अस्पताल में हाईटेक इंतजाम, जरूरत पर उपचार

कोरोना से निपटने के लिए जिले में कराई गई स्वास्थ्य सुविधाएं बुखार के कहर के आगे थोड़ी बौनी साबित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को उपचार दिलाए जाने की बात तो कर रहा है लेकिन हर एक मरीज को यहां तक ये सुविधा अभी तक नहीं मिल रही हैं। ज्यादातर गंभीर मरीजों को सैफई के लिए रेफर किया जा रहा है।

JagranTue, 26 Oct 2021 05:45 AM (IST)
अस्पताल में हाईटेक इंतजाम, जरूरत पर उपचार

जासं, मैनपुरी: कोरोना से निपटने के लिए जिले में कराई गई स्वास्थ्य सुविधाएं बुखार के कहर के आगे थोड़ी बौनी साबित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को उपचार दिलाए जाने की बात तो कर रहा है, लेकिन हर एक मरीज को यहां तक ये सुविधा अभी तक नहीं मिल रही हैं। ज्यादातर गंभीर मरीजों को सैफई के लिए रेफर किया जा रहा है।

कोरोना से निपटने के लिए शासन द्वारा एल-2 आइसोलेशन अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इनमें 26 वेंटीलेटर के साथ पीकू वार्ड में थर्मल स्कैनर, पोर्टेबल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। पीकू वार्ड में गंभीर बच्चों को भर्ती कर उपचार देने की सुविधा है। सीएमओ डा. पीपी सिंह का कहना है कि बुखार के सबसे ज्यादा मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। मरीजों की सुविधा को देखते हुए हमने एल-2 के ज्यादातर बिस्तरों को अस्पताल की दूसरी मंजिल पर शिफ्ट कराया है। यहां के स्टाफ को भी अस्पताल की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। ज्यादातर मरीज ठीक होकर जा रहे हैं। जिन्हें वेंटीलेटर या अन्य सुविधाओं की जरूरत है, उन्हें भर्ती भी कराया जा रहा है। अभी तक यहां दर्जन भर से ज्यादा श्वांस रोगियों को वेंटीलेटर की सुविधा देकर उपचार दिया जा चुका है, जबकि दो दर्जन से ज्यादा बच्चों को पीकू वार्ड की बेहतर सुविधाओं के जरिए उपचार दिया गया है। इमरजेंसी से रेफर किए जाते मरीज

बुखार के सर्वाधिक मरीज इमरजेंसी पहुंचते हैं। यहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों द्वारा तत्काल बेहतर उपचार के लिए सैफई के लिए रेफर कर दिया जाता है। अगस्त से अब तक लगभग डेढ़ सैकड़ा मरीज रेफर हो चुके हैं, जिनमें आधा सैकड़ा बच्चे शामिल हैं। यदि किसी मरीज को समस्या है और वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है तो सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इसके लिए चिकित्सकों को निर्देशित भी किया जा चुका है। पीकू में यदि बच्चे भर्ती होते हैं तो बाल एवं शिशु रोग की मदद से उन बच्चों की नियमित मानीटरिग कराई जाएगी। हालांकि, अभी तक कोई भी ऐसा मरीज नहीं आया है, जिन्हें लंबे समय तक भर्ती करना पडे़। जो भी भर्ती हुए हैं, उन्हें कुछ घंटों में आराम मिलने पर सामान्य वार्ड में शिफ्ट कराया गया है।

डा. पीपी सिंह, सीएमओ

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