आक्सीजन की कमी पर अब रेफर नहीं होंगे नवजात

100 शैया अस्पताल में नवजातों के उपचार के लिए शासन बेहतर सुविधाएं मुहैया करा रहा है। इस कड़ी में एक और कदम आगे बढ़ाया गया है। शासन द्वारा जिले में संचालित एसएनसीयू के लिए 10 आक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में अब यहां से आक्सीजन की कमी के चलते किसी भी नवजात को रेफर नहीं पड़ेगा। अब तक पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई बार बच्चों की जान बचाने के लिए न मशक्कत करनी पड़ती थी बल्कि रेफर भी करना पड़ता था।

JagranFri, 30 Jul 2021 05:06 AM (IST)
आक्सीजन की कमी पर अब रेफर नहीं होंगे नवजात

जासं, मैनपुरी: 100 शैया अस्पताल में नवजातों के उपचार के लिए शासन बेहतर सुविधाएं मुहैया करा रहा है। इस कड़ी में एक और कदम आगे बढ़ाया गया है। शासन द्वारा जिले में संचालित एसएनसीयू के लिए 10 आक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में अब यहां से आक्सीजन की कमी के चलते किसी भी नवजात को रेफर नहीं पड़ेगा। अब तक पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई बार बच्चों की जान बचाने के लिए न मशक्कत करनी पड़ती थी, बल्कि रेफर भी करना पड़ता था।

गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के साथ 30 दिनों तक के नवजात को भर्ती रखकर उपचार देने के लिए 100 शैया अस्पताल में व्यवस्था है। यहां संचालित एसएनसीयू में 30 दिनों तक के नवजात को समस्या होने पर बेहतर उपचार के लिए 10 रेडिएंट वार्मर उपलब्ध हैं, लेकिन आक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। सिर्फ दो सिलिडर ही उपलब्ध थे। ऐसे में यदि एक साथ तीन से चार गंभीर बच्चे भर्ती होते थे, तो उनकी देखभाल के लिए सिलिडरों को बार-बार बदलना पड़ता था।

एसएनसीयू प्रभारी डा. संदीप कुमार का कहना है कि शासन स्तर से वार्ड के लिए 10 आक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए हैं। इस सुविधा के बाद अब प्रत्येक वार्मर और मशीन पर अपना कंसन्टेटर हो गया है, जो शिशु को आवश्यकता के अनुसार आक्सीजन देता रहेगा। इस सुविधा के मिलने के बाद अब हमारे यहां उन सभी बच्चों को भर्ती रखकर इलाज दिया जा सकता है, जिन्हें आक्सीजन की कमी हो रही है। सीमित संसाधनों और चिकित्सकों के साथ ही हम बेहतर सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। अस्पताल में कोविड प्रोटोकाल का पालन कराते हुए सभी मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, अल्ट्रासाउंड जांच से पहले महिलाओं का कोविड टेस्ट भी कराया जा रहा है। आक्सीजन कंसंट्रेटर मिलने से और भी बेहतर सुविधा दे सकेंगे।

डा. एके पचौरी, सीएमएस, जिला महिला चिकित्सालय।

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