एमडीएम पर नहीं पड़ा महंगाई का असर

बेसिक के स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों को मिड-डे-मील (एमडीएम) परोसा जाने लगा है। सरकार की इस उपकार पर महंगाई का असर नहीं नजर आ रहा है। शिक्षक आज भी मसाले तेल और अन्य सामग्री महंगी होने के बाद भी पुरानी दरों पर विद्यार्थियों का पेट भर रहे हैं। सरकार प्राइमरी के लिए 4.97 और जूनियर के लिए 7.45 रुपये प्रति बच्चा प्रतिदिन उपलब्ध करा रही है। इतनी कम कास्ट में शिक्षकों को एमडीएम संचालन में कठिनाई आ रही है।

JagranTue, 21 Sep 2021 04:42 AM (IST)
एमडीएम पर नहीं पड़ा महंगाई का असर

जासं, मैनपुरी: इन दिनों महंगाई आसमान छू रही है। खाद्य वस्तुएं भी महंगाई से प्रभावित हुई हैं। लेकिन, सरकार की मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) योजना पर महंगाई का असर नहीं है। शिक्षकों को मिड डे मील के लिए मसाले, तेल और अन्य सामग्री बढ़ी दरों पर खरीदनी पड़ रही है। सरकार प्राइमरी के लिए 4.97 और जूनियर के लिए 7.45 रुपये प्रति बच्चा प्रतिदिन उपलब्ध करा रही है। इतनी कम कास्ट में शिक्षकों को एमडीएम के संचालन में कठिनाई आ रही है।

बाजार में मिर्च-मसाला एक साल में काफी महंगा हो गया है तो दूध का भाव गांव में ही 50 रुपये लीटर हो चुका है। गैस सिलेंडर भी 900 रुपये से अधिक हो चुका है। सरसों का तेल बंद बोतल में 180 रुपये लीटर मिल रहा है, लेकिन बेसिक के बच्चों को आज भी गुरुजी पुरानी दरों पर ही दोपहर का भोजन करा रहे हैं। दो साल में ये हुई बढ़ोत्तरी

वर्ष 2017 में प्राइमरी स्कूल में प्रति छात्र एमडीएम कास्ट 4.35 रुपये और जूनियर हाईस्कूल में 6.51 रुपये थी। सरकार ने अप्रैल में नया सत्र चालू होने के बाद एमडीएम कास्ट में मामूली वृद्धि की। इसमें प्राइमरी के प्रति छात्र के लिए 13 पैसे का इजाफा कर इसे 4.48 रुपये कर दिया, जबकि जूनियर में 20 पैसे का इजाफा कर 6.71 रुपये कर दिया है। कोरोना काल के दौरान स्कूल बंद रहने के दौरान बीते साल यह कास्ट 4.97 रुपये और जूनियर के लिए 7.45 रुपये कर दी गई थी। इस साल नही हुई बढ़ोत्तरी

इस साल सितंबर से स्कूल खोले गए हैं। बच्चों को शिक्षण के लिए बुलाया जाने लगा है। बंद स्कूल के दौरान एमडीएम कास्ट तो खातों में गई, लेकिन अब स्कूल संचालन के दौरान बीते साल तय कास्ट से बच्चों को एमटीएम परोसा जा रहा है। जूनियर के विद्यार्थियों को बीते साल की कास्ट पर ही एमडीएम दिया जा रहा है। बुधवार को मीठा दूध भी पिलाने के आदेश है। सरकार को कास्ट बढ़ानी चाहिए।

गोविद पांडेय, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय माध्यमिक शिक्ष संघ। पाठशाला के बच्चों के लिए एमडीएम की कास्ट काफी कम है। संगठन कई बार मांग कर चुका है। पांच रुपये में दो सौ ग्राम मीठा दूध कैसे दिया जा सकता है, इस ओर कोई नहीं सोचता है। गैस, तेल और मसाले बीते साल से काफी महंगे हो गए हैं।

महेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ। वर्जन

कन्वर्जन कास्ट में इजाफा करने का काम शासन का है, वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं। कम हो या ज्यादा, शासन का आदेश स्वीकार्य है।

-कमल सिंह, बीएसए।

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