छेड़खानी की शिकायत करने पर पीड़िता का घर फूंका

छेड़खानी की शिकायत करने पर पीड़िता का घर फूंका

घर में सो रहे पीड़िता के स्वजन ने किसी तरह भागकर जान बचाई।

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 11:50 PM (IST) Author: Jagran

महराजगंज: श्यामदेउरवा थानाक्षेत्र के एक गांव की महिला को छेड़खानी व अश्लील हरकत का विरोध करते हुए पुलिस से शिकायत करना महंगा पड़ गया। गुरुवार की देर रात आरोपित के भाई व भतीजे ने पीड़िता के किराए के मकान में घुसकर कीमती सामान लूटकर उसके घर में आग लगा दी। घर में सो रहे पीड़िता के स्वजन ने किसी तरह भागकर जान बचाई। घटना के 24 घंटे बाद भी मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़िता ने शुक्रवार की सुबह एसपी से गुहार लगाई है। अपने प्रार्थनापत्र में महिला ने लिखा है कि गुरुवार की सुबह गांव का ही आरोपित घर में घुस गया और छेड़खानी करने लगा। विरोध करने पर गालियां देते हुए मारने-पीटने लगा तथा कपड़ा भी फाड़ दिया। यहां तक कि बीच बचाव करने आई बहन के साथ मारपीट करने लगा। शिकायत से नाराज आरोपित के स्वजन ने देर रात पीड़िता के किराए के मकान में आग लगा ली। घर में रखा कीमती सामान व जेवरात लूट ले गए। आगजनी के चलते घर में रखा सामान जलकर राख हो गया। प्रभारी थानाध्यक्ष नथुनी यादव ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा। शार्ट-सर्किट से दो दुकानों में लगी आग

महराजगंज: श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के परतावल कप्तानगंज मार्ग पर भारतीय स्टेट बैंक के पास शार्ट सर्किट से दो दुकानों में आग लगने से लाखों का सामान जलकर राख हो गया। गुरुवार की देर रात छातीराम निवासी संजय विश्वकर्मा के मोबाइल की दुकान व विवेक गुप्ता के जनरल स्टोर में शार्ट सर्किट से मोबाइल सहित लाखों का सामान जलकर राख हो गया। आठ माह बाद स्वजन से मिलकर बिलख पड़ी नइमा खातून

महराजगंज: आठ माह पहले बिहार के छपरा अपने मायके गई सिसवा ब्लाक के लक्ष्मीपुर कोर्ट निवासी नइमा देवी भटककर केरल पहुंच गई और मानसिक स्थिति ठीक न होने से इधर-उधर भटकने लगी। आठ माह बाद गुरुवार को केरल के सामाजिक संस्था 'एस्पाइरिग लाइव्स' के माध्यम से पुन: जब अपने परिवार से मिली तो बिलख पड़ी। बेटे आबिद को गले लगाकर काफी देर तक नइमा खातून रोती रही। नइमा खातून के पुत्र आबिद अली ने बताया कि आठ माह पहले उनकी मां नइमा अपने मायका बिहार के छपरा जाने के लिए ट्रेन से निकली थी। वहां से वापस आते वक्त जब वह घर नहीं पहुंची तो उसकी छानबीन शुरू हुई। लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल सका। इधर दो दिन पूर्व एक सामाजिक संस्था से फोन पर उनकी फोटो और जानकारी हुई तो फिर उन्हें लाया गया है। महिला से स्वजनों से मिलवाने में सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कुमार व फरीहा सुमन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निचलौल के उपजिलाधिकारी रामसंजीवन मौर्या का कहना है कि महिला को संस्था ने स्वजन को सुपुर्द कर दिया है।

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