जिपं अध्यक्ष पद की टिकट को बिछने लगी बिसात

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा होते ही टिकट पाने को घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी में दिग्गजों के बीच रस्साकशी चल रही है। भाजपा में भी दो दावेदार टिकट के लिए प्रबल दावेदार की है।

JagranThu, 17 Jun 2021 04:00 AM (IST)
जिपं अध्यक्ष पद की टिकट को बिछने लगी बिसात

जागरण संवाददाता, मैनपुरी: जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा होते ही टिकट पाने को घमासान छिड़ गया है। सदस्यों की संख्या के मामले में सपा सबसे आगे है, ऐसे में टिकट पाने की मारामारी भी इसी दल में ज्यादा है। पार्टी के कई दिग्गज इसके लिए ताकत झोंक रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा भी प्रत्याशी तय करने को मंथन में जुटी हुई है। भाजपा में दो दावेदारों की प्रबल दावेदारी मानी जा रही है। हालांकि प्रत्याशी तय करने के बाद भी जीत हासिल करने के लिए निर्दलीयों को अपने पाले में लाने के लिए दोनों दलों को मशक्कत करनी होगी।

जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की हलचल तेज हो गई है। चुनाव प्रक्रिया के तहत 26 जून को नामांकन होना है। जिला पंचायत में सदस्यों के मामले में फिलहाल सपा का पलड़ा भारी है। कुल 30 सदस्यों वाली जिला पंचायत में सपा ने 13 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि भाजपा के खाते में आठ सीटें आई हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने एक और निर्दलीय ने आठ सीटें हासिल की हैं। हालांकि निर्दलीय में सपा के बागियों की संख्या अधिक है। सपा के रणनीतिकार इन सदस्यों को भी अपने पाले में मानकर चल रहे हैं। इसी के हिसाब से जीत का गणित तैयार किया जा रहा है। परंतु अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का नाम तय करने को लेकर पेच फंस गया है। तीन दिग्गज खुद या अपने स्वजन को टिकट दिलाने को दम लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी में दिग्गजों के गुट एक-दूसरे के प्रत्याशी के समर्थन में बेरुखी दिखा रहे हैं। ऐसे में पार्टी प्रत्याशी का नाम घोषित करने से पहले सबको एक नाम पर सहमत करने की कसरत में जुटी हुई है। विकल्प के तौर पर दो अन्य सदस्यों के नामों को भी दावेदारों की सूची में शामिल कर लिया गया है। माना जा रहा है जल्द ही सपा प्रत्याशी का नाम घोषित हो सकता है।

दूसरी तरफ भाजपा, इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर इतिहास रचने की कोशिश में जुटी है। जिला पंचायत पर लंबे समय से सपा का ही कब्जा रहा है। बीते चुनाव में भी मुलायम सिंह की भतीजी संध्या यादव सपा के टिकट पर ही अध्यक्ष बनी थीं। इस बार संध्या यादव ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, परंतु जीत हासिल नहीं कर सकीं। भाजपा अपने आठ सदस्यों के साथ निर्दलियों एवं अन्य में सेंधमारी के सहारे जीत का तानाबाना बुन रही है। हालांकि अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का नाम अभी फाइनल नहीं हो सका है। भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि दो नामों पर विचार हो रहा है, जल्द ही प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा।

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