नाई समाज का हित सपा में ही सुरक्षित : संजय

जिलाध्यक्ष आमिर हुसैन ने कहा कि नाई समाज के मान-सम्मान के लिए समाजवादी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी। किसान नौजवान पूरी तरह से इस सरकार में परेशान हैं। गरीब लोगों का थानों व सरकारी दफ्तरों में सुनवाई नहीं हो रही है। आने-वाले दिनों में जनता भारतीय जनता पार्टी की सरकार को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

JagranSat, 31 Jul 2021 02:14 AM (IST)
नाई समाज का हित सपा में ही सुरक्षित : संजय

महराजगंज: नाई समाज का उत्पीड़न वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार में बढ़ गया है। भाजपा द्वारा नाई समाज को सिर्फ छलने का काम हुआ। जबकि समाजवादी आंदोलन सदैव समाज के दबे, कुचले, वंचित वर्ग के उत्थान के लिए प्रेरित किया है। इसलिए सपा में ही नाई समाज का हित सुरक्षित है। यह बातें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व सदस्य संजय विद्यार्थी ने कही। वह समाजवादी पार्टी कार्यालय पर नाई समाज सम्मान समारोह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब-जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है, तब-तब अति पिछड़े व वंचित वर्ग को सम्मानित करने का कार्य हुआ।

जिलाध्यक्ष आमिर हुसैन ने कहा कि नाई समाज के मान-सम्मान के लिए समाजवादी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी। किसान नौजवान पूरी तरह से इस सरकार में परेशान हैं। गरीब लोगों का थानों व सरकारी दफ्तरों में सुनवाई नहीं हो रही है। आने-वाले दिनों में जनता भारतीय जनता पार्टी की सरकार को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

इस अवसर पर नाई समाज के जिला अध्यक्ष गिरजेश शर्मा ने नाई समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। सम्मान समारोह के अवसर पर प्रद्युमन शर्मा को सपा जिला कार्यकारिणी का सचिव बनाने के लिए प्रस्ताव प्रेषित किया गया। पूर्व विधायक श्रीपति आजाद, निर्मेश मंगल, दीनबंधु यादव दीपू, परशुराम निषाद अतुल पटेल, कैलाश यादव, जितेंद्र यादव, राम ललित मौर्य, तसव्वर हुसैन, राममिलन गोंड, समीम खान आदि बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

समान कार्य के लिए समान वेतन की उठी मांग

महराजगंज: प्रधानाचार्य परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष त्रियुगीनारायण त्रिपाठी ने एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को पत्र भेजकर शिक्षक समस्याओं के समाधान सहित समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग की है। भेजे गए पत्र में त्रिपाठी ने कहा है कि प्रदेश के संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठ सहायक अध्यापकों से ही प्रधानाचार्य का काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें प्रधानाचार्य का वेतन न देकर सहायक अध्यापक का ही वेतन दिया जाता है। ऐसे में संस्कृत विद्यालयों में काम करने वाले कार्यवाह प्रधानाचार्यों में कुंठा पनप रही है, जिसका शीघ्र समाधान आवश्यक है।

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