पुरुषोत्तम मास की एकादशी पर बनी मानव श्रृंखला

पुरुषोत्तम मास की एकादशी पर बनी मानव श्रृंखला
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 05:50 AM (IST) Author: Jagran

संवाद सहयोगी, वृंदावन: पुरुषोत्तम मास की एकादशी पर पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग में भोर से ही मानव श्रृंखला बन गई। रातभर चली परिक्रमा में हजारों श्रद्धालुओं ने दंडवत परिक्रमा भी दी। मंदिरों के दर्शन न खुलने के बावजूद परिक्रमा मार्ग राधारानी के जय घोष से गूंजता रहा।

कोरोना की काली छाया में गुजर रहे पुरुषोत्तम मास के दौरान भक्तों को भगवान के दर्शन भले ही अब तक सुलभ न हुए हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। मंदिरों के बाहर ही माथा टेक अपने ईष्ट से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। शाम ढलते ही परिक्रमा में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। सिर्फ दोपहर में धूप चढ़ने पर कुछ समय के लिए परिक्रमा थमी हुई देखने को मिलती है। पुरुषोत्तम मास की एकादशी होने के कारण रविवार को भोर से ही ढोल, मृदंग और मंजीरा लिए भक्तों की टोलियां भगवान के भजनों का गायन करते हुए परिक्रमा करते हुई देखी गई। पंचकोसीय परिक्रमा में दंडवती परिक्रमा करने वालों की संख्या में भी प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। हालांकि परिक्रमा में दौड़ते वाहन दंडवत परिक्रमा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए खतरा बने हैं। - गड्ढों व गंदगी ने बढ़ाई मुश्किल-

परिक्रमा में कदम-कदम पर गड्ढे और उखड़ी सड़क से नंगे पैर परिक्रमा कर रहे श्रद्धालुओं को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जुगलघाट से लेकर केशीघाट तक परिक्रमा मार्ग में गंदगी के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाई हो रही है। रात में मच्छरों का प्रकोप लोगों की दिक्कत बढ़ा रहा है।

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आस्था व श्रद्धा के समुंदर में दिव्यांग लगा रहे गोते

महावन: इसे हिम्मत और आस्था ही कहेंगे कि पैर से लाचार होने के बावजूद दो बुजुर्ग बृज चौरासी कोस परिक्रमा दे रहे हैं। हरियाणा के जिला फरीदाबाद के गांव नगला धीगर निवासी साठ वर्षीय शंकरलाल एक पैर से दिव्यांग हैं। इसलिए वह लाठी का सहारा लेकर ही चलते हैं। इन्होंने हरियाणा के बंचारी से बुधवार को परिक्रमा शुरू की है। ईश्वर में अटूट आस्था रखने वाले शंकरलाल इन दिनों बृज चौरासी कोस की परिक्रमा दे रहे हैं। उनका कहना है कि डगर थोड़ी कठिन हैं, लेकिन इरादे हमारे मजबूत हैं। इसी तरह गांव खांडा बरहन आगरा निवासी दिव्यांग सोमवीर सिंह भी चौरासी कोस की परिक्रमा दे रहे है। एक पैर खराब होने से वह लाठी के सहारे चलते हैं। सोमवीर ने बताया कि रविवार को दाऊजी मंदिर में दर्शन कर परिक्रमा शुरू की है।

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