बिचौलियों के चंगुल से आजादी दिलाएगा नया कृषि कानून

बिचौलियों के चंगुल से आजादी दिलाएगा नया कृषि कानून
Publish Date:Wed, 30 Sep 2020 06:20 AM (IST) Author: Jagran

फोटो- पांच से 11 जासं, मैनपुरी: विपक्ष के विरोध के बावजूद तीनों कृषि विधेयक राज्यसभा में पारित हो गए और राष्ट्रपति ने भी इनको मंजूरी दे दी। हालांकि, विपक्ष की सियासत अभी जारी है। राज्यसभा में विधेयकों को रोकने में नाकाम विपक्ष अब केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर आ गया है। बातचीत के दौरान ज्यादातर किसान भी कृषि कानून पर सहमति जता रहे हैं।

किसानों का कहना है कि बिल के पास होने के बाद उन्हें अपनी फसल बेचने की आजादी के साथ दूसरे लाभ भी मिलने की उम्मीद जागी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद जारी रखे जाने से किसानों की फसल और ज्यादा सुरक्षित होगी। अब तक बड़े किसान फसल की अच्छी कीमत पाने के लिए चोरी छिपे हरियाणा की मंडी में अपनी उपज लेकर जाते थे। इस विधेयक ने उन्हें खुले तौर पर दूसरे प्रदेशों की मंडी में अपना अनाज बेचने की छूट दी है। अब चावल स्थानीय बाजार के बजाय अन्य शहरों में भेजा सकेगा। किसानों की राय: यह विधेयक किसानों को अपने उत्पाद बेचने की आजादी देगा और वे मंडी तक सीमित नहीं रहेंगे। इससे उन्हें फसल की अच्छी कीमत भी मिलेगी। मंडियों के अलावा फार्म गेट, कोल्ड स्टोर, वेयर हाउस और प्रसंस्करण यूनिटों के पास भी व्यापार के ज्यादा अवसर होंगे। बिचौलियों का खेल भी खत्म हो जाएगा। -सुदर्शन दुबे, किसान

अनुबंधित किसानों को सभी प्रकार के कृषि उपकरणों की सुविधाजनक आपूर्ति हो सकेगी। उन्हें उत्पाद बेचने के लिए मंडियों और व्यापारियों के चक्कर भी नहीं लगाने होंगे। मंडी में बिचौलियों का खेल खत्म होगा तो इसका फायदा भी किसानों को मिलेगा। -विश्राम, किसान

किसान को समय पर फसल का भुगतान मिल सकेगा। इसका लाभ मुझ जैसे लाखों सीमांत व छोटे किसानों को मिलेगा। खेत में ही उपज की गुणवत्ता जांच और परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कृषि उत्पाद की गुणवत्ता सुधरेगी और बिना रोकटोक निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। -शैतान सिंह, किसान

जब सब्जियों की कीमत ज्यादा होगी या खराब न होने वाले अनाज का मूल्य 50 फीसद बढ़ जाएगा तो सरकार भंडारण की सीमा तय कर देगी, इससे किसान और खरीदार दोनों को फायदा होगा। कोल्ड स्टोर और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश बढ़ेगा। किसानों की फसल बर्बाद नहीं होगी। -जबर सिंह, किसान

फसल की उपज को लेकर किसान अनुबंध कर सकेगा। देश में कहीं भी माल बेच सकेंगे। यह किसानों के लिए फायदे का सौदा है। किसान इस विधेयक को सीधे सरल शब्दों में पढ़े तो समझ आएगा कि उन्हें एक आजादी मिली है। विरोध सिर्फ बिचौलिए कर रहे हैं। -राजेश कुमार, किसान

अनुबंधित कृषि समझौते में किसानों का पक्ष कमजोर होगा। बड़ी कंपनियां, निर्यातक, थोक विक्रेता और प्रसंस्करण इकाइयां इसका लाभ लेना चाहेंगी। नए विधेयक से कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथ में चला जाएगा और इसका सीधा नुकसान किसानों को ही होगा। -भगवान दास, किसान

आंकड़े

3.84: लाख जिले में किसान

1.5 : लाख हेक्टयेर गेहूं का रकबा

22.5: हजार हैक्टेयर आलू का रकबा

65 : हजार हेक्टयेर धान का रकबा

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