गेहूं और धान की बेभाव मंडी, बेजार हुआ अन्नदाता

गेहूं और धान की बेभाव मंडी, बेजार हुआ अन्नदाता

मैनपुरी जासं कोरोना काल किसानों के लिए कष्टकारी साबित हो रहा है।

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 06:06 AM (IST) Author: Jagran

मैनपुरी, जासं: कोरोना काल किसानों के लिए कष्टकारी साबित हो रहा है। मंडी में फसलों को बीते साल से ज्यादा मूल्य नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार की हर माह निश्शुल्क राशन वितरण योजना ने किसानों को परेशानी में ला दिया है। मंडी में गेहूं का भाव 16 सौ रुपये कुंतल के आसपास है। धान भी नुकसान का सौदा बना हुआ है। ऐसे में किसान को मजबूरी में कम रेट पर फसल बेचनी पड़ रही है।

शहर की नवीन मंडी में इन दिनों धान की भरपूर आवक हो रही है तो किसान सीजन पर रोके गए गेहूं को बेचने भी आ रहे हैं। सैकड़ों वाहनों से आ रहे धान की वजह से सुबह होते ही आढ़तियों के चबूतरे इस जिस से भर जाते हैं तो कई बार जाम के हालात भी होते हैं, लेकिन भरपूर आवक होने के बाद भी आए दिन बेभाव रहने वाली मंडी अन्नदाता को उसकी मेहनत की कमाई नहीं दे पा रही है। गेंहू बिका 1570 रुपये

सीजन पर सरकारी क्रय केंद्रों पर 1925 रुपये कुंतल बिके गेहूं को अब मंडी में भाव नहीं मिल पा रहा है। अब तक इस सीजन में गेहूं 16 सौ रुपये कुंतल से ज्यादा पर नहीं बिक सका है। गुरुवार को भी शहर की नवीन मंडी में किसानों का गेहूं 1570 रुपये प्रति कुंतल ही खरीदा गया। मंडी में यह भाव दस-बीस रुपये रोज ऊपर-नीचे होता है। पीएम गरीब कल्याण योजना तो वजह नहीं

गेहूं कारोबार से जुड़े व्यापारी रामअवतार के अनुसार, गेहूं का कम भाव होने की वजह पीएम गरीब कल्याण योजना हो सकती है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने इस साल कोरोना की दस्तक के बाद पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत राशन कार्ड धारकों को एक माह में दो बार राशन देना शुरू किया तो गेहूं का भाव अब तक नहीं संभल सका है। भाव कम होने की यह भी वजह है। अब ऐसे नागरिक बाजार से आटा और गेहूं खरीदना कम कर चुके हैं। राशन के गेहूं ने कम किए भाव

जानकार तो गेहूं भाव कम होने की वजह को राशन में मिलने वाले गेहूं को बताते हैं। ऐसे जानकारों के अनुसार, एक परिवार राशन में एक बार मिलने वाले खाद्यान्न से महीना गुजारता था। एक महीने में दूसरी बार निश्शुल्क राशन में गेहूं मिलने से अब यह अतिरिक्त राशन बाजार में बिक रहा है। इससे भाव बढ़ ही नहीं पा रहे हैं। निश्शुल्क खाद्यान्न वितरण योजना ने गेहूं को बेभाव कर रखा है। खरीदारी हो रही है, लेकिन बाजार में आटे की मांग कम हैं। एक किलो आटा चक्की पर 22 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

- उपदेश यादव, अध्यक्ष फूट ग्रेन एसोसिएशन। बीते साल से कम भाव पर बिक रहा धान

जासं, मैनपुरी: खेती में जान डालने वाला किसान मायूस है। उत्पादन कम निकलने से परेशान अन्नदाता अब व्यापारियों की मर्जी से व्यथित है। मंडी में किसानों को पतले धान का भाव व्यापारियों की कृपा से ही मिल रहा है। ऐसे में किसान को माल औने-पौने भाव में बेचने को विवश होना पड़ रहा है।

जिले में इस बार करीब 65 हजार हेक्टेयर रकबा में धान रोपाई के बाद किसानों को सफेद दानों का बेहतर भाव मिलने की उम्मीद थी। फसल तैयार कर माल लेकर मंडी आया किसान भाव सुनकर अवाक रह जाता है। गुरुवार को बीते साल के मुकाबले किसानों का धान सात सौ रुपये प्रति कुंतल पर खरीदा गया। शहर की नवीन मंडी में सुंगधा धान 1700 रुपये कुंतल, 1509 धान 1600 और ताज धान 1500 से 1550 रुपये तक ही बिका। आलीपुर खेड़ा के राजालाल ने बताया कि बीते साल मैनपुरी मंडी में उनका सु्गधा धान 2200 रुपये बिका था, जबकि इस साल भाव सात सौ रुपये कम मिला है। किसानों की बात

बाहरी व्यापारी को मंडी में माल नहीं खरीदा जाने दिया जाता है। स्थानीय व्यापारी भाव को लेकर मनमानी दिखाते हैं। यहां 17 सौ रुपया कुंतल खरीदा जाने वाला पतला धान अलीगढ़ में 22 सौ तक बिक रहा है।

धनपाल पतला धान पैदा किया है। स्थानीय व्यापारियों के खोले गए भाव पर माल बेचना पड़ा है। इस बार कोई खास फायदा नहीं हुआ है। मौसम की वजह से भी उत्पादन कम रह गया है।

- रामभरोसे।

भाव कम मिल रहा है। सरकारी केंद्रों पर पहले पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद माल लेकर क्रय केंद्र आने पर उसमें नमी बताकर नहीं खरीदा जाता, ऐसे में स्थानीय व्यापारियों को माल बेचना पड़ रहा है।

- विशाल। मोटा धान मंडी में व्यापारी खरीद नहीं रहे हैं। क्रय केंद्रों पर परेशानी होती है, वहां सेटिग वालों का माल बिकता है। मंडी में धान की आवक कम होने के बाद क्रय केंद्र वाले दलालों के जरिये मोटा धान खरीदेंगे।

-पप्पू।

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