बीमारी को लेकर गांव की निगरानी समिति बेफिक्र

डेंगू और बुखार के कहर से गांव-गांव कराह रहे हैं। कई की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग बीमार हैं। शासन ने निगरानी समितियों को बीमार लोगों की पूरी जानकारी जुटाकर विभागीय कंट्रोल रूप को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन ये समितियां पूरी तरह से बेफिक्र हैं। गांवों की स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा है। अब सीडीओ ने इसे लापरवाही मान सभी को सक्रियता बरतने की चेतावनी दी है।

JagranThu, 23 Sep 2021 04:00 AM (IST)
बीमारी को लेकर गांव की निगरानी समिति बेफिक्र

जासं, मैनपुरी: डेंगू और बुखार के कहर से गांव-गांव कराह रहे हैं। कई की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग बीमार हैं। शासन ने निगरानी समितियों को बीमार लोगों की पूरी जानकारी जुटाकर विभागीय कंट्रोल रूप को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन ये समितियां पूरी तरह से बेफिक्र हैं। गांवों की स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा है। अब सीडीओ ने इसे लापरवाही मान सभी को सक्रियता बरतने की चेतावनी दी है।

कोरोना संक्रमण के दौरान गांवों की स्थिति की टोह लेने के लिए शासन ने निगरानी समितियों का गठन किया था। इन समितियों में ग्राम प्रधान, आशा, एएनएम के साथ सभ्रांत लोगों को शामिल किया गया था। अब संक्रामक बीमारियों के संक्रमण को देखते हुए दोबारा इन्हीं समितियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन समितियां पूरी तरह से बेफिक्र हैं। गांवों में कहां गंदगी है और कितने लोग बुखार की चपेट में हैं, इसके बारे में स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। इसे बड़ी लापरवाही मानते हुए अब सीडीओ विनोद कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निगरानी समितियां अपने संबंधित गांवों की स्थिति की जानकारी करें। यदि गंदगी है तो उसकी भी सूचना दें, ताकि समय पर प्रबंध कराए जा सकें। बुखार से संबंधित मरीजों के बारे में भी सही सूचना दी जाए। ये भी शामिल किए समितियों में

शहर में सभासद और गांवों में ग्राम प्रधान के अलावा सचिव, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, प्रधानाध्यापक, शिक्षक के अलावा शिक्षित युवक-युवतियां और सभ्रांत लोगों को मिलाकर कुल 12 लोगों की समिति बनाई गई है। ये जुटानी है जानकारी

- गांव या कालोनी में बुखार या अन्य बीमारियों के बारे में जानकारी कर उसका सर्विलांस करना।

- यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा कंट्रोल रूम पर सूचना देना।

- गांवों में गंदगी का निस्तारण, दवा का छिड़काव और बाहर से आने वालों की जानकारी करना।

- संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्तर पर स्वयं पहल करना।

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