धरती के हरित श्रृंगार के लिए बागवां की दरकार

पिछले साल रिकार्ड बनाने को जिले में 27.39 लाख पौधे रोपे गए थे। सुरक्षा के इंतजाम नहीं किये गए जिसके कारण अब एक चौथाई पौधे बचे हैं।

JagranThu, 17 Jun 2021 05:22 AM (IST)
धरती के हरित श्रृंगार के लिए बागवां की दरकार

जासं, मैनपुरी: धरती का हरित श्रृंगार करने को खूब पौधे रोपे गए। रिकार्ड बना, लेकिन बागवां की अनदेखी से धरा की कोख बांझ ही रह गई। कहीं इनकी देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभाई गई तो कहीं सुरक्षा के अभाव में पौधों को पशुओं ने पैरों तले रौंद डाला। पौधे लक्ष्य से अधिक लगे, लेकिन उनमें से तमाम सूख गए। कहीं पानी न मिलने से पौधों ने दम तोड़ दिया।

बीते साल 27.39 लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य शासन ने दिया था। सात जुलाई को जिले में पौधारोपण कर रिकार्ड कायम किया गया था। उत्साह इस कदर था कि लक्ष्य से अधिक पौधे रोप दिए। मंत्री से लेकर अधिकारी तक पौधे रोपने में जुटे थे। शाम होने तक पौधारोपण का काम लक्ष्य से कई हजार पौधे आगे निकल गया। सबसे अधिक अचलपुर गांव में पौधे लगाए गए। जिला जेल के पास 500 में से बचे सिर्फ दर्जन भर पौधे

प्रदेश के आबकारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री और अफसरों ने बीते साल भोगांव रोड स्थित जिला जेल के पास सहकारिता विभाग की जमीन पर 500 पौधे रोपे थे। पौधारोपण के एक-दो दिन बाद ही मंत्री के पौधे का तना टूट गया। मामला सुर्खियों में आया तो दूसरा पौधा लगाया गया। अब इस स्थल पर लगाए गए पौधों की सुरक्षा नहीं किए जाने से मात्र गिनती लायक ही पौधे बचे हैं। किसी का तना गायब है तो कोई जड़ से ही टूट चुका है। तमाम पौधे सूख गए हैं। भगवान भरोसे पौधों की सुरक्षा

वन विभाग ने जहां पौधे लगवाए, उनकी कटीले तारों से या खाई खोदकर सुरक्षा की व्यवस्था की थी। इसके बाद भी जानवर पौधों को खराब कर दिया। दैनिक मजदूरी पर विभाग देखभाल भी कराता है, इसके बाद भी पौधे जिदा नहीं रह पाते, यह वजह समझ नहीं आ रही है। अपील

प्रकृति के संरक्षण के लिए सभी को योगदान निभाना होगा। पौधारोपण के बाद उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा। पर्यावरण का संरक्षण सभी के सहयोग और प्रयास ही संभव है, इसलिए पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल भी करनी चाहिए।

घनश्याम दास गुप्ता, उद्योगपति कोरोना संक्रमण के दौर में पेड़ों की महत्ता का आभास हुआ। आक्सीजन की कमी से कम हो रही हरियाली को बढ़ाने चिता की गई। उम्मीद है कि इस बार पौधे लगाकर उनके संरक्षण का भी काम बेहतर तरीके से होगा।

राकेश गुप्ता, शिक्षाविद्

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