई है। उर्वरक बिक्री केंद्रों पर भी डीएपी, यूरिया और पोटाश पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

-अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी

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