जिला अस्पताल में सफाई, परिसर कूड़ा-कूड़ा

जिला अस्पताल के अंदर तो सफाई के प्रबंध बेहतर हैं लेकिन परिसर के हालात को लेकर कोई गंभीर नहीं है। जिला अस्पताल और 100 शैया अस्पताल के बाहर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। एएनएम ट्रेनिग सेंटर के अलावा डाक्टरों के आवास के आसपास कचरे का ढेर लगा रहता है। यहां की स्थिति सुधारने के लिए आज तक किसी के द्वारा कोई पहल नहीं की गई है। जलभराव तो लंबे समय से बना हुआ है। प्लाट को पालिकाकर्मियों द्वारा अस्थायी डलावघर में तब्दील कर दिया गया है। न तो डाक्टरों ने विरोध किया और न ही कभी प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां की अव्यवस्था की पड़ताल की। एक भी कूडे़दान नहीं रखवाया गया है।

JagranTue, 26 Oct 2021 05:00 AM (IST)
जिला अस्पताल में सफाई, परिसर कूड़ा-कूड़ा

जासं, मैनपुरी: दृश्य एक :

जिला अस्पताल परिसर में निजी कंपनी के हाथ में सफाई की जिम्मेदारी है। कर्मचारियों द्वारा पूरे अस्पताल में तीन बार झाडू लगाकर गंदगी की सफाई कराई जाती है। वार्डों की स्थिति तो अच्छी है, लेकिन अस्पताल परिसर में कूड़ा पड़ा हुआ है। इमरजेंसी के नजदीक ही नाले ओवरफ्लो हैं। झाड़ियों की सफाई नहीं कराई जाती। अस्पताल के दूसरे गेट पर पालिका के सफाईकर्मियों और स्थानीय दुकानदारों द्वारा गंदगी फेंकी जाती है। दृश्य दो :

100 शैया अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था बेहतर है, लेकिन अस्पताल के बाहर के हालात बदतर हैं। कैंपस में खाली पडे़ एक हिस्से को अस्थायी डलावघर बना दिया गया है। एएनएम ट्रेनिग सेंटर से सटे प्लाट में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा फेंका जाता है। यहां नालियों की सफाई नहीं कराए जाने से होने वाली दुर्गध परेशानी का सबब बनी हुई है। नलकूप के आसपास गंदगी लगातार फेंकने से पेयजल के साथ गंदगी घरों तक जाने का खतरा भी बढ़ने लगा है। लोगों के लगातार विरोध के बावजूद यहां स्वच्छता को लेकर कोई पहल नहीं की गई है।

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जिला अस्पताल के अंदर तो सफाई के प्रबंध बेहतर हैं, लेकिन परिसर के हालात को लेकर कोई गंभीर नहीं है। जिला अस्पताल और 100 शैया अस्पताल के बाहर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। एएनएम ट्रेनिग सेंटर के अलावा डाक्टरों के आवास के आसपास कचरे का ढेर लगा रहता है। यहां की स्थिति सुधारने के लिए आज तक किसी के द्वारा कोई पहल नहीं की गई है। जलभराव तो लंबे समय से बना हुआ है। प्लाट को पालिकाकर्मियों द्वारा अस्थायी डलावघर में तब्दील कर दिया गया है। न तो डाक्टरों ने विरोध किया और न ही कभी प्रशासनिक अधिकारियों ने यहां की अव्यवस्था की पड़ताल की। एक भी कूडे़दान नहीं रखवाया गया है।

इनसे सीखें

देवी रोड पर कूड़ा निस्तारण के लिए प्रवीण मिश्रा द्वारा किए गए प्रयास से लोगों में जागरूकता आई है। देवी रोड पर कई जगह पर कचरा फेंका जाता है। सड़क से कचरा निस्तारण के लिए उन्होंने स्वयं ही पहल की। कई बार पालिका के वाहनों को रोककर डंपिग जोन हटवाने के लिए कहा। स्थिति यह रही कि हालात में बहुत हद तक सुधार भी हुआ। उनका कहना है कि कोई भी काम तब बेहतर ढंग से होता है जब कई आवाज मिलकर एक होती हैं। गंदगी का निस्तारण तो सभी चाहते हैं, लेकिन जब बात विरोध की या आवाज उठाने की आती है तो कोई साथ नहीं आता। हालांकि वे अब भी लगातार बेहतर व्यवस्था के लिए पालिका को ज्ञापन देकर पहल की अपील करते रहते हैं। सावधान

महिलाओं पर स्वयं के साथ पूरे परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में हमें सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा गंभीर नहीं होती हैं। गंदगी की वजह से बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं। महिलाओं में कमर और पैरों में दर्द के साथ इन्फेक्शन फैलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि घर और आसपास की सफाई रखने के साथ स्वयं की स्वच्छता का भी ख्याल रखें। हाथों को हमेशा सैनिटाइज करें। यदि किसी भी प्रकार की समस्या महसूस हो तो उसे अनदेखा न कर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।

डा. सपना चौहान, महिला चिकित्सक अपील

अस्पताल और उसके आसपास के स्थल की सुरक्षा का ख्याल हमें ही रखना होगा। यदि चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी स्वस्थ होंगे तो वे मरीजों को भी बेहतर उपचार दे सकेंगे। इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।

डा. आरएस यादव, चिकित्सक। पालिका प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अस्पतालों और परिसर के आसपास की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यहां डंपिग जोन हटवाकर नियमित कूड़ा उठान की व्यवस्था कराई जाए।

राबिन तिवारी, समाजसेवी। स्वास्थ्य अधिकारियों को भी चाहिए कि वे अपने परिसर में कूड़ा न पड़ने दें। अपनी हदों को स्वत: नियंत्रित करें। अस्पतालों के पास अपने भी सफाई कर्मचारी हैं। उनकी मदद से यदि सप्ताह में एक दिन अभियान के तहत सफाई कराई जाए तो बड़ा फर्क दिखेगा।

सुनील वर्मा, कारोबारी।

अस्पताल परिसर में पालिका प्रशासन को सर्वाधिक डस्टबिन के प्रबंध कराने चाहिए, ताकि गंदगी उन्हीं में फेंकी जाए। इस व्यवस्था से सार्वजनिक स्थानों पर गदंगी नहीं दिखेगी और कम समय में आसानी से कूड़ा उठान भी हो जाएगा।

राजीश यादव, एड.।

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