घबराएं नहीं, हर बुखार डेंगू नहीं हो सकता

बुखार से बेकाबू होते हालातों के बीच प्रशासन ने पहल की है। डीएम और सीडीअ

JagranWed, 22 Sep 2021 04:21 AM (IST)
घबराएं नहीं, हर बुखार डेंगू नहीं हो सकता

जासं, मैनपुरी : बुखार से बेकाबू होते हालातों के बीच प्रशासन ने पहल की है। डीएम और सीडीओ ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बुखार प्रभावित गांवों का दौरा कर मरीजों और लोगों से मुलाकात की। अधिकारियों ने अपील करते हुए कहा कि झोलाछाप से उपचार न कराएं। इस बात को दिमाग से निकाल दें कि हर बुखार सिर्फ डेंगू ही है।

बुखार से बिगड़ी स्थितियों के बीच मंगलवार को डीएम महेंद्र बहादुर सिंह, सीडीओ विनोद कुमार और सीएमओ डा. पीपी सिंह के साथ प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने कुसमरा रोड, गणेशपुर, सिकंदरपुर, लालपुर, खरपरी, अजीतगंज, सोथरा, गढि़या जैन, कसौली, सुल्तानगंज, छाछा, आलीपुरखेड़ा, ज्योंती खुड़िया और गुलाबपुर में पहुंचकर स्थितियों का जायजा लिया। डीएम ने कहा कि सबसे पहले लोगों को जागरूक होना होगा।

इस बात को समझना होगा कि हर एक बुखार डेंगू ही नहीं होता है। झोलाछाप प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू बताकर मरीजों को गुमराह करते हैं और गलत उपचार देते हैं। ऐसे में यदि किसी को बुखार की समस्या होती है तो वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें और उपचार कराएं। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारी डा. पपेंद्र कुमार, डा. रविदीप शाक्य, प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी एसएन सिंह, रवींद्र सिंह गौर आदि उपस्थित थे। प्राइवेट लैब की जांचों पर सख्ती, नहीं चलेगी मनमानी: बुखार के बढ़ते प्रकोप के बीच प्राइवेट लैब द्वारा डेंगू की जांच रिपोर्ट देने पर फिलहाल प्रशासन ने अंकुश लगा दिया है। यदि कोई रिपोर्ट देता है तो उसे उसकी जानकारी सीएमओ कार्यालय को भी देनी होगी। वहीं झोलाछाप की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती कर दी है।

अगस्त माह से जिले में बुखार का प्रकोप शुरू हुआ था जो अब विकराल होता जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिले में झोलाछाप भी सक्रिय हो गए हैं। गांव-गांव में इनकी दुकानें सज गई हैं। स्थिति यह है कि फर्जी पैथोलाजी द्वारा किटों के जरिए मरीजों में बुखार को डेंगू बताया जा रहा है। कई ऐसी रिपोर्ट सामने आई हैं, जिसमें मरीज को डेंगू की पुष्टि कर दी गई थी जबकि वे वायरल से बीमार थे।

सीएमओ डा. पीपी सिंह का कहना है कि सिर्फ पंजीकृत पैथोलाजी द्वारा ही जांच की जा सकेगी। इन्हें भी प्रतिदिन की जांच की जानकारी कार्यालय को देनी होगी। यदि किसी मरीज की जांच में डेंगू रिएक्टिव आता है तो ऐसे मरीजों की सूचना स्वास्थ्य अधिकारियों को देनी होगी, ताकि ऐसे मरीजों का एलाइजा टेस्ट कराया जा सके। इसके अलावा यदि कोई जांच करता पकड़ा जाएगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में सिर्फ उन्हीं मरीजों का एलाइजा टेस्ट कराया जाएगा, जिन्हें बुखार से बीमार होने पर भर्ती किया गया है। यदि चिकित्सकों को मरीजों की स्थिति देखकर संदेह होता है तो वे अपनी सुविधानुसार जांचें कराएंगे। उनका कहना है कि झोलाछाप द्वारा प्लेटलेट्स कम दिखाकर मरीजों को डराया जा रहा है।

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