इंदौर ने त्यागी पालीथिन, शहर से दूर किया जहर

मेरा शहर इंदौर क्यों नहीं जिले में प्रतिबंध के बावजूद बेखौफ हो रहा पालीथिन का इस्तेमाल लोगों ने न बदली सोच जिम्मेदार भी कार्रवाई पर साधे रहे चुप्पी

JagranThu, 25 Nov 2021 06:25 AM (IST)
इंदौर ने त्यागी पालीथिन, शहर से दूर किया जहर

जासं, मैनपुरी: इंदौर की सफाई व्यवस्था की चर्चा पर वाह तो हर कोई कहता है, लेकिन उसके पीछे शहरवासियों की मेहनत और कार्यदायी संस्थाओं की जिम्मेदारी पर अमल कोई नहीं करना चाहता। असल में इंदौर शहर की खूबसूरती की एक बड़ी वजह पालीथिन से दूरी भी रही है। लोग इतने जागरूक हैं कि सामान लेने घर से थैला साथ लेकर जाते हैं। दुकानदार भी कागज के थैले ही लोगों को देते हैं। यदि पालीथिन का इस्तेमाल करते भी हैं तो प्रयोग करने के बाद उसे डस्टबिन में फेंक दिया जाता है, लेकिन मैनपुरी शहर पालीथिन प्रतिबंधित होने के बावजूद बेखौफ उसका इस्तेमाल कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा पालीथिन के इस्तेमाल को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस पाबंदी को सख्ती से लागू कराने में जिले के अफसर भी फेल हो रहे हैं। पालिका प्रशासन तो इस कदर सुस्त है कि आज तक पालीथिन को लेकर कोई बड़ा अभियान चलाया ही नहीं। छोटे दुकानदारों के चालान कर औपचारिकता कर ली गई, लेकिन स्टाकिस्ट के यहां छापेमारी से हमेशा कतराते रहे।

शहर में किसी भी सड़क पर निकलें, पालीथिन से सामना हो ही जाएगा। सबसे ज्यादा पालीथिन कचहरी रोड पर बस स्टैंड के आसपास, स्टेशन रोड, क्रिश्चियन तिराहा, देवी रोड, बजाजा बाजार से निकलती है। आटो पा‌र्ट्स की दुकानों के अलावा फास्ट फूड विक्रेता, कपड़ा कारोबारी आदि दुकानदारों द्वारा पालीथिन को सड़कों के अलावा नालों और नालियों में फेंक दिया जाता है। इससे जलनिकासी बाधित होती है और जलभराव होता है।

शिक्षित ही करते अनदेखी

शहर के शिक्षित वर्ग द्वारा ही पालीथिन का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो बार-बार टोकने के बावजूद थैला लेकर नहीं निकलते। दुकानदार भी बेखौफ होकर पालीथिन में सामान थमाते हैं। स्कूल और कालेजों के द्वारा भी जागरूकता मुहिम का संचालन नहीं किया गया।

स्वच्छता के प्रहरी

पेशे से चिकित्सक डा. चंद्रमोहन सक्सेना पतंजलि योग पीठ और अन्य स्वयंसेवी संगठनों से भी जुडे़ हैं। पैदल ही शहर की दूरी तय करते रहते हैं। पार्कों में हरियाली उगाने के साथ वे लोगों को पालीथिन के दुष्प्रभाव के प्रति भी जागरूक करते हैं। उनका कहना है कि परिवर्तन के लिए युवा ही पहल कर सकते हैं। लिहाजा, वे ज्यादातर कार्यक्रम स्कूलों और कालेजों में ही करते हैं। योग कक्षाओं के जरिए भी योगासन सीखने के लिए आने वालों से पालीथिन का इस्तेमाल न करने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि जागरूकता की इस मुहिम में कई लोग भी अब साथ आ रहे हैं। जल्द ही बाजारों में व्यापारियों से पालीथिन प्रतिबंधित करने के लिए अपील भी की जाएगी।

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